Wednesday, 18 March 2015

भूमि अधिग्रहण विधेयक पर किसी भी मंच पर खुली बहस को तैयार नितिन गडकरी


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने ग्रामीण विकास और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान भूमि अधिग्रहण कानून में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक दल और संगठन राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहे हैं।  हमारी सरकार गांव, गरीब, किसान और मजदूरों के हित में काम करने वाली सरकार है।


यूपीए सरकार ने जो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुन:स्थापन अधिनियम,2013 बनाया था, उसमें 13 कानूनों को सोशल इंपैक्ट और कंसेंट क्लाज से बाहर रखा गया था। इनमें सबसे प्रमुख तो कोयला क्षेत्र अधिग्रहण और विकास कानून 1957 और भूमि अधिग्रहण(खदान) कानून 1885, और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 है। इसके अलावा एटमी ऊर्जा कानून 1962, इंडियन ट्रामवेज एक्ट 1886, रेलवे एक्ट 1989 जैसे कानून प्रमुख हैं। हमने इसमें कुछ और महत्वपूर्ण विषयों को जोडा है। जिससे आप सहमत नही हैं। यह आपका अधिकार है। लेकिन हम आपसे पूछना चाहते हैं, क्या किसानों के खेतों को पानी नही मिलना चाहिए? क्या गांवों में समृद्धि नही आनी चाहिए? क्या देश की सुरक्षा महत्वपूर्ण नही है? हमने जो बदलाव किए हैं वो इन्ही विषयों से संबंधित हैं। ग्रामीण विकास, सिंचाई परियोजनाओं और देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमने बदलाव किए हैं। रक्षा, ग्रामीण बिजली, सिंचाई परियोजनाएं, गरीबों के लिए घर और औद्योगिक कारीडोर जैसी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण को सोशल इंपैक्ट और कंसेंट क्लाज से बाहर रखे गए कानूनों की सूची में जोडा है।


बदलावों को करते हुए हमने मुआवजे और पुनर्वास से कोई समझौता नही किया है। जिन विषयों को हमने इस सूची में शामिल किया है, उसमें से एक भी किसानों के विरोध में नही है, बल्कि यह विषय उन्हें समृद्धिशाली बनाने वाले हैं। इंडस्ट्रियल कोरीडोर दिल्ली या फिर किसी महानगर में नही बनेगा। यह ग्रामीण इलाको से होकर गुजरेगा। इसके तहत अगर ग्रामीण इलाकों में उद्योग लगते हैं तो इसका सीधा फायदा किसानों को होगा। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। किसानों के फसलों को उनकी फसलों का सही दाम मिलेगा। जहां कच्चा माल मिलेगा वहां उससे संबंधित उद्योग आने की ज्यादा संभावना है। क्या हमारे ग्रामीण युवाओं को रोजगार देना ठीक नही है?
हमने सिंचाई परियोजनाओं के लिए कानून में बदलाव किए हैं। हम सिंचाई के लिए व्यवस्था करना चाहते हैं। ये बदलाव खेतों को पानी उपलब्ध कराने के लिए हैं। जब तक किसानों को पानी नही मिलेगा तब तक हम उन्हें आत्मनिर्भर नही बना पाएंगे। 2000 एकड में अगर हम एरिगेशन प्रोजेक्ट लगाते हैं तो 3 लाख हेक्टेअर खेतों को हम पानी उपलब्ध करा सकते हैं। यह कहां से किसान विरोधी है?  80 फीसदी भूमि सिंचाई के लिए अधिग्रहीत की जाती है। इस पूरे कानून में कोई भी ऐसी बात नही है जो किसानों के विरोध में हो।

