Tuesday, 17 November 2015

कहा से आया ISIS ?

पूरी दुनिया में इस वक्त एक ही नाम ISIS की चर्चा है। आखिर ये IS या ISI या फिर ISIS है क्या? कहां से आया, क्यों आया, किसकी वजह से आया और इसे कौन लाया? ISIS के जन्म से लेकर इसे जन्म देने वाले और फिर उसे पालने-पोसने वाले तमाम लोगों के बारे में जानें।
2006 से बगदादी ने की शुरूआत
एक लंबी लड़ाई के बाद अमेरिका इराक को सद्दाम हुसैन के चंगुल से आजाद करा चुका था। पर इस आजादी को हासिल करने के दौरान इराक पूरी तरह बर्बाद हो चुका था। अमेरिकी सेना के इराक छोड़ते ही बहुत से छोटे-मोटे गुट अपनी ताकत की लड़ाई शुरू करने लगे। उन्हीं में से एक गुट का नेता था अबू बकर अल बगदादी । अल-कायदा इराक का चीफ। वो 2006 से ही इराक में अपनी जमीन तैयार करने में लगा था। मगर तब ना उसके पास पैसे थे, ना कोई मदद और ना ही लड़ाके।
अल-कायदा इराक बना ISI
दरअसल अमेरिकी सेना 2011 में जब इराक से लौटी, तब तक वो इराकी सरकार को बर्बाद कर चुकी थी। सद्दाम मारा जा चुका था। इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से तबाह हो चुके थे और सबसे बड़ी बात ये कि वो इराक में खाली सत्ता छोड़ गए थे। संसाधनों की कमी के चलते तब बगदादी ज्यादा कामयाब नहीं हो पा रहा था। हालांकि इराक पर कब्जे के लिए तब तक उसने अल-कायदा इराक का नाम बदल कर नया नाम आईएसआई यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक रख लिया था।

