Thursday, 31 December 2015

अलविदा 2015 के साथ नए साल 2016 का आगाज

2015 की विदाई के साथ दोबारा दिल खोलने का समय आ गया है...कोई भावुक है कोई बेपरवाह...पर सभी 2016 की दहलीज़ को शुभ लाभ के कलश के साथ लांघने के लिए कतारबद्ध हैं...चूंकि तुममें मैं हूं मुझमें तुम हो इसलिए तुम्हारे सामने ज़हन के यह कड़कड़ाते बादल बरस रहे हैं...साल 2015 घर दोस्तों पिता भाई बहन मां का साथ छूट गया था..दुनिया सिमट गई ...रिश्तों के ताने और बाने दोनो झेले..संभली और आंखों के पन्नों को भरने की ठानी...मां की ममता वात्सल्य की कमी को कोई नहीं पूरी नहीं कर सकता है फिर भी कुछ लोगों की मेहनत मुझे पत्थर पर फूल उगाने के लिए काम आई...जो हुआ उसे हम टाल नहीं सकते...यादों को पौठली में बांध कमरदर्द लेने से बेहतर था आगे बढ़ना ...बढ़ा लेकिन फिर भी कमर के लचकने का एहसास हुआ...रीढ़ की हड्डी जो टूट गई थी...फिर भी एक दिव्यांग की तरह निकल पड़ी भगवान की बनाई कुछ और खूबसूरती को देखने..महसूस करने...दिल दिमाग पर परेशानियों के हथोड़े पड़ रहे थे लेकिन मैने वैद्य बनने की ठानी...दोस्त कुछ खर्च हुए कुछ का बैंड बजा कुछ का मस्त वाला साथ मिला...गैरो का प्यार और परायों की ललकार का कंपन महसूस किया ...लेकिन इस भूंकप ने नुकसान ज्यादा नहीं किया...अपने अपने हो गए...कुछ अपने दूर हो गए...कुछ हवा के झोके के साथ चले गए...आरोप लगे पर तारीफों ने समां बांधा...बहुत सीखा..बहुत सिखाया..सतर्क हुआ पर बेबाकी जारी रही...नया आयाम मिला..सौंदर्य के तेज के बीच पूर्णिमा का चांद खिला..गृह जनपद की मायूसी के बीच विदेशी ज़मीन में शोर शराबा हुआ...अफगान जलेबी से लेकर देसी कट्टा की महफिल सजी...कमीनेपन हरामीपन बचपन सबको LITTLE LITTLE TRY किया...ग्लैमर की चकाचौंध में भी ज़मीनी रहने का सुकून मिला...जो हुआ गलत हुआ...जो हुआ अच्छा हुआ...बेहतर है छोड़ों या तो तोड़ों...
अब आने वाला कल बहुत अच्छा होगा..शहनाई पढ़ाई विदाई बुराई बड़ाई कमाई सिलाई अगुवाई रहे पर तनहाई छोड़ दे...अपनों का साथ मिले..दिल दिमाग से मेहनत हिले...भाग्य खिल उठे...जो साथ रहे उनको प्यार...जिन्होंने सबक सिखाया उनका तहे दिल से शुक्रिया...खुदा नूर सुकून शौहरत इज़्जत सब बख्शे मुझसे ज्यादा आपको...चूंकि आपकी खुशी में ही मेरी तरक्की है ...अब आगे की तैयारी कर रही हूं...हां दुआओं में याद रखना ...

                                          HAPPY NEW YEAR 2016

Monday, 28 December 2015

राजनैतिक तौर कैसा रहा 2015 में उत्तर प्रदेश

अब साल 2015 अलविदा होने वाला है और नए साल यानी 2016 के आगाज की तैयारियां जोरों पर हैं. आइए उत्तर प्रदेश पर राजनैतिक तौर पर एक नजर डालते हैं. साल 2015 में देश में यूपी ने खूब सुर्खियां बटोरी आखिर ऐसी क्या वजह रही जिससे सभी नेताओं की जुबान पर यूपी का नाम छाया रहा. पढ़िए विशेष रिपोर्ट.

लोकायुक्त नियुक्ति को लेकर सरकार और राजभवन आमने सामने
साल 2015 में उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार और राजभवन के बीच लोकायुक्त नियुक्ति को लेकर चले उठापटक को लेकर प्रदेश देश भर मे काफी सुर्खियों में रहा. पहले प्रदेश सरकार ने अपने खास रिटायर्ड जस्टिस रविन्द्र सिंह को लोकायुक्त बनाने के लिए हर हथकंडे अपनाए. लेकिन हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की आपत्ति के बाद सरकार ने कैबिनेट के जरिए नियुक्ति करने का फैसला किया, लेकिन गवर्नर राम नाईक ने तीन बार लोकायुक्त नियुक्ति की फाइल को लौटा दिया और सरकार को निर्देश दिया की किसी अन्य नाम पर विचार करे जिसपर सबकी सहमति हो.

सुप्रीम कोर्ट ने किया एेतिहासिक फैसला, नियुक्ति किया लोकायुक्त
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रदेश सरकार को लोकायुक्त नियुक्ति में हो रही देरी के लिए जमकर फटकार लगाई. लगभग साल भर के जद्दोजहद के बाद अन्त में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए एक नाम पर फैसला करने का आदेश सुनाया. इसके वावजूद किसी एक नाम पर सहमति न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेषाधिकार की धारा 142 का प्रयोग करते हुए लोकायुक्त की नियुक्ति कर दी. एक बार लगा कि प्रदेश को नया लोकायुक्त मिल गया. सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस वीरेंद्र सिंह के नाम पर मुहर लगा दी थी. लेकिन एक बार फिर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने सरकार द्वारा सुझाए गए पांच नामों में से जस्टिस वीरेंद्र सिंह के नाम पर आपत्ति जताई. उन्होंने राज्यपाल को भेजे अपने पत्र में लिखा कि पांच नामों में से जस्टिस वीरेंद्र सिंह का नाम चयन समित के समक्ष रखा ही नहीं गया था. इस बीच राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए जस्टिस वीरेंद्र सिंह की नियुक्ति पर अपने हस्ताक्षर कर दिए. शपथ ग्रहण 20 दिसंबर को होना था लेकिन ठीक उसी समय सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की आपत्ति को संज्ञान में लेते हुए शपथ ग्रहण पर 4 जनवरी तक रोक लगा दी.

