Sunday, 17 April 2016

वाराणसी के बीएचयू कैंपस में स्थापित नए काशी विश्वनाथ मंदिर की आखों देखी दास्ता

काशी एक शहर नही बल्कि आस्था विश्वास और मान्यताओं का संगम है।इस प्राचीन नगरी के कोने-कोने में समर्पण भरी आस्था देखने को मिलती है। इसका एक नाम काशी है तो दूसरा नाम बनारस । ऐसा माना जाता है कि जब पृथ्वी का निर्माण हुआ था तब सूर्य़ का पहली किरण काशी की धरती पर ही पड़ी थी और तभी से काशी ज्ञान और अध्यात्म का केन्द्र बन गई। काशी के नाम के साथ-साथ यहा स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का नाम भी दुनिया भर में प्रसिध्द है। देश विदेश से छात्र यहां पर पढ़ाई करने आते है। इसी विश्वविद्यालय के परिसर में निर्मित है नया काशीविश्वनाथ मंदिर। इस मंदिर कि संकलपना पं. मदन मोहन मालवीय ने कि थी। उनके इस संकलपना को साकार किया बिड़ला ग्रुप ने। और इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया।। मंदिर के बाहर पूजा समाग्री की कई दूकाने है। जहां से भक्तगण प्रसाद और माला खरीदते है। और प्रवेश द्वार की ओर बढ़ते है। इस मंदिर का द्वार बेहद भव्य है। द्वार के ऊपर दोनों तरफ छतरीया बनी हुई है।

यहा से अंदर जाते ही विश्वनाथ मंदिर का विशाल परिषद दिखाई देता है। विशाल परिषद के बीच स्थित इस अद्भूद मंदिर का निर्माण सगमरमर और लाल पत्थर से किया गया है। मंदिर की कारगरी,नकासी देखने लायक है। मंदिर के शिखर पर घंटी नूमा आकृति बनाई गई है। जो इसकी सुन्दरता में चार चॉद लगाती है। मंदिर के अंदर मुख्य गर्भ गृह में भगवान शंकर का अतिसुंदर शिवलिंग स्थापित है। रोजाना सैकड़ों भक्त इस मंदिर में दर्शन करने आते है। भक्त गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते है। और भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते है। बाबा भोलेनाथ का द्वार हर वर्ग हर जाति और हर संप्रदाय के लिए खुला है। दो मंजिला यह मंदिर अंदर से भी बेहद आकर्षक है। इसकी दिवारों पर सुंदर चित्रकारी कि गई है। मंदिर के बाहरी परिस में देवाधि देव महादेव का सवारी नंदी की प्रतिमा भी स्थापित है। महाशिवरात्रि और सावन के मौके पर यहां भक्तों की खासी भीड़ होती है। इस मौके पर विशेष कार्यक्रर्मों का आयोजन किया जाता है। जिसमें लाखों की संख्या में भक्त हिस्सा लेते है। विदेश से आने वाले भक्तों को भी यह मंदिर बेहद आकर्षक लगता है।  यहां पहुंचा हर वर्ग  बाबा भोलेनाथ के दर्शन कर धन्य हो जाता है। और यही कामना करता है भगवान अपने भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखेगें।