Friday, 26 December 2014

सुशासन का पहल: सूचना प्रौद्योगिकी जुड़े हर गांव


योग गुरू रामदेव और अन्ना हजारे के द्वारा वर्ष 2011 और 2012 में देश में दो प्रमुख आंदोलन चलाए गए। पहली दृष्टि में देखा जाए तो दोनों आंदोलन देश की शासन तंत्र की विफलता के विरूद्ध शुरू हुए थे। हालांकि इस शासन तंत्र की विफलता को देश काफी लंबे समय से अनुभव करता रहा है और इसके विरूद्ध कई बड़े आंदोलन भी खड़े हुए लेकिन दुर्भाग्यवश वे न केवल स्वयं दिशाभ्रम के शिकार हुए, बल्कि उनका वास्तविक कारण और उद्देश्य भी ठीक से नहीं समझा जा सका। उदाहरण के लिए जयप्रकाश नारायण द्वारा संचालित 1977 में चलाए गए आंदोलन को देखें तो बात साफ हो जाएगी। यह आंदोलन भी शुरूआत में शासन में बैठे लोगों के भ्रष्टाचार के विरूद्ध ही था परन्तु यह तात्कालिक मुद्दा गंभीर तब बन गया जब जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया। लेकिन समस्या यह थी कि जेपी जिन लोगों के दम पर यह आंदोलन कर रहे थे, उनमें से किसी को भी न तो समस्या की और न ही इस आंदोलन की गंभीरता की समझ थी। वे इस समस्या को केवल और केवल कांग्रेस व इंदिरा गाँधी से जोड़ कर देखते थे और समझते थे कि इन दोनों के हट जाने से या फिर बलपूर्वक इन दोनों को सत्ताच्यूत कर देने से समस्या ठीक हो जाएगी। जेपी तो समस्या के मूल को समझते थे परन्तु दुर्भाग्यवश वे भीष्म मानसिकता से ग्रस्त थे यानी कि शासन में सुधार तो चाहते थे लेकिन स्वयं उसमें शामिल नहीं होने की प्रतिज्ञा किए बैठे थे। इसलिए उनके सामने एक ही उपाय था कि वे दूसरे लोगों को इसके लिए तैयार करें। दूसरे लोग तैयार तो हुए परन्तु उनकी मंशा कुछ और ही थी। इसी प्रकार हम और भी कई आंदोलनों को देख सकते हैं जो पैदा तो हुए परन्तु शासन की विफलता के कारण वे शासन तंत्र पर न तो कोई प्रश्न चिह्न ही खड़ा कर पाए और न ही कोई विकल्प ही प्रस्तुत कर सके।
लेकिन आज पूरे विश्‍व में सरकारें नियमित रूप से विभिन्‍न माध्‍यमों के जरिए अपने नागरिकों से बातचीत करती हैं। कुशल और प्रभावी संचार तंत्र हमेशा से किसी भी सरकार के लिए सुशासन के लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए एक महत्‍वपूर्ण माध्‍यम रहा है और आगे भी रहेगा।
पुराने जमाने में नागरिकों से संपर्क करने के लिए सरकारें ड्रम और ढोल जैसे उपकरणों का इस्‍तेमाल किया करती थीं। अब इनका स्‍थान इंटरनेट और डाटा ने ले लिया है। इंटरनेट और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के व्‍यापक इस्‍तेमाल ने संचार की गति तेज कर दी है, जिससे कोई भी सूचना बिना रोक-टोक के तत्‍काल लक्षित समूहों तक पहुंच रही है।
सूचना प्रौद्योगिकी ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि सरकार द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णयों पर तत्‍काल अमल हो और देश के हर हिस्‍से में इन्‍हें शीघ्रता से चलाया जाए। इसने यह भी सुनिश्चित किया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ-साथ नागरिकों की समस्‍याओं तथा सुझावों पर सरकार तत्‍काल प्रभावी कार्रवाई करे।
शासन को सुधारने में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका के परिप्रेक्ष्‍य में इसकी मजबूती, कमजोरियों, अवसर और खतरे के अध्‍ययन (एसडब्‍ल्‍यूओटी) से यह बात सामने आई है कि सुशासन से नागरिकों को काफी फायदे हो रहे हैं। अध्‍ययन ने यह भी खुलासा किया है कि एक राष्‍ट्र के रूप में भारत ने अभी तक आईटी की क्षमताओं का सुशासन के लिए पूरा इस्‍तेमाल नहीं किया है। इस मामले में हमारी सफलताएं अलग-अलग और बिखरी हुई हैं।
भले ही हमारी प्रगति अपेक्षित नहीं है, फिर भी कुछेक सफलता की कहानियों ने यह साबित कर दिया है कि उन सबमें काफी संभावनाएं हैं और उन्‍हें सुशासन के लिए बड़े स्‍तर पर, पूरे राज्‍य में और यहां तक कि राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी अपनाया जा सकता है।
उदाहरण के लिए छत्‍तीसगढ़ सरकार की सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित एक परियोजना पर गौर किया जा सकता है। इस परियोजना ने वहां की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को न केवल सुधार दिया, बल्कि उसे पारदर्शी और जवाबदेह आपूर्ति तंत्र के रूप में परिवर्तित कर दिया।
वितरण प्रणाली की गड़बडि़यों को रोकने के लिए 2007 में सभी सिरों को जोड़ते हुए छत्‍तीसगढ़ सरकार ने इस आईटी समाधान को अपनाया। इसके तहत वितरण के सभी स्‍तरों- उत्‍पादों की खरीद, भंडारण तथा उनके राज्‍य भंडार गृहों और उचित दर की दुकानों तक आवाजाही को भी कम्‍प्‍यूटरीकृत किया गया। वेब पर लगातार मिल रही रिपोर्टों के आधार पर वितरण के संचालन की नियमित निगरानी हरेक स्‍तर पर संभव हो गई। वेब प्रबंधन की वजह से संचालन में काफी जवाबदेही आ गई। ऑनलाइन मंच से सारे उत्‍पादों की उपलब्‍धता की जानकारी लगातार मिलती है, जिससे नीति निर्धारक प्रभावी ढंग से इन उत्‍पादों को उपयोग के लिए मंजूरी देते हैं।