गौ मांस खाने की अफवाह पर दादरी में की घटना से शर्मसार हुआ प्रदेश
साल 2015 उत्तर प्रदेश के लिए काफी शर्मसार करने वाला रहा. दादरी में उग्र भीड़ द्वारा अखलाक को गौ मांस खाने और रखने की अफवाह के बाद पीट-पीटकर मार डाला. इस घटना की पूरे विश्व में निंदा हुई. लेकिन इस घटना की सबसे बुरी बात यह रही कि सभी राजनीतिक पार्टियों ने इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश की. हालांकि मुख्यमंत्री अखिलेश तुरंत डैमेज कंट्रोल मोड में आए और अखलाक के परिवार 45 लाख का मुआवजा देने की घोषणा कर दी. एक बात तो सच है राजनीति, मुआवजा और हमदर्दी के बीच एक इंसान की जान सिर्फ एक जानवर के मांस की वजह से चली गई. हालाकि यह मुद्दा बिहार विधानसभा चुनाव में काफी छाया रहा.

अमिताभ ठाकुर और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के बीच तकरार
यूपी के सीनियर आईपीएस अमिताभ ठाकुर और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बीच तनातनी भी इस साल सुर्खियों में रही. मामला तब सामने आया जब अमिताभ ठाकुर ने कथित तौर पर मुलायम सिंह द्वारा उन्हें धमकाए जाने वाला ऑडियो टेप मीडिया में जारी कर दिया. फिर क्या था सपा सरकार ने उन्हें सबक सिखाने की ठान ली और उन्हें अनुशासनहीनता समेत कई अन्य मामलों में आरोपित करते हुए सस्पेंड कर दिया. इस समय अमिताभ ठाकुर मुलायम सिंह यादव के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं.

आईएस सूर्य प्रताप का सरकार के प्रति बागी रूख
1980 बैच के आईएएस डॉ. सूर्य प्रताप सिंह तेज-तर्रार अफसरों में गिने जाते हैं. अपने 34 साल के करियर में एसपी सिंह नौ साल तक विदेश में रहे. इसके बाद वे 2004 में स्टडी लीव पर गए थे. जब वह वापस लौटे तो सरकार ने उन्हें औद्योगिक विकास विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर तैनाती दी. हाल ही में वे माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव बनाए गए थे. इस समय वह प्रमुख सचिव सार्वजनिक उद्यम विभाग में तैनात हैं. डॉ. सूर्य प्रताप सिंह जब माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव थे, तब उन्होंने बोर्ड एग्जाम से पहले नकल माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाई थी. यह विरोध उन्हें बहुत भारी पड़ा और सरकार ने उनका तबादला लघु सिंचाई विभाग में कर दिया था. यहां भी चेकडैम घोटाले के चर्चा में आने के बाद उन्हें सार्वजानिक उद्यम विभाग भेज दिया गया. हालांकि, इसके बाद भी सूर्य प्रताप सिंह लगातार सरकार के खि‍लाफ मोर्चा खोला हुए हैं. वर्तमान में वह प्रदेश में नई राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारी में हैं.

1.72 लाख शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द
यह साल कई महत्वपूर्ण याचिकाओं और कोर्ट के अहम फैसलों के लिए भी जाना जाएगा. इस साल हाई कोर्ट का सबसे बड़ा फैसला था प्रदेश सरकार द्वारा 1.72 लाख शिक्षा मित्रों का सहायक टीचर्स के पद पर समायोजन अवैध करार देते हुए रद्द करना. इस फैसले ने पूरे प्रदेश में कोहराम मचा दिया. कई शिक्षामित्रों ने आत्महत्या कर ली. इसके बाद शुरू हुआ प्रदर्शन जंतर-मंतर तक भी पहुंचा. शिक्षा मित्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग भी की. बहरहाल साल के आखिरी महीने में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मित्रों को थोड़ी राहत देते हुए हाई कोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया है.

कमलेश तिवारी के बायन से कलह
हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी ने दो दिसंबर को पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी. इसको लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है. यूपी से लेकर देश के दूसरे हिस्सो में प्रदर्शनों का दौर जारी है. हालांकि, टि‍प्पणी को लेकर कमलेश ति‍वारी जेल में हैं, लेकि‍न प्रदर्शनकारि‍यों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है. कमलेश तिवारी को फांसी देने की मांग की जा रही है.

यूपी सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खां ने आरएसएस को पर हमला करते हुए कहा, 'आरएसएस में लोग इसलिए शादी नहीं करते क्योंकि वो समलैंगिक होते हैं.' इसके विरोध में कमलेश तिवारी ने मोहम्मद साहब को गे कह डाला. सोशल मीडि‍या पर मोहम्मद हजरत साहब के खिलाफ की गई यह टि‍प्प्णी वायरल हो गई. मुस्लिम संगठनों के धर्मगुरु सड़कों पर उतर आए. आखि‍रकार सरकार को कमलेश ति‍वारी को जेल भेजना पड़ा. रासुका के तहत वह लखनऊ जेल में बंद है.

मैगी छाई रही सुर्खियो में
मैगी के दीवाने इस साल को भूल नहीं पाएंगे. बाराबंकी में एक फूड सिक्युरिटी ऑफिसर ने जांच कराई तो मैगी के टेस्ट मेकर में लेड की मात्रा मानक से अधिक मिली. इसके बाद देश के कई राज्यों में नेस्ले के नूडल्स के नमूने जांच में फेल हो गए. 5 जून को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने मैगी को बैन कर दिया. अगस्त में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मैगी से कुछ शर्तों के साथ पाबंदी हटा दी थी, जिन्हें पूरा करने के बाद 9 नवंबर को मैगी की फिर बाजार में वापसी हुई. मैगी का भारत के करीब 80 फीसदी नूडल बाजार पर कब्जा है. मैगी की विदाई जितनी चर्चा में रही, उतनी ही वापसी के बाद.

काली कमाई के धन कुबेर नोएडा के यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच
सरकार के तमाम कोशिशों के बावजूद काली कमाई के धन कुबेर नोएडा के इंजीनियर-इन-चीफ यादव सिंह को सस्पेंड किया गया. हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश पारित किया. सीबीआई जांच में जो बातें सामने आई उससे जांच एजेंसी के भी होश फाख्ता हो गए. सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक इतना बड़ा घोटाला उनके सामने कभी नहीं आया. हालाकि वंही यादव सिंह को लेकर सरकार उन्हें बचाने की कोशिश में लगी है. जिसको लेकर विपक्षियो ने यूपी सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार उन्हे इसलिए बचा रही है कि इससे कहीं बड़े दिग्गज भी इसके लपेटे में न आ जाए.