यही नही, जमीन मालिक के आलावा भी उस पर निर्भर लोग मुआवजे के हकदार होंगे। पूरा मुआवजा मिलने के बाद ही जमीन से विस्थापन होगा। इन बदलावों में न्यायसंगत मुआवजे के अधिकार और पारदर्शिता पर खास जोर दिया गया है। इसी के आसपास भूमिधारी समुदाय के हकहकूक के मसलों के कानून में रेखांकित किया गया है। अब मुआवजा एक निर्धारित खाते में ही जमा होगा। मुकम्मल पुनर्वास इस कानून का मूल आधार है। बिना उसके कोई भी जमीन किसी भी किसान से देश के किसी भी हिस्से में किसी भी कीमत पर नही ली जा सकेगी। इसके अलावा अब दोषी अफसरों पर अदालत में कार्यवाई हो सकेगी। इसके साथ ही किसानों को अपने जिले में ही शिकायत या अपील का अधिकार होगा। देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी हमने कुछ बदलाव किए। आज देश के लोंगों की गाढी कमाई विदेशों से हथियार मंगाने पर खर्च होती है। क्या हमें इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर नही होना चाहिए? क्या ये देशहित में नही है?
आपके मन में अध्यादेश लाने को लेकर भी सवाल हैं। हम कहना चाहते हैं, किसानों के हित में अध्यादेश लाना जरूरी था। यदि हम अध्यादेश नही लाते तो किसानों को उनकी जमीन का बाजार भाव से चार गुना मुआवजा नही दे सकते थे। इस अध्यादेश की बदौलत ही हम किसानों को उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा दे पाए। केवल राजमार्ग मंत्रालय और उर्जा मंत्रालय ने किसानों को 2000 करोड का मुआवजा दिया। यह इसलिए हो सका क्योंकि हम अध्यादेश लेकर आए।

विपक्षी दलों से बातचीत के बगैर कानून में बदलाव का आरोप आप लगा रहे हैं। यह भी ठीक नही है। हमने विज्ञान भवन में सभी राज्यसरकारों के मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। जिस बैठक में करीब सभी राज्य सरकारों के प्रतिनिधि मंत्री शामिल हुए। इस विषय में उन राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों के पत्र भी हमारे पास हैं। हमने जो बदलाव किए उन्ही सरकारों के सुझाव पर किए। इसमें आपकी राज्य सरकारें भी शामिल हैं। यह कानून खेतों, खलिहानों में काम करने वालो और किसानों को समृद्धि बनाने वाला कानून है, गावों में विकास के लिए इस विधेयक का साथ दें। हम इस विधेयक पर आपसे किसी भी मंच पर खुली बहस को तैयार हैं।



                                              




Monday, 9 March 2015

भूमि अधिग्रहण बिल पर आज लोकसभा में वोटिंग

लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पर आज हंगामे के आसार है। बिल को आज वोटिंग के लिए पेश किया जाएगा… विपक्ष किसानों के हित में बिल में 52 संशोधनों पर अडा हुआ है
लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पर आज हंगामे के आसार है. मंगलवार को बिल को आज वोटिंग के लिए पेश किया जाएगा. हालांकि विपक्ष 'किसानों के हित' में बिल में 52 संशोधनों पर अड़ा हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार सात से आठ संशोधन के लिए तैयार है।


 
सरकार बिल में कुछ संशोधन करने पर विचार कर रही है... सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों वेंकैया नायडू, अरुण जेटली और वीरेंद्र सिंह ने बिल को लेकर विपक्षी नेताओं से बातचीत भी की है...
सरकार की कोशिश है कि कुछ संशोधनों के साथ विपक्ष उसकी बात मान ले, लेकिन विपक्ष झुकने को तैयार नहीं दिख रहा... कांग्रेस की पीएसी बैठक में फैसला ले लिया गया है कि वह सरकार के किसी भी संशोधन को नहीं मानेगी।
 
सूत्रों के मुताबिक कहना है कि आधिकरिक संशोधन रेल पटरियों और राजमार्ग के दोनों ओर एक   किलोमीटर के दायरे में भूमि अधिग्रहण को सीमित करने से जुड़ा हो सकता है... एक संशोधन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने से जुड़ा हो सकता है।

3 देशों के दौरे पर आज रवाना होंगे मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तीन द्वीपीय देशों के पांच दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे। इन तीन देशों में सेशेल्स, मॉरीशस और श्रीलंका शामिल हैं।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका, मॉरीशस और सेशेल्स की पांच दिवसीय यात्रा के लिए आज रवाना होंगे और उम्मीद है कि इससे देश के हिंद महासागर क्षेत्र के देशों से रिश्ते और मजबूत होंगे। इसके साथ ही यह भी उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान मोदी श्रीलंका में तमिलों के गढ़ जफना का भी दौरा करेंगे। 