छत्‍तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की एक और विशेष बात यह है कि पोर्टल सरकार और उसकी एजेंसियों को नागरिकों से सीधे जोड़ता है। आम आदमी भी उत्‍पादों की आवाजाही पर नजर रख सकता है और अपनी समस्‍याओं को सरकार तक शीघ्रता से पहुंचा सकता है।
छत्‍तीसगढ़ की इस योजना ने उत्‍साहवर्धक परिणाम दिए हैं। ओडिशा, उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश ने भी इसी तरह की योजना अपने यहां लागू करने में रुचि दिखाई है।
अगला उदाहरण कर्नाटक का है, जहां भू- रिकॉर्ड के मामले में सरकार को भ्रष्‍टाचार मिटाने में सफलता मिली है। 'भूमि' परियोजना कर्नाटक की भू-रिकॉर्डों के कम्‍प्‍यूटरीकरण की सफल कहानी है। इस परियोजना पर काम वर्ष 1999 में शुरू हुआ था। वर्ष 2001 में नागरिकों और अन्‍य भागीदारों के लिए पहली ऑनलाइन सेवाएं शुरू की गईं। 2006 तक 'भूमि' ने काफी प्रगति कर ली। वर्तमान में 'भूमि' कार्यक्रम के तहत प्रत्‍येक वर्ष करीब ढाई करोड़ लोगों को संपत्ति रिकॉर्ड जारी किए जा रहे हैं।
करीब 800 टेली-केन्‍द्रों के माध्‍यम से सरकार किसानों को उनके द्वार पर रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर) उपलब्‍ध करा रही है। इस कार्य के लिए ताल्‍लुका की जगह गांव को इकाई बनाने के प्रयास जारी हैं।
इसी तरह, गुजरात सरकार की भी भू-रिकॉर्ड कम्‍प्‍यूटरीकरण योजना को जबर्दस्‍त सफलता मिली है। 'ई-धारा' (अब ई-जामिन) के नाम से शुरू की गई इस योजना के तहत गुजरात के 26 जिलों के 225 ताल्‍लुकों को गुजरात स्‍टेट वाइड एरिया नेटवर्क से जोड़ा गया। ताजा अनुमानों के मुताबिक 'ई-धारा' के तहत जारी किए जा रहे संपति रिकॉर्डों की संख्‍या 1.58 करोड़ से बढ़कर तीन करोड़ प्रति वर्ष हो गई है।
वर्ष 2007-08 में ग्राम पंचायतों ने ही अपने ई-ग्राम केन्‍द्रों से आरओआर जारी करना शुरू कर दिया था। ग्रामवासियों को इसके लिए ताल्‍लुक जाने की जरूरत नहीं थी। सभी 227 लैंड रिकॉर्ड डाटाबेसों के केन्‍द्रीकरण, जो 2010 में किया गया, के बाद अब कहीं से भी आरओआर जारी किया जा सकता है।
पंजीयन के साथ सुरक्षित लेन-देन सुनिश्चित करने के लिए 'ई-धारा' ने संपत्ति मालिकों की फोटो और फिंगर प्रिंट भी लेना शुरू कर दिया। ताल्‍लुका स्‍तर पर उप मामलतदार द्वारा जांच के लिए वहां फिंगर प्रिंट स्‍काइनर्स भी उपलब्‍ध कराया गया है। इन उपायों से डाटा की सुरक्षा काफी बढ़ गई है। वर्ष 2011 में सभी 227 'ई-धारा' केन्‍द्रों पर हुए लेन-देन को एक केन्‍द्रीय सर्वर में डाला गया, जिससे डाटा पर केन्‍द्रीय नियंत्रण बढ़ गया। यह योजना वित्‍तीय तौर पर खुद सक्षम है। आरओआर की प्रतिलिपियों के एवज में लिए गए शुल्‍क से आज 'ई-धारा' की आमदनी दो करोड़ रूपये प्रति माह है।
ऊपर दिए गए तीनों मामलों में यही दर्शाया गया है कि कैसे आईटी की मदद से सुशासन को अपनाया जाए और इसे आगे बढ़ाया जाए।
आईटी आधारित योजनाओं को लागू करने से वे तमाम सरकारी सेवाएं, जो भ्रष्‍टाचार और विलंब की वजह से आम नागरिकों की पहुंच से दूर थीं, अब आसानी से मुहैया कराई जा रही हैं। किसी भी व्‍यक्ति के लिए पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्‍त करना एक बड़े मिशन जैसा हो गया था। रेल टिकटों की बिक्री में आईटी के इस्‍तेमाल से न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि यात्रियों को भी काफी सहूलियत हो गई है।
इस साल 15 अगस्‍त को लालकिले से प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने सुशासन के लिए आईटी के व्‍यापक इस्‍तेमाल पर जो जोर दिया, उससे यह सुनिश्चित हो गया है कि आने वाले समय में हमें आईटी के इस्‍तेमाल के साथ सुशासन की कई सफल क‍हानियां मिलेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा '' ई-गवर्नेंस आसान, प्रभावी और आर्थिक गवर्नेंस भी है। ई-गवर्नेंस सुशासन के लिए मार्ग प्रशस्‍त करता है।''
सुशासन भारत में किसी राजनीतिक दल, नेता या किसी एक राज्‍य का विशेष मुद्दा नहीं है। यह एक माध्‍यम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि शासन के लिए जिम्‍मेदार लोग अपना काम जवाबदेही के साथ करें। यह नागरिकों को भरोसा भी दिलाता है कि उनके द्वारा चुने गए जन प्रति‍निधि प्रभावी तरीके से नीतियां बनाएंगे और उन्‍हें लागू करेंगे।
राजनीति, शिक्षा, धर्म और कारपोरेट क्षेत्र के दिग्‍गजों ने राष्‍ट्र के विकास के लिए सुशासन को एक जरूरी माध्‍यम के रूप में अपनाने पर जोर दिया है। महात्‍मा गांधी ने कहा था ''जो बदलाव हम दूसरों में चाहते हैं, पहले अपने में लाएं।'' यह संदेश उन तमाम लोगों के लिए है, जो सुशासन की चाहत रखते हैं।
इस पीढ़ी के नीति निर्धारक और प्रशासक भाग्‍यशाली हैं कि उनके पास आईटी जैसा सशक्‍त माध्‍यम है। इसे सुशासन के लिए इस्‍तेमाल करने की भरपूर संभावनाएं हैं। साथ ही यह खतरा भी है कि इस सशक्‍त माध्‍यम को हम कहीं खो न दें। मोबाइल सेटों की तेजी से बढ़ती संख्‍या, ब्रॉडबैंड, नये ऑपरेटिंग सिस्‍टमों और घरेलू एप्‍लीकेशनों के साथ यह यात्रा काफी रोचक होगी। इन में से प्रत्‍येक सुशासन के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने का एक मंच है।
  