इराक से मायूस बगदादी पहुंचा सीरिया
बगदादी ने सद्दाम हुसैन की सेना के कमांडर और सिपाहियों को अपने साथ मिला लिया। इसके बाद उसने शुरुआती निशाना पुलिस, सेना के दफ्तर, चेकप्वाइंट्स और रिक्रूटिंग स्टेशंस को बनाना शुरू किया। अब तक बगदादी के साथ कई हजार लोग शामिल हो चुके थे, पर फिर भी बगदादी को इराक में वो कामयाबी नहीं मिल रही थी। इराक से मायूस होकर बगदादी ने सीरिया का रुख करने का फैसला किया। सीरिया तब गृह युद्ध झेल रहा था। अल-कायदा और फ्री सीरियन आर्मी वहां के दो सबसे बड़े गुट थे, जो सीरियाई राष्ट्रपति से मोर्चा ले रहे थे।
चार साल तक सीरिया में नहीं मिली कामयाबी
पहले चार साल तक सीरिया में भी बगदादी को कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली। अलबत्ता इस दौरान उसने एक बार फिर से अपने संगठन का नाम बदल कर अब आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) कर दिया था। जून 2013 को फ्री सीरियन आर्मी के जनरल ने पहली बार सामने आकर दुनिया से अपील की थी कि अगर उन्हें हथियार नहीं मिले तो वो बागियों से अपनी जंग एक महीने के अंदर हार जाएंगे।
पलट गए आईएसआईएस के दिन
इस अपील के हफ्ते भर के अंदर ही अमेरिका, इजराइल, जॉर्डन, टर्की, सऊदी अरब और कतर ने फ्री सीरियन आर्मी को हथियार, पैसे, और ट्रेनिंग की मदद देनी शुरू कर दी। इन देशों ने बाकायदा सारे आधुनिक हथियार, एंटी टैंक मिसाइल, गोला-बारूद सब कुछ सीरिया पहुंचा दिया और बस यहीं से आईएसआईएस के दिन पलट गए। दरअसल जो हथियाऱ फ्री सीरियन आर्मी के लिए थे, वो साल भर के अंदर आईएसआईएस तक जा पहुंचे क्योंकि तब तक आईएस फ्री सीरियन आर्मी में सेंध लगा चुका था और उसके बहुत से लोग उसके साथ हो लिए थे। साथ ही सीरिया में फ्रीडम फाइटर का नकाब पहन कर भी आईएस ने दुनिया को धोखा दिया। इसी नकाब की आड़ में खुद अमेरिका तक ने अनजाने में आईएस के आतंकवादियों को ट्रेनिंग दे डाली।
जाने-अनजाने अमेरिका का ही हाथ
आईएसआईएस के जन्म के पीछे जाने-अनजाने अमेरिका का ही हाथ रहा। ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका की मदद की वजह से ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा का जन्म हुआ। ठीक वैसे ही जैसे 1980 में ईरान के खिलाफ इस्तेमाल के लिए कैमिकल हथियार देकर अमेरिका ने सद्दाम को सद्दान हुसैन बनाया। ठीक वैसे ही सीरिया के फ्रीडम फाइटर को अमेरिका ने हथियार और ट्रेनिंग दी और अब वही फ्रीडम फाइटर आईएसआईएस के बैनर तले लड़ रहे हैं।
2013 में स्नोडेन का बड़ा खुलासा
जुलाई 2014 में ईरान के अखबार तेहरान टाइम्स को दिया गया एडवर्ड स्नोडेन का इंटरव्यू आईएस को बढ़ाने में अमेरिकी मदद की एक और थ्योरी का खुलासा करता है। एडवर्ड स्नोडेन वही शख्स हैं, जिन्होंने 2013 में अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी के मकड़जाल का खुलासा किया था। स्नोडेन के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन और इजराइल ने मिलकर बगदादी के संगठन आईसिस को मजबूत किया।
इजराइल ने दी बगदादी को हथियार चलाने की ट्रेनिंग
इस प्लान को बीहाइव यानी मधुमक्खी का छत्ता कोड नेम दिया गया। मकसद था कि इजराइल के आस-पास वाले देशों में आतंकवाद की ऐसी ताकत खड़ी की जाए जिसमें इजराइल विरोधी देश उलझकर रह जाएं और इजराइल सुरक्षित रहे। स्नोडेन के मुताबिक इजराइल ने खुद साल भर बगदादी को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी। खुद अमेरिका ने बगदादी से मिडिल ईस्ट में अपने दुश्मनों पर हमला कराया और मध्य एशियाई मुल्कों में आतंक फैलाकर अपनी सेनाओं को इन देशों में भेजा।
सीरिया, लीबिया और इराक तीनों ही तेल के लिहाज से काफी अमीर हैं। अमेरिका के बारे में कहा जाता है कि वहां से तेल निकालने के लिए अमेरिका ने आईएसआईएस को आगे बढ़ाया और इसमें अमेरिका की मदद सऊदी अरब और तुर्की ने की। जानकारों का मानना है कि तेल के इस खेल में आईएस को रोजाना 26 करोड़ 50 लाख रुपये आता है।

एक साल में ISIS का इन इलाकों में कब्जा
आईएसआईएस अब तक सीरिया और इराक के एक बड़े हिस्से पर अपना कब्जा जमा चुका है। इनमें इन दोनों देशों के कई बड़े शहर भी शामिल हैं। इराक में तो आईएसआईएस अब लगातार बगदाद की तरफ बढ़ता जा रहा है। जून 2014 से ISIS ने इराक और सीरिया में जो कहर बरपाना शुरू किया वो आजतक बदस्तूर जारी है। ISIS के आतंकवादी इराक और सीरिया के कई अहम शहरों पर कब्ज़ा कर चुके हैं और इन इलाकों में अपनी सरकार भी चला रहे हैं।
ISIS ने सीरिया के रक्का, पामयेरा, दियर इजौर, हसाक्का, एलेप्पो, हॉम्स और यारमुक इलाके के कई शहरों पर कब्जा जमाया हुआ है। ISIS ने इराक के भी कई शहरों पर कब्जा कर रखा है। मसलन रमादी, अनबार, तिकरित, मोसुल और फालुजा ISIS के आतंकवादियों के कब्जे में हैं। इराक में तो आलम ये है कि ISIS के आतंकी रमादी जीतने के बाद बगदाद की तरफ बढ़ रहे हैं।