साल के अन्त में राम मन्दिर मुद्दा हुआ गरम
साल 2015 खत्म होते राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर गरम हो गया. इसको लेकर तमाम राजनीतिक पार्टिया अपनी अपनी रोटी सेकने में लगी है. अब इसको लेकर राम मंदिर के अगुआ विनय कटियार खुलकर सामने आ गए हैं. उन्होने इसको लेकर तीन तरीके से इस मुद्दो को साल्व करने की बात कह रहे हैं. हम आपको बता दें कि आयोध्या में पत्थरों के खेप लगातार आ रहे हैं. वहीं विनय कटियार ने कहा कि जब राम मंदिर बनेगा तो चोरी छिपे नही बनेगा. बनाते समय ढोल नगाड़े के साथ लाखों लोगों को बुलाकर बताया जाएगा. गौरतलब है कि यूपी विधानसभा चुनाव को केवल एक साल ही बचा जिसको लेकर एक बार फिर राम मंदिर का मुद्दा गर्म हो जाने से 2017 विधानसभा चुनाव काफी रोमांचक होने वाला है.

यूपी के 2017 के चुनावों पर है सबकी नजर

2016 में प्रदेश सरकार और विपक्षी दलों की निगाहें 2017 के चुनावों पर होगी. अभी से ही सभी दल इलेक्शन मोड में आ चुके हैं, जहां एक ओर मुख्यमंत्री एक के बाद एक परियोजनाओं का शिलान्यास कर रहे हैं वहीं विपक्षी पार्टियां सरकार की नाकामी को गिनने में जुटी हुई हैं. बहुजन समाज पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस अभी से ही अपनी जमीन तलाशने में जुट गई हैं. अगर कहा जाए के नया साल चुनावी सरगर्मियों की वजह से ही चर्चा में रहेगा. और यहां पर सभी पार्टियां अपने-अपने दांव में लगी हैं. क्योंकि देश की राजनीति का एजेण्डा यूपी से होकर ही गुजरता है.

मोदी की वो 10 विदेश यात्राएं जो 2015 में रहीं खास

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्राओं को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में पीएम ने कई देशों की यात्रा की। साल 2015 में भी मोदी कई देशों के दौरे पर गए। हम आपको बता रहे हैं मोदी की वो 10 विदेश यात्राएं जो रहीं खास।

25 दिसंबर को अचानक पाकिस्तान जाना मोदी की विदेश यात्राओं में सबसे खास रहा। ये ऐसी यात्रा थी, जिसकी किसी को भी खबर नहीं थी और मोदी के अचानक पाक जाने से पूरी दुनिया चौंक गई, किसी ने इसे मोदी का मास्टर स्ट्रोक कहा तो किसी ने उनकी भूल बताया।
पाकिस्तान से पहले मोदी अफगानिस्तान के दौरे पर गए थे। अफगानिस्तान की जमीन पर पनपने वाले आतंक का साया भी भारत पर रहा है। अफगानिस्तान से रिश्तों की ये शुरूआत आने वाले समय में सुरक्षा की दृष्टि से कितने सकारात्मक परिणाम ला सकती है।
मोदी का रुस दौरा भी बेहद खास रहा, ये देश हमारा पुराना साथी है और हम मुश्किल के वक्त हमारे साथ खड़ा रहा है। न्यूक्लियर ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए मिलकर काम करने और अन्य निवेशों पर इस यात्रा के दौरान दोनों ही देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौते हुए।
1 दिसंबर को मोदी की फ्रांस यात्रा भी बेहद खास रही, पेरिस आतंकी हमले के बाद मोदी की यात्रा बहुत अहम रही। आतंक के मुद्दे पर भारत हमेशा आवाज उठाता रहा लेकिन इसे भारत की समस्या कहकर खारिज कर दिया जाता था।
मोदी का मलेशिया दौरा भी अहम रहा। मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजक से पीएम मोदी ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। दोनों देशों ने डिफेंस और सिक्योरिटी पर कई महत्वपूर्ण समझौते किए।
नवंबर में पीएम मोदी सिंगापुर की यात्रा पर गए, सिंगापुर से स्मार्ट सिटी और नवीन ऊर्जा के क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बातें और समझौते हुए है।
15-16 नवंबर को जी 20 देशों की समिट पीएम मोदी पहुंचे। इस यात्रा के दौरान मोदी का ध्यान निवेश, परस्पर सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई ही रहा। दुनिया के जिन मंचों पर भी बड़े नेता जुटे वहां मोदी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
पीएम मोदी का इंग्लैंड दौरा बेहद खास रहा। 3 दिन की अपने यूके यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने 27 डील की।

सितंबर में मोदी की यूएस यात्रा सबसे यादगार यात्राओं में गिनी जाएगी अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के सायबर हब सेन होजे में गूगल, फेसबुक, टेस्ला जैसी तमाम कंपनियों के सीईओ के साथ मुलाकात की। फेसबुक के तो टाउनहॉल कार्यक्रम का भी मोदी हिस्सा बने।

पाकिस्तान के करीबी माने जाने वाले यूएई की यात्रा भी मोदी के लिए खास रही। शेख जायद मस्जिद में जाकर भी उन्होंने इस्लाम के प्रति सम्मान का संदेश दिया। व्यवसायिक दृष्टिकोण से भी ये यात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी गई।


Sunday, 27 December 2015

बीएस बस्सी ने आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं को कानून बनाए रखने की अपील

राजधानी दिल्ली में आगामी एक जनवरी से 15 जनवरी तक लागू होने जा रहे सम-विषम फॉर्मूले को लेकर दिल्ली पुलिस आयुक्त की है।

पुलिस आयुक्त बस्सी ने सोमवार को ट्वीट करके कहा कि दिल्ली सरकार को सम-विषम फॉर्मूला लागू करने में दिल्ली पुलिस सहयोग करेगी। वह आप कार्यकर्ताओं से अपील करते हैं कि वह केवल दिल्ली पुलिस का सहयोग करें और जैसा कहा जाए, वैसा ही करें। कानून का शासन और जरूरत से ज्यादा सतकर्ता बरतना, परस्पर विरोधी है।