Thursday, 25 December 2014

कैसा ये इश्क है ?

 देशभर में एसिड अटैक की वारदातें बढ़ती जा रही हैं। आंकड़े बतातें हैं कि अकेले भारत में... हर साल तकरीबन 500 लड़कियों पर... तेजाबी हमले होते हैं। यानी हर साल एसिड अटैक की वजह से... 500 लड़कियां अपनी खूबसूरती को गंवाकर.. एक बोझिल जिंदगी जीने को मजबूर हो जाती है। जहां ना कोई जीवन साथी है.,.और ना कोई हितैशी.... उनके ज़हन में उस खौफनाक दौर की यादें बस जाती हैं। जिस दिन उन्हें ज़िंदगी की सबसे दर्दनाक सज़ा दी गई थी। कई लड़कियां तो इन हमलों में अपनी जान तक गंवा बैठती हैं...और जो जिंदगी की जंग जीत जाती हैं...उनकी जिंदगी कई बार मौत से भी बदतर हो जाती है। लेकिन इस अपराध को अंजाम देने वाले कुछ दिन सलाखों में रहने के बाद... मौज से जिंदगी गुज़ारते हैं। 


दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके में महिला डॉक्टर पर तेजाब फेंके जाने की वारदात के बाद... सनसनी फैल गई... इस वारदात के बाद... दिल्ली में खौफ पसरा था... हर कोई डरा सहमा था...और सबके ज़हन में एक ही सवाल कौंध रहा था कि आखिर कौन है वो नकाबपोश... जो महिलाओं पर बसरा रहा है खौलता तेजाब। इस वारदात के बाद बुरी तरह झुलसी महिला डॉकटर की हालत इतनी गंभीर थी...कि वो पुलिस को कुछ नहीं बता पाई। वहीं ये खौफनाक घटना सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे में तो कैद हो गई... लेकिन कैमरों में कैद हुई तस्वीरों की बिनाह पर... हमलावरों को पहचान पाना मुमकिन नहीं था।
गौरतलब है कि लेडी डॉक्टर पर एसिड फेंकने वाले ब्लैक बाइक पर सवार दोनों ही युवकों ने चेहरे पर कपड़ा बांधा हुआ था। पीछे सवार युवक ने जैकेट के कॉलर ऊपर उठाए हुए थे और काला चश्मा लगाया हुआ था। ऐसे में दिल्ली पुलिस के लिए भी इस केस को सुलझा पाना...एक बड़ी चुनौती बन चुकी थी। पुलिस परेशान थी कि आखिर करे तो क्या करे। कहां से उन मनमलों पर गिरफ्तार करे...जिन्होंने पेशे से डॉक्टर एक महिला को मौत की दहलीज़ पर पहुंचा दिया।
ये गुनहगार इतने शातिर थे..कि पुलिस को गुमराह करने के लिए इन्होंने इस वारदात को लूट का शक्ल देने की भी कोशिश की...इसके तहत बाइक चला रहे शख्स ने लेडी डॉक्टर का हैंडबैग झपटा....और पीछे बैठे शख्न ने...डॉक्टर के चेहरे पर बोतल से तेजाब फेंक दिया...लेकिन ये बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी कि कैसे कोई शख्स... चंद रुपयों की लूट के लिए...इतने संगीन अपराध को अंजाम दे सकता था। इस वारदात के पीछे उलझी गुत्थी को सुलझाने के लिए... दिल्ली पुलिस ने 12 टीमें बनाईं...मामले की पेचीदगी से पड़ताल कर रही दिल्ली पुलिस आखिरकार ऐसे मोड़ पर जा पहुंची। जहां इस वारदात से जुड़े सटीक क्लू...पुलिस के सामने आ गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जो सनसनीखेज़ खुलासा किया... उसकी हकीकत जानकर हर कोई दंग रह गया।
जी हां इस हमले के पीछे छिपी थी...मोहब्बत में नाकाम हुए एक सिरफिरे आशिक की सनक... जी हां दिल्ली ESI अस्पताल की लेडी डॉक्टर पर एसिड अटैक की वारदात में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के मुताबिक एक डॉक्टर ने ही उन्हें... एसिड फेंकने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। पुलिस ने बताया कि ये वारदात डॉक्टर अमृत कौर के पुराने जानकार युवक ने कराई। उस डॉक्टर ने पैसे देकर खरीदे हुए हमलावरों से...डां. अमृत कौर पर तेजाबी हमला करा दिया। हालांकि इस मामले में अभी और भी खुलासे होने बाकी हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि पेशे से डॉक्टर....वो युवक अमृत कौर से इकतरफा प्यार करता था....लेकिन इस बीच अमृत कौर की शादी किसी और से तय होने से...वो इस कदर हताश हो चुका था कि उसने अमृत को बदसूरत बनाने के लिए...इस साजिश का ताना-बाना बुन दिया। और फिर भाड़े के हमलावरों से इस वारदात को अंजाम तक भी पहुंचवा दिया।