Monday, 2 November 2015

आंखों में धूल झोंकने वाला अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की अनकही दास्तां


करीब दो दशक से भारतीय पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाला अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन आखिरकार कानून की गिरफ्त में आ चुका है. 25 अक्टूबर को इंडोनेशिया के बाली में उसको गिरफ्तार कर लिया गया. यह ऑपरेशन सीबीआई, इंटेलीजेंस यूनिट, मुंबई क्राइम ब्रांच, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया पुलिस के साथ इंटरपोल के सफल कोऑर्डिनेशन के जरिए सफल हो सका. उसे लाने के लिए सीबीआई की टीम बाली पहुंच चुकी है.

कभी दाऊद इब्राहिम की पनाहों में रहने वाला छोटा राजन मुंबई हमलों के बाद उससे अलग हो गया था. अंडरवर्ल्ड में दाऊद और छोटा राजन गैंग के बीच कई बार टकराव भी हुए. जानलेवा हमलों की खबरें भी आईं. लेकिन वह पुलिस और दाऊद की नजरों से बचता रहा. हमेशा वीओआईपी के जरिए कॉल करने वाले राजन ने 24 अक्टूबर को व्हाट्सएप के जरिए अपने एक शुभचिंतक को फोन किया, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने टेप कर लिया.

फोन पर छोटा राजन ने कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षित नहीं है. बहुत जल्द से यहां से निकल जाएगा. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं. इंटरपोल ने भी अलर्ट जारी कर दिया. 25 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलियन फेडेरल पुलिस को खबर मिली कि भारतीय मूल का एक नागरिक बाली जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया ने फौरन इंटरपोल के जरिए बाली इमिग्रेशन डिपार्टमेंट को इसकी सूचना दी और छोटा राजन को एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया.

कौन है छोटा राजन
छोटा राजन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे है. उसे प्यार से 'नाना' या 'सेठ' कहकर भी बुलाते हैं. उसका जन्म 1960 में मुंबई के चेम्बूर की तिलक नगर बस्ती में हुआ था. महज 10 साल की उम्र में उसने फिल्म टिकट ब्लैक करना शुरू कर दिया. इसी बीच वह राजन नायर गैंग में शामिल हो गया. जुर्म की दुनिया में नायर को 'बड़ा राजन' के नाम से जाना जाता था. यह नायर का दाहिना था, इसलिए लोग इसे 'छोटा राजन' कहने लगे.

ऐसे हुआ दाऊद से हुआ संबंध
बड़ा राजन की मौत से बाद छोटा राजन ने पूरे गैंग की कमान संभाल ली. इसी दौरान अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से इसका संबंध बन गया. दोनों एक साथ मिलकर मुंबई में वसूली, हत्या, तस्करी और फिल्म फाइनेंस का काम करने लगे. 1988 में वह दुबई चला गया. इसके बाद दाऊद और राजन मिलकर भारत ही नहीं पूरी दुनिया में गैर-कानूनी काम करने लगे. मुंबई में उनकी तूती बोलने लगी. लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा हुआ, जिसने उनको अलग कर दिया.