पुलिस प्रमुख ने ट्विटर पर ‘आप’ कार्यकर्ताओं से कहा कि फॉर्मूले को लेकर वह दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट करें। उसके बाद उन्हें अवगत कराया जाएगा और कार्ययोजना के मुताबिक तैनात किया जाएगा। इस दौरान सड़क उपयोगकर्ताओं की किसी तरह से कोई अनुचित उत्पीड़न सही नहीं है।

पुलिस प्रमुख बस्सी के अनुसार दिल्ली पुलिस की यातायात यूनिट अपने चार उद्देश्यों अर्थात् शिक्षा, विनियमन, प्रवर्तन और रोड इंजीनियरिंग के जरिए सम-विषम फॉर्मूले को लागू करनी कोशिश करेगी।

जानकारी हो कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने वायु प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आगामी एक जनवरी से निजी कारों के परिचालन पर सम-विषम फार्मूले को लागू करने की योजना बनाई है, जोकि शुरू होने से पहले ही विवादों में घिरी हुई है।

सोनिया गांधी के बहकावे में नहीं आए थे,कीर्ति आजाद

डीडीसीए मामले में बीजेपी से निलंबित चल रहे कीर्ति आजाद ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए फिर से क्रिकेट एसोसिएशन पर हमला बोला. उन्होंने डीडीसीए के आरोपों पर सफाई दी और अपने तथ्य पेश किए.

वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले कीर्ति आजाद ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने कहा, 'मैं अरुण जेटली को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं देता हूं.'

कीर्ति ने कहा, सोनिया के भड़कावे में नहीं आया
कीर्ति आजाद ने कहा कि वो संसद में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बहकावे में नहीं आए थे बल्कि स्पीकर ने उन्हें अपनी बात रखने के लिए कहा था. उन्होंने कहा, 'मुझ पर ये हमला हुआ है कि मैं सोनिया गांधी के बहकावे में आ गया. मुझ पर हमला करो लेकिन स्पीकर के ऑफिस को निशाना मत बनाओ. मैं लोकसभा कार्यवाही के सेक्शन 360 की तरफ ध्यान खींचना चाहूंगा, जब एक व्यक्ति कुछ बोलना चाहता है तो स्पीकर उसे बुलाती है लेकिन अगर एक ही समय पर एक से ज्यादा लोग बोलना चाहते हैं तो स्पीकर जिसे भी बुलाती है, वो बात करता है. इसलिए अगर ये आरोप लगाया जा रहा है कि मैं सोनिया के कहने पर बोल रहा था तो ये हास्यास्पद है. लोग वॉकआउट इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें स्पीकर की तरफ से बोलने का मौका नहीं मिलता.'

डीडीसीए में किसी तरह के एग्जिक्यूटिव प्रेजिडेंट की बात नहीं कही गई है क्योंकि वहां कोई एग्जिक्यूटिव प्रेजिडेंट हो ही नहीं सकता. अगर एग्जिक्यूटिव प्रेजिडेंट होता भी है तो न ही वो बैलेंस शीट पर साइन कर सकता है और न ही सालाना जनरल मीटिंग ले सकता है. सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफ(एसएफआईओ) ने कुछ दस्तावेज मांगे थे और कई दस्तावेज नहीं दिए गए हैं. अगर सीरियस फ्रॉड का मामला नहीं होता, तो तीस हजारी कोर्ट में केस क्यों फाइल किया गया. कंपनियों को दो-तीन बार भुगतान क्यों किया गया? वीके अग्रवाल कौन हैं और उन्हें 9 करोड़ रुपये क्यों दिए गए?

सीबीआई से मिलने की मांग
कीर्ति ने जांच एजेंसी सीबीआई से कहा है कि वो उनसे आकर मिलें. उन्होंने कहा, 'मैं सीबीआई से कहूंगा कि वो मुझसे आकर मिले. उन्होंने रेड से पहले डीडीसीए को चार नोटिस भेजे थे.'

तथ्यों पर खींचा ध्यान
हमारे पास सबूत हैं कि एके चौरसिया, उनकी बहन और ससुराल वालों को उस काम के लिए 11 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जो या तो पहले ही हो चुका था या अभी तक नहीं हुआ.

यूएनएससी की सदस्यता पाने के लिए मोदी कर रहे अच्छा बर्ताव,अफजल खान

यूरोपीय संसद के सदस्य अफजल खान ने कहा है कि पाकिस्तान के प्रति भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अच्छा बर्ताव देश को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की स्थायी सदस्यता दिलाने के उनके प्रयासों का एक हिस्सा है।
समाचारपत्र ‘डॉन’ की वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ (ईयू) की सुरक्षा एवं रक्षा समिति के उपाध्यक्ष अफजल ने रविवार को कहा कि भारत जब तक मानवाधिकार व कश्मीर जैसे मुद्दों का हल सुनिश्चित नहीं कर लेता, तब तक ऐसे प्रयासों का फायदा नहीं उठा सकता।
उन्होंने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय समुदाय आधारभूत मानवाधिकारों को लेकर काफी फिक्रमंद है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक ऐसा देश यूएनसीएस का स्थायी सदस्य कैसे बन सकता है, जिसने कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू न किया हो। भारत अगर सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का दावा बरकरार रखना चाहता है, तो उसे यूएन प्रस्ताव का सम्मान करना होगा।”
अफजल ने कहा कि यूरोपीय संघ ने मानवाधिकारों को व्यापार से जोड़ा है, इसलिए यह कभी भारत को मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं करने देगा।