हालांकि इस घिनौने अपराध को अंजाम देने वाले भी पुलिस के शिकंजे से बच न सके। घटना के दो दिन बाद ही...हमलावर के चेहरे भी बेपर्दा हो गए। लेकिन सवाल ये खड़ा होता है कि न लोगों की गिरफ्तारी से... क्या डॉ. कौर को इंसाफ मिल पाएगा।
करीब एक साल पहले एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए... सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में तेजाब की खुली बिक्री पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके देश भर में तेजाब की खुलेआम खरीद फरोख्त चल रही है। बात करें राजधानी दिल्ली की..तो दिल्ली एनसीआर में भी आसानी से तेजाब लोगों की पहुंच में है। और सबसे हैरानी वाली बात तो ये है कि...सुप्रीम कोर्ट के नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के लिए... कोई कार्रवाई नहीं की जाती..यही वजह है कि तेजाब हर साल हजारों मासूम लड़कियों की जिंदगी में जहर घोल रहा है।
िल्ली में कई किराने की दुकानों में टॉयलेट क्लीनर के तौर पर...CONCENTRATED ACID  की बिक्री की जा रही है। न तो दुकानदार इसके खरीदारों का कोई रिकॉर्ड रखते हैं और न ही इसके लिए ग्राहकों से कोई पूछताछ की जाती है। महज़ 10 से 20 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर लोग किराने की दुकान से आसानी से तेजाब खरीद सकते हैं। जबकि नियम ये है कि किसी भी 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को.... तेजाब नहीं बेचा जा सकता है। साथ ही इसकी बिक्री करने पर दुकानदार को खरीदार का पहचान पत्र देखना होगा और उसका रिकॉर्ड रखना होगा। लेकिन दुकानदार खुलेआम इन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। दुकानदारों की अनदेखी के चलते... मनचले आसानी से तेजाब खरीदते हैं...और फिर उसे हथियार बनाकर... लड़कियों पर वार करते हैं।
दिल्ली के कई इलाकों में तो वेंडर्स...  लोगों के घर-घर जाकर टॉयलेट क्लीनर के नाम पर एसिड मुहैया करा रहे हैं। अब इसे प्रशासन की अनदेखी ही कहिए कि इनपर वेंडर्स पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही। सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब की बिक्री करने वालों के लिए कुछ खास नियम कानून निर्धारित किए हैं। मसलन

तेज़ाब बिक्री के नियम
18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को तेजाब की बिक्री नहीं की जा सकती
किसी भी दुकानदार को तेजाब बेचने के लिए उसका रिकॉर्ड रखना होगा
किसी व्यक्ति को तेजाब बेचते वक्त उसके फोटो और पहचान पत्र की जांच जरूरी है इसमें व्यक्ति के घर का पता भी होना चाहिए।
तेजाब खरीदने की वजह भी दुकानदार को ग्राहक से पूछनी होगी
दुकानदार के पास तेजाब का कितना स्टॉक मौजूद है इस बात की जानकारी 15 दिन के अंदर एसडीएम को उपलब्ध करानी होगी
स्टॉक की सूचना न देने की हालत में एसडीएम दुकानदार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा सकते हैं
इसके अलावा जिन अस्पतालों, एजुकेश्नल इंस्टीट्यूट और लैबोरेटरीज़ में तेजाब का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें इसके इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना होगा और साथ ही इसकी जानकारी एसडीएम को भी उपलब्ध करानी होगी।