प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले विदेश सचिव एस. जयशंकर ने संवाददाताओं से कहा कि इन तीनों देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंध हैं और इन देशों की जनता और भारतीय जनता के बीच भी मजबूत संबंध हैं। उन्होंने कहा कि इन तीनों द्विपीय अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के वाणिज्यिक सहयोग में वृद्धि हुई है और इससे सहयोग की नई संभावनाएं सामने आई हैं।

इंदिरा गांधी के बाद मोदी सेशेल्स की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले इंदिरा गांधी ने 1981 में सेशेल्स की यात्रा की थी। प्रधानमंत्री मोदी 11-12 मार्च को मॉरीशस की यात्रा पर रहेंगे। मोदी अपनी यात्रा के आखिरी चरण में 13-14 मार्च को श्रीलंका में होंगे और राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के साथ बैठकें करेंगे।

महिला दिवस पर डीआरडीओ के जरिए देशभर में महिला को दिया गया संदेश


महिला दिवस पर डीआरडीओ के जरिए देशभर से आयी महिला वैज्ञानिकों के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया है... जिसका उद्घाटन केन्द्रीय मानव संसाधन विकासमंत्री स्मृति ईरानी दीप जलाकर किया है. केन्द्रीय मानव संसाधन विकासमंत्री स्मृति ईरानी सोमवार को दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची... ये कार्यक्रम डीआरडीओ की ओर से मनाया गया था... जिसमें महिला वैज्ञानिकों के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया है.. कार्यक्रम का उद्घाटन केन्द्रीयमंत्री ने दीप जलाकर किया... इस दौरान उन्होंने महिलाओं के लिए चल रही योजनाओं के बारे में भी जिक्र किया वहीं स्मृति ईरानी ने मीडिया को बताया कि ये देश की लिए बेहद हर्ष का विषय है क्योंकि देशभर में महिला वैज्ञानिक इस क्षेत्र में रिसर्च और इनोवेशन को कैसे आगे बढ़ा सकती हैं, उसका चिंतन डीआरडीओ में किया जा रहा है.. साथ ही उन्होंने इस कार्यक्रम को एक महिला होने के नाते गर्व का विषय बताया है...। 

मसरत आलम की रिहाई को लेकर बढ़ा विवाद

जम्मू कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी का गठबंधन को बनें अभी कुछ ही दिन हुए हैं कि दोनों ही पार्टियों में दरार आता नज़र आ रहा है...अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई पर दोनों ही दलों के बीच टकरार पैदा हो गई है. मसरत आलम की रिहाई को लेकर जम्मू कश्मीर में बीजेपी पीडीपी का विवाद बढता जा रहा है....जम्मू में बीजेपी विधायकों और बड़े नेताओं की बैठक हो रही है... बैठक में मुफ्ती के फैसलों और विवादित बयानों को लेकर चर्चा हो रही है.... बैठक में सरकार गिराने या फिर समर्थन वापस जैसे मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद कम है....लेकिन मुफ्ती के फैसलों के विरोध की बात हो रही है. बीजेपी ने कहा ऐसे फैसलों से गठबंधन को खतरा है...कांग्रेस ने पीएम से जवाब मांगा है.

वहीं संसद में बजट सत्र में भी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष दल हंगामा कर सकते हैं... जम्मू में हफ्ते भर में ही बात अब गठबंधन टूटने तक पर आ गई है. बीजेपी ने साफ कहा है कि मसरत के मुद्दे पर पार्टी को अंधेरे में रखा गया...विवाद की शुरुआत तो पहले ही दिन हो गई थी . लेकिन यहां तक बात तब पहुंची जब मुफ्ती ने बीजेपी की बात सुननी ही बंद कर दी.

पार्टी ने विरोध जताया था फिर भी अलगाववादी नेता मसरत आलम को जेल से रिहा कर दिया गया. जम्मू में जो बैठक हुई है उसमें सरकार में शामिल कई पार्टी के कई मंत्री मौजूद नहीं थे . ऐसे में सवाल ये है कि क्या अगली बैठक के बाद वाकई में बीजेपी मुफ्ती को बाय बाय कर देगी ? या फिर ऐसे ही चलता रहेगा .