मोदी के नवरत्न जो 2015 में अहम परियोजनाओं में दिया अपना यागदान

साल 2015 जाने को है और 2016 आने ही वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस साल कुछ खास सपने रहे हैं जिन्हें उनके मंत्रिमंडल के खास 9 मंत्रियों पर उनकी इस परियोजनाओं को परवान चढ़ाने की जिम्मेदारी है। मोदी के इन 9 मंत्रियों यानि नवरत्नों पर डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत, स्किल इंडिया जैसे मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी है।
जब हमने ये जानने की कोशिश की कि इस साल पीएम के नवरत्नों ने क्या हासिल किया, 2016 के लिए उनका क्या लक्ष्य है? पीएम मोदी इन नवरत्मों में हम नितिन गडकरी (केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री), रविशंकर प्रसाद ( केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री), महेश शर्मा (केंद्रीय पर्यटन मंत्री, संस्कृति मंत्री और उड्डयन राज्यमंत्री), राजीव प्रताप रूडी केंद्रीय कौशल विकास मंत्री), धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री), प्रकाश जावड़ेकर (केंद्रीय पर्यावरण मंत्री), डॉक्टर हर्षवर्धन (केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री), राधा मोहन सिंह (केंद्रीय कृषि मंत्री) और चौधरी बीरेंद्र सिंह (केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायती राज मंत्री, स्वच्छता और पेयजल मंत्री) की बात करेंगे।
ये हैं पीएम मोदी के साल 2015 जाने को है और 2016 आने ही वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस साल कुछ खास सपने रहे हैं जिन्हें उनके मंत्रिमंडल के खास 9 मंत्रियों पर उनकी इस परियोजनाओं को परवान चढ़ाने की जिम्मेदारी है।
1. नितिन गडकरी (केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री)
देश की सड़कों पर होने वाले हादसे केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। कुर्सी संभालने के बाद नितिन गडकरी ने हर रोज 400 से ज्यादा लोगों की जान लेने वाली देश की सड़कों को दुरुस्त करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। ये सड़क हादसे देश की अर्थव्यवस्था को भी जबरदस्त नुकसान पहुंचाते हैं।
गडकरी का मकसद है कि ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक बनाकर देश में सड़क हादसों को कम से कम किया जाए। नितिन गडकरी के मुताबिक 3 लाख से ज्यादा प्रोजेक्ट अटके हुए थे। इनमें से 95 फीसदी क्लीयर कर दिए हैं। साल अंत तक 100 फीसदी अटके हुए प्रोजेक्ट क्लीयर हो जाएंगे। जीडीपी में 2 फीसदी का सहयोग दो साल में करेंगे।
सड़क सुरक्षा को लेकर गडकरी रोड ट्रांसपोर्ट और सेफ्टी बिल पर जोर दे रहे हैं। इस बिल में दुनिया भर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम से अच्छी बातें शामिल की गई हैं। नए साल पर नितिन गडकरी का लक्ष्य है भारत के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पर्यावरण के मुताबिक बनाएं। और वह मेट्रो सिटी में ट्रैफिक जाम से मुक्ति, पर्यावरण के लिए अच्छा काम और इलेक्ट्रिक बस कार को बढ़ावा दे रहे हैं।
नितिन गडकरी चाहते हैं कि देश में हाई निर्माण अगले दो साल में 30 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से होने लगे। यूपीए शासन में ये रफ्तार सिर्फ तीन किलोमीटर प्रति दिन थी। पिछले डेढ़ साल में इसे 13 किलोमीटर प्रति दिन तक ले आया गया है। मंत्रालय में जो बड़े फैसले लिए गए हैं। अगर उनकी बात करें तो--
जिन सड़कों की कीमत वसूली जा चुकी है वहां पर टोल टैक्स खत्म किया जा रहा है। अब तक केंद्र सरकार 62 टोल प्लाजा खत्म कर चुकी है। जिन टोल प्लाजा पर ज्यादा जाम लगता है, उन्हें भी हटाया जा रहा है।
नेशनल हाईवे टोल इन्फॉर्मेशन सिस्टम बनाया गया है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक टोल कनेक्शन सिस्टम भी बनाया जा रहा है। हर टोल प्लाजा पर इंटरनेट से जुड़े CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं।
नितिन गडकरी के मुताबिक देश में NH 96 हजार किलोमीटर थे। इसे बढ़ाकर 1.5 लाख कर रहे हैं। सड़क हादसे कम करेंगे। रोड सेफ्टी, ड्राइविंग लाइसेंस आदि को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सरकार रिवर ट्रांसपोर्ट पर भी खासा ध्यान दे रही है। मकसद ये कि नदी के रास्ते कारोबारी अपना सामान बांग्लादेश तक ले जा सकें। इसके लिए तीन रूट डवलप किए जा रहे हैं। जनवरी में टेंडर निकाल रहे हैं। वॉटर पोर्ट बनाएंगे।
लक्ष्य मुश्किल भले हो लेकिन नामुमकिन नहीं। ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर रजिस्ट्रेशन तक में गडकरी एक क्रांति लाना चाहते हैं। देशभर में हादसों की जानकारी देने के लिए टोलफ्री नंबर 1033 की शुरुआत की जा रही है। अब देखना ये है कि साल 2016 में उनके किए कितने वायदे पूरे होते हैं।
2. रविशंकर प्रसाद (केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री)
पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट डिजिटल इंडिया की कमान रविशंकर प्रसाद के ही हाथों में है। टेलीकॉम मंत्री बने 19 महीने बीत रहे हैं। आईबीएन 7 ने रविशंकर प्रसाद ने उनकी रिपोर्ट कार्ड मांगी। उन बड़े कामों के बारे में पूछा जो उन्होंने साल 2015 में निपटाए हैं।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक संचार भवन की छवि बदली, मंत्रालय से बिचौलियों को दूर किया। स्पैक्ट्रम आवंटन से 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपए मिले। बीएसएनएल पहले 8 हजार करोड़ के नुकसान में था। अब 672 करोड़ के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में है।