तेजाब की बिक्री को लेकर नियम-कायदे तो बहुत हैं....लेकिन इन कानूनों का कितना पालन किया जाता है.... इनकी बानगी बयां कर रहे हैं... देशभर में लड़कियों पर हो रहे तेजाबी हमले। जहां हर रोज़ कोई न कोई बकसूर लड़की तेजाबी हमलों का शिकार होकर...मौत से बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हो रही है। 

एसिड अटैक करने वालों के खिलाफ...केन्द्र सरकार गंभीर नज़र आ रही है। देश में लगातार बढ़ते एसिड अटैक को देखते हुए मोदी सरकार ने इस अपराध को बेहद संगीन मामलों में शामिल करने का फैसला किया है। गौरतलब है कि इसके लिए मौजूदा आईपीसी कानून में बदलाव किया गया है। हाल ही में होम मिनिस्ट्री की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस बारे में लॉ कमिशन की अनुशंसा को भी मान लिया गया है, और अंतिम मंजूरी के लिए जल्द ही कैबिनेट के पास इसे पेश किया जाएगा।

मिनिस्ट्री की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, कानून में बदलाव के बाद एसिड अटैक के मामले में... आरोप साबित होने पर अपराधियो को फांसी या उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है। इसके लिए सुनवाई की समयसीमा 60 दिन तय की गई है। साथ ही एसिड अटैक के शिकार लोगों का ट्रीटमेंट मुफ्त किया जाएगा, इसके लिए होने वाला खर्च गृह मंत्रालय उठाएगा। हमले के शिकार लोगों को फिजिकली चैलेंज्ड माना जाएगा और उन्हें रिजर्वेशन, ट्रेनिंग और लोन फैसिलिटी भी मिल सकेगी। इससे उनके पुनर्वास में भी मदद मिलेगी।

इसके अलावा एसिड अटैक की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने एसिड की बिक्री के नियमों में भी बदलाव करने की पहल की है। इसके तहत सारे एसिड विक्रेताओं को एक वेब ऐप्लिकेशन से जोड़ा जाएगा और उनके स्टॉक और बिक्री पर लगातार नजर रखी जाएगी। मिनिस्ट्री के मुताबिक, एसिड बिक्री पर नजर रखने से भी ऐसे अपराध पर काबू पाया जा सकेगा।

गौरतलब है कि तेजाब की खुली ब्रिक्री पर अंकुश लगाकार...सरकार एसिड एटैक का घटनाओं को कम करना चाहती है..लेकिन ये सरकार की इन नई गाइनलाइंस के बाद....इस अपराध पर किस हद तक लगाम लग पाएगी। फिलहाल कहना मुश्किल है।
भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों में...एसिड अटैक बेहद गंभीर अपराध बनता जा रहा है..... एसिड अटैक न सिर्फ किसी महिला के चेहरे को खराब कर देता है..ना सिर्फ उसकी आँखों की रोशनी छीन लेता है... बल्कि समाज में उसे तिल-तिल कर मरने के लिए भी मजबूर कर देता है... हो सकता है इस तेज़ाबी हमले में उसकी जान न जाए, पर इस हमले की शिकार हुई लड़की की ज़िंदगी बेहद बोझिल और दर्दनाक होकर रह जाती है

जिस्म पर लगे घाव तो सबको दिखते हैं लेकिन ज़हन पर लगे घाव किसी को नज़र नहीं आते.... आत्मनिर्भर और ज़िंदादिली से भरपूर एक लड़की... देखते ही देखते असहाय और दूसरों पर आश्रित होकर रह जाती है.... महिलाओं में सुंदर चेहरों को खासी तवज्जो दी जाती है.... ऐसे में तेजाब से झुलसे डरावने चेहरे से समझौता कर पाना...किसी भी लड़की के लिए आसान नहीं होता
हालांकि एसिड अटैक पर कोई आधिकारिक आँकड़ें तो नहीं हैं... लेकिन देश में पिछले 10 सालों में...देशभर में ये अपराध खूब बढ़ा...  स्वयंसेवी संस्था एसिड सरवाइवल ट्रस्ट इंटरनेशनल यानी  ASTI  के मुताबिक... भारत में हर साल एसिड अटैक के करीब 500 मामले होते हैं
तेज़ाब से हमलों का शिकार हुई महिलाओं का मानना है कि तेज़ाब से हुआ हमला...ना सिर्फ उनके जिस्म बल्कि ज़हन को भी अंदर तक छलनी कर जाता है.
ASTI के रिकॉर्ड मुताबिक दुनिया के करीब 23 देशों में एसिड अटैक का खौफ पसरा है... इन देशों में अमरीका, ब्रिटेन, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों के भी नाम हैं लेकिन इन देशों में दूसरी जगहों की अपेक्षा हमलों की संख्या बेहद कम है... महिलाओं पर एसिड हमलों की सबसे ज्यादा घटनाएँ भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश के अलावा कंबोडिया में दर्ज की गई हैं.
विशेषज्ञ भी इस बात को मानते हैं इस जुर्म के पीछे...लचर कानून व्यवस्था ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। आमतौर पर इन हमलों की शिकार महिलाएं होती हैं। कभी घरेलू हिंसा तो कभी टूटा प्रेम संबंध जैसे मामलों में...गाज आखिरकार महिला पर आकर गिरती है..... कई मामलों में तो ये भी देखा गया है कि...लड़कियों पर एसिड अटैक के बाद... दोषी ज़मानत पर रिहा हो जाते हैं और उनकी ज़िंदगी आगे बढ़ जाती है.... जबकि पीड़ित की ज़िंदगी वहीं की वहीं थम कर रह जाती हैलेकिन विडंबना देखिए.....कि देश में आज भी एसिड अटैक के मामले..... सुर्खियों से दूर और सरकारी निगाहों से परे... कहीं किसी कोने में भटकते रहते हैं.