क्यों हुई दाऊद से दुश्मनी
भारत में अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम के बाद बड़े गैंगस्टरों में दूसरे नंबर पर छोटा राजन का ही नाम आता है. वह लंबे समय तक डी कंपनी के साथ काम करता रहा. लेकिन बाबरी कांड के बाद 1993 में मुंबई बम ब्लास्ट ने राजन को दहला दिया. जब उसे पता चला कि इस कांड में दाऊद का हाथ है, तो वह उसका दु्श्मन बन बैठा. उसने खुद को दाऊद से अलग करके नया गैंग बना लिया. दोनों एक-दूसरे के जानी-दुश्मन बन बैठे.

कई बार हुए जानलेवा हमले
मुंबई ब्लास्ट के बाद दाऊद और राजन ने भारत छोड़ दिया. इस दौरान दोनों एक-दूसरे को मारने का प्लान बनाते रहे. दाऊद ने छोटा राजन पर कई बार जानलेवा हमला करवाया, लेकिन वह बचता रहा. राजन पर हमले की बड़ी साजिश दुबई में दाऊद के खास शूटर शरद शेट्टी के घर में रची गई. साल 2000 में पिज्जा डिलीवरी ब्वॉय बनकर आए दाऊद के लोगों ने बैंकॉक के एक होटल में राजन पर हमला कर दिया.

ऐसे लिया हमले का बदला
छोटा राजन पर कई राउंड फायरिंग की गई, लेकिन वह वहां से बचकर भाग निकला. कहा जाता है कि छोटा राजन को बचाने में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का भी हाथ था. हालांकि, इसे खुद राजन इस बात से इंकार करता है. बैंकॉक में हुए हमले का उसने बदला लिया. उसका हवाला कारोबार संभालने वाले उसके भाई रवि और विमल ने 2003 में दुबई के एक क्लब में छोटा शकील के खास शरद शेट्टी की हत्या कर दी थी.

जब छोटा राजन ने कहा था, 'मैं जिंदा हूं'
अप्रैल, 2014 में बड़ी तेज़ी से एक खबर उड़ी थी. खबर ऐसी थी कि पूरे अंडरवर्ल्ड के साथ-साथ खुद पुलिस भी सकते में रह गई. कहा गया कि अंडरवर्ल्ड डॉन और डी कंपनी के जानी दुश्मन छोटा राजन की मौत हो गई है. ये भी बताया गया कि छोटा राजन की किडनी पहले से ही खराब थी. डायलसिस के दौरान उसकी हालत और खराब हो गई जिससे उसकी जान चली गई. इस खबर के आने के बाद छोटा राजन ने फोन पर बातचीत में आजतक से कहा...'मैं जिंदा हूं'. मेरे मरने की झूठी खबर दाऊद इब्राहिम फैला रहा है.

छोटा डॉन पर दर्ज हैं कई केस
भारत में छोटा राजन पर 65 से ज्यादा आपराधिक केस दर्ज है. राजन नायर गैंग में रहते हुए उसके खिलाफ पहले से अवैध वसूली, धमकी, मारपीट और हत्या की कोशिश के मामले दर्ज थे. दाऊद के साथ आने के बाद उसका क्राइम ग्राफ बढ़ गया. भारत में उसके खिलाफ 20 से ज्यादा लोगों की हत्या के केस दर्ज हैं. सन 2011 में मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या में भी उसका हाथ माना जाता है.

डॉन के लिए यूपी से जाते थे शूटर
भारतीय जांच एजेंसियों के मुताबिक, छोटा राजन के ज्यादातर शूटर यूपी के हुआ करते थे. इलाहाबाद, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, सीतापुर, आजमगढ़ और जौनपुर जैसे जिलों से शूटर्स भेजे जाते थे. शूटर्स की सप्लाई का काम राजेश यादव नाम का एक शख्स किया करता था. मुंबई के चर्चित काला घोड़ा और फरीद तनाशा हत्याकांड में राजेश का भी नाम आया था. इसके साथ ही पूर्वांचल का माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव भी उसका करीबी था.