साल 2015 में रविशंकर प्रसाद का मंत्रालय सबसे ज्यादा चर्चा में रहा कॉल ड्रॉप को लेकर। कॉल ड्रॉप से परेशान लोगों को राहत देने के लिए बाकायदा आंदोलन चले। रविशंकर प्रसाद का दावा है कि उनके मंत्रालय की सख्ती से अब कॉल ड्रॉप में काफी कमी आई है। रविशंकर प्रसाद ने बताया कि कॉलड्रॉप की समस्या पर हमने सख्ती दिखाई। हर कंपनी को सख्त निर्देश दिए गए हैं। और इस मामले में वोडाफोन ने माफी मांगी।
देश में इस वक्त 98 करोड़ मोबाइल धारक हैं। जाहिर है कॉल ड्रॉप पर सरकार की सख्ती का सीधा फायदा 98 करोड़ लोगों तक पहुंचा है। 2016 में रविशंकर प्रसाद के बड़े लक्ष्यों में से हैं।
2016 का लक्ष्य
ढाई लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ना। बीएसएनएल के बाद अब एमटीएनएल को घाटे से उबारना। देश के सभी डाकघरों को डिजिटल क्रांति से जोड़ना।
रविशंकर प्रसाद के मुताबिक सभी पोस्ट ऑफिस को हैंड हेल्ड डिवाइस से जोड़ रहे हैं। कॉल सेंटर बना रहे हैं। गावों को तकनीकि से जोड़ने के दिशा में प्रयास जारी हैं। मेक इन इंडिया पर भी रविशंकर प्रसाद का खासा जोर है। उनके मुताबिक टेलीकॉम क्षेत्र में बीते साल 1 लाख 16 हजार करोड़ का विदेशी निवेश हुआ है। ये निवेश देश में डिजिटल क्रांति को और आगे बढ़ाएगा और साथ ही उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने में भी मदद करेगा।
रविशंकर प्रसाद ने बताया कि हमने इस साल बहुत काम किया है। 2016 में इस काम को और आगे बढ़ाएंगे। 2016 से रविशंकर प्रसाद को बहुत उम्मीदें हैं और देश के लोगों को रविशंकर प्रसाद से। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नवरत्नों में से एक रविशंकर प्रसाद, 2016 में कितने अपने लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं। इसका देशभर को इंतजार है।
3. महेश शर्मा (केंंद्रीय पर्यटन मंत्री, संस्कृति मंत्री और उड्डयन राज्यमंत्री)
महेश शर्मा दो मंत्रालयों के कैबिनेट और एक मंत्रालय के राज्यमंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नवरत्नों में से एक महेश शर्मा के लिए 2015 का साल विवादों से भरा रहा। कभी दादरी कांड, कभी स्कूलों में गीता पढ़ाने पर, कभी लड़कियों के बाहर जाने पर बयान देकर सुर्खियों में रहे।
महेश शर्मा के मुताबिक पर्यटन में काफी सफल हुए हैं। पहले पर्यटन की दृष्टि से 65 नंबर पर था अब 52 नंबर पर है। 25 मॉन्यूमेंट पर सुरक्षा दे रहे हैं। 115 मॉन्यूमेंट पर ई टिकटिंग दे रहे हैं।
आंकड़े भी महेश शर्मा का साथ दे रहे हैं। उनके मंत्रालय का कमाल है कि नवंबर के महीने में ई टूरिस्ट वीजा लेकर भारत आने वाले पर्यटकों में 2700 फीसदी का इजाफा हुआ है। जी हां, जहां 2014 में इसी महीने करीब 3 हजार टूरिस्ट आए। वहीं इस साल नवंबर में 83 हजार से ज्यादा विदेशी टूरिस्ट ई-वीजा लेकर आए। अब सरकार दुनिया के 113 देशों के नागरिकों को देश के 16 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ई टूरिस्ट वीजा दे रही है। यही नहीं, इन टूरिस्टों के लिए नई हेल्पलाइन नंबर भी शुरू की जा रही है। महेश शर्मा ने बताया कि 1363 हेल्पलाइन नंबर शुरू कर रहे हैं, जोकि 12 भाषाओं में उपलब्ध होगी। जिससे विदेशी लोगों को मदद मिलेगी।
संस्कृति मंत्री के तौर पर भी महेश शर्मा देश के 34 अहम संस्थानों को एकजुट कर रहे हैं। मकसद ये कि भारत की धनी संस्कृति को पूरी दुनिया में बढ़ावा दिया जाए। वहीं नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री के तौर पर महेश शर्मा के मंत्रालय की एक और कामयाबी सुर्खियों में है। इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया के विलय के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब एयर इंडिया मुनाफे में आई है। इस कमाल में एयर इंडिया के बेड़े में आए 21 ड्रीमलाइनरों का भी बड़ा योगदान है।
केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने बताया कि एयर इंडिया ऑपरेटिंग प्रॉफिट में है। डीजीसीए को ई डीजीसीए करने जा रहे हैं। माहौल को ट्रांसपेरेंसी, ईमानदारी, भ्रष्टाचार मुक्त बना रहे हैं।
लेकिन उड्डयन मंत्रालय में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। वक्त की पाबंदी रखते हुए मुनाफे को और बढ़ाना है। ऐसे में जब  महेश शर्मा से पूछा 2016 में उनके लक्ष्य क्या हैं। तो उन्होंने बताया कि विदेशी मुद्रा डेढ़ गुना करेंगे, आध्यात्मिक टूरिज्म को बढ़ावा देंगे।
महेश शर्मा लोगों से सीधे जुड़ने वाले तीन अहम मंत्रालयों के मंत्री हैं। इसलिए उनका एक एक फैसला लोगों पर सीधे असर करता है। 2016 में महेश शर्मा अगर अपने लक्ष्य को हासिल करते हैं तो ये विदेश में भारत की साख भी बढ़ाएगा।
4. राजीव प्रताप रूडी (केंद्रीय कौशल विकास मंत्री)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे अहम प्रोजेक्ट कौशल विकास की जिम्मेदारी राजीव प्रताप रूडी पर ही है। जिस देश की 54 फीसदी आबादी 25 साल से कम उम्र की हो, जिस देश की 62 फीसदी आबादी 15 से 60 साल के बीच की हो वहां अगर सिर्फ तीन फीसदी लोगों ने स्किल ट्रेनिंग ली हो तो चिंता की बात होगी ही। ये आंकड़े इसलिए भी परेशान करने वाले हैं क्योंकि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में 80 फीसदी से ज्यादा लोगों स्किल ट्रेंड हैं।
राजीव प्रताप रूडी के मुताबिक हमारा सबसे बड़ा अचीवमेंट है केंद्र और राज्य में मानक स्थापित किया। पूरा इकोसिस्टम बना रहे हैं। सिलेबस का काम तैयार है। ब्यूटी कोर्ट, हेल्थ कुल 1600 कोर्स की हमने पहचान की है।