Wednesday, 24 December 2014

भारत रत्न...

पंडित मदन मोहन मालवीय....जैसा नाम वैसा काम....अपने काम और व्यवहार से पंडित मदन मोहन सबका मन मोह लेते थे। यही वजह है कि उन्हें महामना की उपाधि से नवाजा गया। ये उपाधि पाने वाले वे पहले और अंतिम भारतीय हैं। इसी वजह से लोग उन्हें महामना कह कर पुकारते थे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को इलाहाबाद में हुआ। मदन मोहन के पिता पंडित ब्रजनाथ संस्कृत भाषा के प्रकाण्ड विद्वान थे। मात्र 5 साल की आयु में उनके माता-पिता ने उन्हें संस्कृत भाषा में प्रारंभिक शिक्षा दिलवाने के लिए पंडित हरदेव धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला में भर्ती किया। महामना ने वहां से प्राइमरी परीक्षा पास की। विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों से होते हुए उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से बी.ए. की उपाधि हासिल की। पंडित मदन मोहन मालवीय ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेकर 35 साल तक कांग्रेस की सेवा की। उन्हें सन्‌ 1909, 1918, 1930 और 1932 में कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। मालवीय जी एक प्रख्यात वकील भी थे। एक वकील के रूप में उनकी सबसे बड़ी सफलता चौरी चौरा कांड के अभियुक्तों को फांसी से बचा लेने की थी। चौरी-चौरा कांड में 170 भारतीयों को सजा-ए-मौत देने का ऐलान किया गया था, लेकिन महामना ने अपनी योग्यता और तर्क के

 शिक्षा के क्षेत्र में महामना का सबसे बड़ा योगदान काशी हिंदू विश्वविद्यालय के रूप में दुनिया के सामने आया था। उन्होंने एक ऐसी यूनिवर्सिटी बनाने का प्रण लिया था, जिसमें प्राचीन भारतीय परंपराओं को कायम रखते हुए देश-दुनिया में हो रही तकनीकी प्रगति की भी शिक्षा दी जाए। यूनिवर्सिटी बनवाने के लिए उन्होंने दिन रात मेहनत की और 1916 में भारत को बीएचयू के रूप में देश को शिक्षा के क्षेत्र में एक अनमोल तोहफा दे दिया।

 मदन मोहन मालवीय हिंदू महासभा के सबसे असरदार नेताओं में से एक थे। वह स्वभाव में बड़े उदार, सरल और शांति प्रिय व्यक्ति थे। मालवीय कैसी शख्सियत थे इसका अंदाजा इसी से लगया जा सकता है कि खुद गांधी जी उन्हें नवरत्न कहते थे। जिंदगी भर देश और समाज की सेवा में लगे रहने वाले महामना का वाराणसी में 12 नवंबर 1946 को 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। जाहिर है ऐसे रत्न को भारत रत्न मिलना हम सबके लिए गौरव की बात है। गाँधी जी मालवीय जी को नवरत्न कहते थे और अपने को उनका पुजारी।
बल पर 151 लोगों को फांसी के फंदे से छुड़ा लिया था।
देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और महामना मदन मोहन मालवीय को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किए जाने का ऐलान हुआ हैं..। सम्मान की घोषणा दोनों विभूतियों के जन्मदिन 25 दिसंबर से एक दिन पहले हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इन विख्यात हस्तियों को देश का सबसे बड़ा सम्मान राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा का उचित मान है।
भारत के सर्वाधिक करिश्माई नेताओं में से एक वाजपेयी को एक महान नेता और  बीजेपी का उदारवादी चेहरा बताया जाता है। पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे वाजपेयी को देश की बेहतरी के लिए कई ठोस पहल करने का श्रेय दिया जाता है। खासकर भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेदों को कम करने का उनका प्रयास प्रमुख रूप से शामिल है। वाजपेयी, कांग्रेस पार्टी से बाहर के पहले ऐसे नेता हैं जो सबसे अधिक लंबे समय तक भारत के प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहे। वाजपेयी को भारत रत्न देने की मांग लंबे समय से हो रही हैं। यही वजह है, कि जैसे ही भारत रत्न देने का ऐलान हुआ सुषमा स्वराज समेत बीजेपी के तमाम बड़े नेता वाजपेयी से मिलने इनके घर पहुंचकर मुबारक बाद दी। बीजेपी नेता इस ऐलान से काफी खुश है।