ऐसा है छोटा राजन का साम्राज्य
अंडरवर्ल्ड के इस डॉन ने अपना कारोबार भारत से समेट कर विदेशों में जमाया. आज तक को मिली जानकारी के मुताबिक, दुबई में काम बंद करने के बाद उसने मलेशिया का रुख किया. उसने जर्काता में डांस बार, डिस्को और नाइट क्लब खोल दिए. मलेशिया में कारोबार जम जाने के बाद थाईलैंड में भी ऐसा ही कारोबार खड़ा कर लिया. इसके अलावा उसने विदेशों में कई जगह बेनामी संपत्ति अर्जित की है.

लेडी डॉन है छोटा राजन की पत्नी
छोटा राजन की पत्नी का नाम सुजाता निखलजे है. उस पर साल 2006 में एक्सटॉर्शन का मामला दर्ज किया गया था. उसकी तीन बेटियां हैं. एक बेटी ब्रिटेन में एमबीए कर रही है. दूसरी इंजीनियर है. राजन की पत्नी सुजाता उर्फ नानी चेंबूर के तिलकनगर में रहती है. मुंबई पुलिस ने उसको बिल्डर से फिरौती मांगने के केस में हिरासत में लिया था. छोटा राजन और सुजाता की शादी में दाऊद भी आया था. सुजाता दाऊद को भाई मानती थी.

यहां बीता था डॉन का बचपन
पश्चिम महाराष्ट्र के सतारा के फल्तान तहसील के गिरवी गांव में छोटा राजन का पैतृक घर है. वहां कभी एक झोपड़ी हुआ करती थी, जो अब एक महलनुमा बंगले में बदल चुकी है. यहां छोटा राजन ने अपना बचपन बिताया था. गांववालों ने बताया कि पारिवारिक समारोह में राजन के भाई यहां आते रहते हैं. इस बंगले में राजन के पिता सदाशिव सखाराम निकाल्जे की मूर्ति भी है, जो 50 के दशक में मुंबई चले गए थे.

पैतृक गांव जाते हैं उसके परिजन
राजन के पैतृक गांव के एक बुजुर्ग बताते हैं कि वह अच्छा बच्चा था. अक्सर उनकी दुकान पर आता था. गर्मियों और दिवाली की छुट्टियों में उसके परिवार के लोग हमेशा गांव आते थे. अंडरवर्ल्ड की दुनिया में कुख्यात होने के बाद राजन ने गांव आना छोड़ दिया. हालांकि उसकी पत्नी और भाई परिवार में कोई समारोह होने पर गांव आते रहते हैं. 1976 में राजन के पिता की मृत्यु हो गई थी.

ऐसे पकड़ा गया छोटा राजन
25 अक्टूबर को इंडोनेशिया के बाली में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को गिरफ्तार किया गया. इससे पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी एक फोन कॉल टेप की झी, जिससे पता चला कि वह ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षित नहीं है. बहुत जल्द से वहां से निकल जाएगा. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं. रविवार को ऑस्ट्रेलियन फेडेरल पुलिस को खबर मिली कि भारतीय मूल का एक नागरिक बाली जा रहा है.

पुलिस ने एयरपोर्ट पर लिया दबोच
खबर जब तक मिली तब तक प्लेन सिडनी एयरपोर्ट छोड़ चुका था. इसके बाद ऑस्ट्रेलियन फेडेरल पुलिस ने फौरन इंटरपोल के जरिए बाली इमिग्रेशन डिपार्टमेट को इसकी सूचना दी. खबर मिलते ही बाली एयरपोर्ट फौरन हरकत में आता है. इमिग्रेशन और बाली पुलिस प्लेन लैंड करते ही उस शख्स को फौरन दबोच लिया, जिसकी सूचना इंटरपोल से मिली रहती है. पासपोर्ट पर लगी फोटो से उसकी पहचान हो जाती है.