कौशल विकास मंत्रालय देश के सबसे नौजवान मंत्रालयों में से भी एक है। सरकार के ज्यादातर मंत्रालय 50 से 60 साल तक पुराने हैं। ऐसे में राजीव प्रताप रूडी के सामने चुनौती थी। शून्य से इस मंत्रालय को खड़ा करने की। रूडी की मानें तो उनके मंत्रालय का सबसे ज्यादा ध्यान देश के असंगठित क्षेत्र पर है।
राजीव प्रताप रूडी ने बताया कि हमारे पास आंकड़े हैं। 50 करोड़ लोग जो खेती में हैं। असंगठित क्षेत्र में हैं। उनका कौशल विकास करना है। अगर 10 साल की स्कूली शिक्षा के साथ 10 हफ्ते के कोर्स को जोड़ दें तो रोजगार मिलने में आसानी होगी। हमें कम आमदनी के लोगों को कौशल प्रशिक्षित करना है।
भारत के युवाओं का बड़ा वर्ग 2040 के बाद स्किल डवलपमेंट की उम्र को पार कर जाएगा। ऐसे में इस नए बने मंत्रालय के पास इतने बड़े काम को पूरा करने के लिए वक्त भी बहुत कम है। इसलिए अब 2016 में राजीव प्रताप रूडी का मंत्रालय अपनी योजना में देश के हर सांसद को जोड़ने जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि देश के हर सांसद के क्षेत्र में स्किल ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। सासंद की देखरेख में स्किल सेंटर चलेंगे।
कौशल विकास मंत्रालय जल्द ही देश में कई कौशल यूनिवर्सिटी भी खोलने जा रहा है। मंत्रालय राज्यों के साथ भी तालमेल बिठा रहा है। मकसद ये कि देश के उस तबके को रोजगार मिले, जो हमेशा से वंचित रहा है।
5. धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री)
इस साल जनवरी में पूरे देश में लागू की गई डायरेक्टर कैश सब्सिडी योजना की बड़ी कामयाबी का श्रेय धर्मेंद्र प्रधान को ही जाता है। इस योजना ने एलपीजी वितरण में होने वाली धांधली को काफी हद तक खत्म कर दिया। जो लोग गैस सब्सिडी लेना चाहते हैं उनके बैंक अकाउंट में सीधे रकम ट्रांसफर हो रही है।
धर्मेंद्र प्रधान सबसे बड़ी जन वितरण प्रणाली को 14 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचा पाए। इसे गिनीज बुक ने स्वीकृत किया। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमत में आई गिरावट के बाद घरेलू बाजार में भी पेट्रोल-डीजल की कीमत कम करने की मांग उठी है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में 20 बार पेट्रोल और 16 बार डीजल की कीमत कम की गई है, लेकिन राज्यों के टैक्स की वजह से इसका फायदा जनता को नहीं मिला। धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक वो राजस्व बढ़ाने के साथ ही उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। अपने मंत्रालय की पहल योजना की कामयाबी से भी धर्मेंद्र खासे उत्साहित हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि 9 महीने में 55 लाख लोगों ने सब्सिडी छोड़ी। 46 लाख लोगों के घर तक बीपीएल कैटेगरी के कनेक्शन दिए। दिल्ली में प्रदूषण को लेकर मचे हाहाकार के बीच धर्मेंद्र प्रधान पेट्रोल-डीजल से होने वाले नुकसान को लेकर भी गंभीर हैं। उनका दावा है कि अप्रैल 2016 तक देशभर में BS 4 मानक लागू हो जाएगा। धर्मेंद्र प्रधान की कोशिश है कि वो देश में 2020 तक BS 6 मानक लागू कर पाएं।
उन्होंने आगे बताया कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने की कोशिश की। हम दिल्ली में हर गाड़ी में सीएनजी सप्लाई कर सकते हैं। पेट्रोलियम मंत्री का मकसद अब देश को ईंधन सुरक्षा देने का है। एक ऐसी सुरक्षा जिसमें देश के हर शख्स को सेहत भी मिले और सुरक्षित ईंधन भी।
धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक साल 2016-17 तक 27 करोड़ घरों में से 11-12 करोड़ लोगों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाना है। देश में अब भी जलावन के तौर पर लकड़ी का बहुत इस्तेमाल होता है। इसकी वजह से हर साल 5 लाख से ज्यादा महिलाओं की मौत होती है। उनकी कोशिश है कि आने वाले साल में वो इन आंकड़ों को कम कर पाएं।
6. प्रकाश जावड़ेकर ( केंद्रीय पर्यावरण मंत्री)
पर्यावरण और प्रदूषण को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच देश की हवा में फैलते जहर को कम करने की महती जिम्मेदारी है प्रकाश जावड़ेकर पर। हाल ही में पेरिस में हुई क्लाइमेट समिट में भारत का दबदबा सभी ने देखा। IBN7 से बातचीत में प्रकाश जावड़ेकर ने 2015 के बड़े कामों में पेरिस सम्मेलन का जिक्र किया।
प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक पेरिस सम्मेलन में भारत की चिंता से ही समाधान निकला है। भारत के हित में फैसला हुआ है। उनका दावा है कि सरकार की कोशिशों के बाद अब देश में जंगलों का दायरा घटने के बजाय बढ़ना शुरू हो गया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 5 हजार स्कवायक किलोमीटर जंगल में इजाफा हुआ है। अब सरकार सैटेलाइट के जरिए जंगलों पर नजर रख रही है।
जावड़ेकर के मुताबिक सरकार औद्योगिक प्रदूषण से भी बहुत सख्ती से निपट रही है। 17 औद्योगिक सेक्टरों की पहचान की है, 2400 इंडस्ट्री हैं और 1800 की मॉनिटरिंग की जा रही है।
प्रकाश जावड़ेकर ने अपने मोबाइल पर लगातार आने वाले मैसेज भी हमें दिखाए। अब हर 15 मिनट पर सरकार को ये जानकारी दी जाती है कि कौन से उद्योग ने नियमों को तोड़ा। हाल के दिनों में सरकार ने प्रदूषण से निपटने के मानकों को भी बदला है। हाल ही में अलग-अलग शहरों में प्रदूषण का स्तर बताने वाली वेबसाइटों को भी लॉन्च किया गया है।
जावड़ेकर के मुताबिक इससे लोगों में भी जागरूकता आ रही है। खासतौर पर देश की राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार 2016 में तीन बड़े फैसले लेने जा रही है।