वाजपेयी ना केवल उम्दा किस्म के राजनेता रहे हैं बल्कि देश में एक कवि के तौर पर उनकी खास पहचान रही हैं। बीजेपी के इस दिग्‍गज नेता की पहचान हमेशा उनके जानदार भाषणों की वजह से होती रही है। संसद में उनके जानदार भाषण से विपक्षी नेता भी उनके मुरीद हो जाया करते थे। वहीं एक कवि के तौर पर वाजपेयी अपनी कविता में एक नई जान फूंक देते थे।
वहीं दूरदष्टा और महान शिक्षाविद मालवीय की मुख्य उपलब्धियों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना शामिल है। मालवीय को स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सशक्त भूमिका और हिंदू राष्ट्रवाद के प्रति उनके समर्थन के लिए भी याद किया जाता है। वह दक्षिणपंथी हिंदू महासभा के शुरूआती नेताओं में से एक थे। मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न मिलने पर उनके पौत्र गिरधर मालवीय ने भी खुशी जाहिर की है।
इन दो महान हस्तियों को भारत रत्न देने के ऐलान से विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सराहना की हैं।
22 साल बाद किसी राजनेता को भारत रत्न मिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद राष्ट्रपति से इन दोनों महान हस्तियों को भारत रत्न से सम्मानित करने की सिफारिश की थी। देश के ये दो महान नेता वास्तव में भारत के दो रत्न हैं।

Thursday, 18 December 2014

आतंकी सरगना हाफिज सईद ने भारत को दी धमकी



सिडनी और पेशावर में दहशत के बाद.... दिल्ली में भी आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है। हाफिज सईद की अगुवाई में पाकिस्तान के दो बड़े आतंकी संगठन भारत में बड़े आतंकी हमले की साजिश को अंजाम दे सकते हैं। जी हां लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा दिल्ली-आगरा हाईवे और दिल्ली के दो होटलों पर हमले की फिराक में हैं। खुफिया एजेंसी आईबी और मैक की इस जानकारी के बाद गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। सिडनी और पेशावर की घटना के बाद दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई बड़े शहर पहले से ही हाईअलर्ट पर हैं, और उन्हें और सतर्क रहने को कहा गया है। सूत्रों ने कहा कि खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि हाफिज अपने सोर्सिस के जरिए भारत में ‘सॉफ्ट टारगेट’ की तलाश कर रहा है। हाफिज़ सईद ने पिछले दिनों पाक में सभा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को खुली धमकी देते हुए भारत में तबाही फैलाने की बात कही थी।
आतंकी सरगना की धमकी
मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने भारत के खिलाफ फिर जहर उगला है। पाकिस्तान के पेशावर में आर्मी स्कूल पर हुए तालिबान के हमले के लिए हाफिज ने भारत को जिम्मेदार ठहराया है। हाफिज ने भारत से पेशावर हमले का बदला लेने की चेतावनी भी दी है। जमात उद दावा के चीफ हाफिज ने एक जनसभा में कहा कि पेशावर हमले के लिए भारत जिम्मेदार है। हाफिज़ ने पीएम मोदी को टारगेट करते हुए कहा कि मोदी इस हमले पर मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं। इसके साथ ही हाफिज ने भारत से पेशावर हमले का बदला लेने की चेतावनी भी दी। आप भी देखिए इस आस्तीन के सांप की जुबां से निकला...एक-एक नापाक अल्फाज़।
पेशावर में आर्मी स्कूल पर जो हमला हुआ है उसका असल मुजरिम भारत का प्रधानमंत्री मोदी है। सब एक बात पर इकट्टे हो जाए कि हमें इन साजिशकर्ताओं से बदला लेना है। 

गौरतलब है कि पेशावर के एक आर्मी स्कूल पर हुए तालिबानी आतंकवादी हमले में 132 बच्चों समेत 141 लोग मारे गए थे। इस घटना पर भारत ने गहरा दुख व्यक्त किया था और प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन करके कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पाकिस्तान के साथ खड़ा है। मोदी ने शरीफ से कहा था कि भारत दुख की इस घड़ी में पाकिस्तान को हर संभव मदद देने के लिए तैयार है। मोदी की इसी दरियादिली से बौखलाए..हाफिज़ सईद ने भारत को दहलाने की साजिश रची है। 

ओबामा दौरे से बौखलाए आतंकी
तबाही की फिराक में तालिबान
खुफिया एजेंसियों ने आगाह किया है कि आतंकी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे के वक्त ..किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। हाफिज़ सईद की धमकी के बाद..ये मामला और भी संवेदन शील हो गया है। आतंकियों में इस बात की बौखलाहट है कि ओबामा के भारत दौरे से... भारत को कई फायदे होंगे..लिहाजा वो रंग में भंग डालने की पूरी फिराक में है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक ओबामा भारत दौरे में... दिल्ली-आगरा हाईवे रूट से आगरा जा सकते हैं। इस दौरान पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद दावा साथ मिलकर..... दिल्ली-आगरा हाईवे पर हमला कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि जमात-उद-दावा का चीफ हाफिज सईद इस दौरान राजधानी दिल्ली के दो होटलों पर भी हमला करवा सकता है। हाफिज इस दौरान दिल्ली के इन होटलों की लॉबी पर हमले की योजना बना रहा है।