गिरफ्तारी के वक्त डरा था राजन
हालांकि, छोटा राजन के पासपोर्ट में मोहन कुमार नाम लिखा था. लेकिन पुलिस के पास मौजूद फोटो से उसका चेहरा मैच हो गया और पता चल गया कि पकड़ा गया शख्स इंडिया का मोस्ट वॉन्टेड राजेंद्र सदाशिव निखलजे है, जो 22 सालों से फरार था. गिरफ्तारी के समय छोटा राजन डरा हुआ था. उसने खुद पर खतरे की बात भी कबूल की. उसने बताया कि डी कंपनी यानी दाऊद का गैंग उसके पीछे पड़ा हुआ है.

महत्वपूर्ण है छोटा राजन की गिरफ्तारी
छोटा राजन की गिरफ्तारी भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. वह कई मामलों में वांछित है. एक वक्त में वह भारत के मोस्ट वॉन्टेड अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का सबसे खास आदमी था. वह भारतीय एजेंसियों को उसके बारे में अहम जानकारी दे सकता है. उसके सहारे एजेंसियां दाऊद के नेटवर्क में भी सेंध लगा सकती हैं. इसके साथ ही उन भारती नामों का भी खुलासा हो सकता है, जो दाऊद की मदद करते हैं.

दाऊद के खिलाफ भारत की मदद
कभी दाऊद का जिग्री दोस्त छोटा राजन 1993 में हुए बम ब्लास्ट के बाद अलग हो गया. उसके बाद दोनों एक-दूसरे के जानी दुश्मन हो गए. दोनों भारत छोड़कर विदेश में रहने लगे, लेकिन एक-दूसरे को मारने का प्लान भी बनाते रहे. छोटा राजन की मदद से भारत दाऊद इब्राहिम को पाकिस्तान में ही मारने की योजना बना चुका था, लेकिन मुंबई पुलिस के कुछ अफसरों की वजह से वह बच गया.

मुंबई पुलिस ने प्लान किया फ्लॉप
पूर्व गृह सचिव आरके सिंह ने आजतक से बातचीत में खुलासा किया था कि अटल सरकार के समय दाऊद को मारने के लिए छोटा राजन गैंग के लोगों को ट्रेनिंग दी गई थी. इस मिशन को वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल निर्देशित कर रहे थे. दिल्ली के एक होटल में पूरी तैयारी हो चुकी थी. इसी बीच मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम वहां पहुंच गई और उन शूटरों को गिरफ्तार कर लिया.

दाऊद से नहीं डरता डॉन
अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन ने बुधवार को बाली में कहा कि वह दाउद इब्राहिम के गैंग से नहीं डर रहा है. उसने यह बात तब कही है जब इंडोनेशिया की पुलिस ने विशेष कमांडो सुरक्षा के बीच ले जा रही थी. बाली पुलिस के प्रवक्ता हेरी वियांतो ने कहा कि उन्हें राजन के सामने मौजूद खतरों के बारे में पता है. इसलिए उसकी सुरक्षा में विशेष कमांडों लगाए गए हैं. उसकी सुरक्षा में कोई चूक न हो सकती. वह बिल्कुल स्वस्थ्य है.

अंडरवर्ल्ड की दुनिया पर बनी फिल्में
बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का रिश्ता काफी पुराना है. अंडरवर्ल्ड का बहुत पैसा फिल्मों लगता रहा है. कई एक्टर और एक्ट्रेस के नाम अंडरवर्ल्ड डॉन से जुड़ते रहे हैं. ऐसे उनकी जिन्दगी से प्रभावित फिल्में बनना स्वाभाविक है. छोटा राजन की जिंदगी पर भी कई फिल्में बनी हैं. अपराध जगत पर बनने वाली फिल्मों में महेश मांजरेकर की वास्तव: द रियलिटी, रामगोपाल वर्मा की कंपनी, सत्या, डी और वंस अप ऑन ए टाईम इन मुंबई प्रमुख हैं.