उनके मुताबिक दिल्ली के लिए 3 फैसले हैं-- 1. दिल्ली में ईंधन का प्रकार बदला है। 2. वाहनों की तादाद कम कर रहे है। 3. बाईपास का निर्माण होगा। तो वहीं केंद्र सरकार ने हर साल पंजाब और हरियाणा में जलाए जाने वाले खेतों पर भी अपना रुख कड़ा किया है। इसी का नतीजा है कि इस साल खेत जलाने से होने वाले प्रदूषण में 30 फीसदी की कमी आई है। प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक पर्यावरण में सुधार के लिए राज्यों को भी हर मुमकिन मदद की जा रही है।
7. डॉक्टर हर्षवर्धन (केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री)
पेशे से चिकित्सक, लेकिन जिम्मेदारी देश में विज्ञान की सेहत सुधारने की। IBN7 ने डॉक्टर हर्षवर्धन से 2015 में उनके बड़े कामों के बारे में पूछा। डॉक्टर हर्षवर्धन की मानें तो देश में रिसर्च तो पहले भी होती थी, लेकिन अब देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रिसर्च की दिशा तय की जा रही है।
दिसंबर के महीने में ही उनके मंत्रालय की कमान में आईआईटी दिल्ली में हुए इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में दो हजार छात्रों ने प्रैक्टिकल साइंस लेशन का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। कोशिश ये कि छात्रों में विज्ञान के लिए रुझान बढ़ाया जाए। इसके लिए सरकार ने शिक्षक सेतु नाम से भी योजना शुरू की है। डॉक्टर हर्षवर्धन के मुताबिक साल 2015 में नैनो तकनीक पर रिसर्च में देश अब तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। वैज्ञानिक रिसर्च पेपर छपने के मामले में अब भारत छठे नंबर पर पहुंच गया है।
इसके अलावा आधुनिक उपकरणों की मदद से उनके विभागों ने मौसम से जुड़ी 100 फीसदी सटीक भविष्यवाणियां की हैं। सटीक अनुमान देश की अर्थव्यवस्था में भी मदद कर रहे हैं। डॉक्टर हर्षवर्धन के मुताबिक किसानों की मदद कर रहे हैं। मछुवारों की मदद कर रहे हैं। एक लाख करोड़ रुपए का असर पड़ेगा जीडीपी में।
देश भर के डाटा की पड़ताल के लिए शुरू किया गया सुपर कंप्यूटिंग मिशन अब लगभग पूरा होने को है। स्टेम सेल रिसर्च, मलेरिया-डेंगू वैक्सीन, क्लीन कोल टेक्नॉलोजी पर उनका मंत्रालय तेजी से काम कर रहा है। यही नहीं स्पेस टेक्नोलॉजी में भी भारत की धमक बढ़ी है।
उनके मुताबिक पिछले एक साल में बहुत सी चीजों को नई दिशा दी। 30 मीटर टेलीस्कोप में हार्डवेयर का बड़ा हिस्सा भारत का रहा है। विज्ञान और रिसर्च की प्रक्रिया लगातार होती है इसलिए इसे समय सीमा में नहीं बांधा जा सकता। हां, वैज्ञानिकों को नई तकनीक की खोज के लिए नई ऊर्जा मिलती रहे। पूरे संसाधन मिलते रहे। माहौल मिलता रहे और पैसे की कमी ना हो, वो इस पर 2016 में और ज्यादा जोर देंगे।
8. राधा मोहन सिंह ( केंद्रीय कृषि मंत्री)
जिस देश की आधी से ज्यादा आबादी खेती से जुड़ी हो, जो दुनिया का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा कृषि उत्पादक हो, उस देश में कृषि मंत्री के लिए चुनौतियां भी कम नहीं। कृषि विकास दर गिरते हुए एक से 2 फीसदी के बीच अटकी हुई है। उनके मुताबिक सबसे बड़ी उपलब्धि है कि हर खेत में पानी पहुंचाने का काम तेज हुआ है। मार्च तक 100 जिलों का प्लान है।
बीते एक साल में किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिए जाने की मुहिम भी तेज हुई है। राधा मोहन सिंह के मुताबिक इसके लिए राज्यों की भी पूरी मदद की गई है। और अप्रैल 2016 तक देश में 5 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड।
आने वाले महीनों में कृषि मंत्रालय की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट। सरकार का लक्ष्य है सितंबर 2016 तक देश की 250 बड़ी मंडियों को एक साथ जोड़ दिया जाए। ये 250 मंडियां जुड़ जाएंगी तो किसान किसी भी मंडी में अपना अनाज बेच सकेगा और उसका मुनाफा भी बढ़ेगा।
कृषि मंत्री का लक्ष्य देश भर में फैले 643 कृषि विज्ञान केंद्रों को और आधुनिक बनाना है। कृषि विज्ञान केंद्रों में वैज्ञानिकों की तादाद बढ़ाई जा रही है। खेती से जुड़ी जानकारियों को किसानों तक आसानी से पहुंचाने की भी कोशिश है।
9. चौधरी बीरेंद्र सिंह (केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायती राज मंत्री, स्वच्छता और पेयजल मंत्री)
कुल मुलाकर चौधरी बीरेंद्र सिंह केंद्र सरकार के कई भारी भरकम मंत्रालयों की कमान संभाल रहे हैं। IBN7 ने चौधरी बीरेंद्र सिंह से उनके साल भर के कामकाज का ब्यौरा मांगा। बीरेंद्र सिंह का दावा है कि उनके मंत्री बनने के बाद उनके मंत्रालयों की जो योजनाएं चल रही थीं। अब उन्होंने तेजी पकड़ी है। अब राज्यों को अपनी योजनाएं पूरी करने के लिए पैसा का इंतजार नहीं करना पड़ता।
चौधरी बीरेंद्र सिंह के मुताबिक पीएम ग्रामीण सड़क योजना के तहत पहले 63 किमी रोज बनती थी। अब 100 किमी रोज बनती है। एक साल में 3000 किमी सड़क बनाई है।
2016 के लिए भी बीरेंद्र सिंह के मंत्रालयों के पास बड़ी-बड़ी योजनाए हैं। मकसद ये कि गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार मिले। गांव का मूलभूत ढांचा बनाएंगे, 24 घंटे बिजली देंगे। पानी हो, सड़क से जुड़े होंगे गांव, एटीएम हो, स्कूल हो आदि कार्य उनकी प्रमुखता में होंगे।
उनका जोर देश के हर गांव में लोगों को पक्की छत देने का है। इंदिरा आवास योजना के तहत जहां पहले 70 हजार रुपए की मदद की जाती थी। अब इस मदद को दोगुने से भी ज्यादा कर दिया गया है। पहले 20 वर्ग मीटर का घर था। अब 25 वर्ग मीटर का घर है। हम घर देने की कोशिश कर रहे हैं।

बीरेंद्र सिंह की मानें तो गांवों में बनने वाले ये घर कम से कम 40 साल तक चलेंगे, जबकि पहले जो घर बनाए जाते थे उनकी उम्र इतनी नहीं होती थी। बीरेंद्र सिंह का दावा है कि उनके एजेंडे में ग्रामीण विकास को लेकर कई योजनाएं है। अब 2016 बताएगा कि ये योजनाएं जमीन पर कितना उतर पाती हैं और कितना असर दिखा पाती हैं।