गौरतलब है कि बराक ओबामा 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इस दौरान उनके आगरा जाने और वहां ताज महल का दीदार करने का भी कार्यक्रम है। हालांकि फिलहाल इसकी तारीख तय नहीं है। लेकिन ये माना जा रहा है कि सड़क मार्ग से वो आगरा जा सकते हैं। लिहाजा दिल्ली-आगरा एक्सप्रेस-वे पर आतंकी बाज नज़र गढ़ाए बैठे हैं।
हाल ही में राजस्थान में गिरफ्तार किए गए इंडियन मुजाहिद्दीन के दो आतंकियों ने पुलिसिया पूछताछ में इस बात का खुलासा भी किया है कि वो मार्च 2014  में आगर की रेकी कर चुके थे... इन्होंने दो दिन आगरा में ही बिताए..और ताज महल समेत कुछ मुख्य जगहों की वीडियो यू-ट्यूब के जरिए अपने साथियों तक पहुंचाई। ऐसे में ये बात साफ हो चुकी है कि दहशतगर्द आगरा के चप्पे-चप्पे से वाकिफ़ हैं.. बस अब उनका टारगेट आतंकी हमले का अंजाम तक पहुंचाने का है।
कहां-कहां हमले की योजना ?
सुरक्षा एजेंसियां हुईं सतर्क
गृह मंत्रालय के निर्देश
रेलवे, स्कूल और सार्वजनिक परिवहनों की सुरक्षा बढ़ाई जाए
संवेदनशील स्थानों पर मॉक ड्रिल भी आयोजित कराई जाए
राज्य और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां अपने सभी संसाधन सक्रिय करें
अगले साल जनवरी के अंत तक ज्यादा चौकन्ना रहने के निर्देश

देश की राजधानी समेत कई बड़े शहर, स्कूल, होटल, बाजार और हाईवे आतंकियों के टारगेट पर हैं। और इसका वक्त रहते पता भी लग चुका है... खुफिया एजेंसियों ने कई कॉल इंटरसेप्ट की हैं... जिससे उन्हें इनमें भारत पर आतंकी हमले की जानकारी मिली है। सवाल ये है कि इस खतरे से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां कितनी तैयार हैं।
भारत पर मंडरा रहा
आतंकवाद का खतरा

GTI और NBDC की रिपोर्ट
आंकड़ों ने उड़ाए होश

आतंकवाद से प्रभावित देशों में ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स यानी जीटीआई ने चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं...इन आंकड़ों में भारत को आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित...दुनिया का छठवां देश बताया गया है। इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नाइजीरिया और सीरिया के बाद...इस फेहरिस्त में छठा स्थान भारत का है। जबकि देश की एक सरकारी एजेंसी ... 'नेशनल बॉम्ब डाटा सेंटर'  यानी NBDC के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि... बम ब्लास्ट के मामले में भारत विश्व में तीसरा सबसे खतरनाक देश है 
NBDC का दावा है कि इराक और अफगानिस्तान के बाद भारत में... बम विस्फोट का सबसे ज्यादा खतरा है... इसके मुताबिक अफगानिस्तान से ज्यादा....आतंकवाद का खतरा भारत में रह रहे लोगों को है... NBDC के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2013 में भारत में 212 बम विस्फोट हुए, जबकि अफगानिस्तान में इसके आधे यानी सिर्फ 108 बम विस्फोट हुए.... आंतरिक परेशानी का सामना कर रहे बांग्लादेश में 75 विस्फोट हुए...वहीं साल भर में.. सीरिया में हुए... आतंकी धमाकों की संख्या..कुल 36 रही।

NBDC का दावा 
साल                बम धमाके
2013                                212
2012                                108
हालांकि 2013 में 2012 की तुलना में कम विस्फोट हुए.... 2012 में भारत में अलग-अलग जगहों पर 241 बम विस्फोट हुए.....इन धमाकों में कुल 113 लोगों की मौत हुईं... वहीं 419 लोग घायल हो गए....जबकि 2013 में....देशभर में 212 बम धमाकों को अंजाम दिया गया... इनमें मरने वालों की संख्या 130 थी....वहीं घायलों की संख्या 466 थी.....
GFX IN
आतंकवाद के ज़ख्म
साल        कुल धमाके        मौतें        घायल
2012                    241                        113                    419
2013                    212                        130                    466
GFX OUT

NBDC के मुताबिक भारत में 80 फीसदी IED ब्लास्ट होते हैं....देश में पिछले दशक में हुए IED ब्लास्ट पर अगर गौर करें...तो बेहद खौफनाक तस्वीर सामने आती है...जी हां आकंड़े गवाह हैं कि...2004 से 2013 के बीच भारत में...धमाकों में जान गंवाने वालों का औसत 298 रहा और घायलों की संख्या 1,337 रही। आपको बता दें कि आईईडी ब्लास्ट का मतलब इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस है... जो धमाके के दूसरे तरीकों से काफी ज्यादा विनाशकारी है। 

चौंकाने वाली बात तो ये है कि..भारत में आतंकी धमाकों में मरने वालों का आंकड़ा.... पिछले पांच साल के दौरान... अफगानिस्तान में 2010 में हुए सबसे ज्यादा 209 विस्फोटों से भी ज्यादा है...
NBDC की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान, इराक और भारत में कुल मिलाकर... विश्व के 75 फीसदी बम विस्फोट होते हैं... इस ऐजेंसी का मानना है कि विस्फोट में आम लोगों को निशाना बनने से बचाने में.. दूसरे देशों की तुलना में भारत ने ज्यादा काम किया है। आपको बता दें कि भारत के अलावा पूरी दुनिया में.... 69 फीसदी हमले सीधे जनता को निशाना बनाकर किये गए.... जबकि भारत में संख्या सिर्फ 58 फीसदी ही ऐसे हमलों को अंजाम दिया गया.... बाकी बम विस्फोटों में सुरक्षाबलों और सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया गया। 
आतंकियों ने पिछले कुछ दशकों में.. भारत को बड़ी चोट दी है...इन हमलों में जान और माल का भारी- भरकम नुकसान भी हुआ है... और एक बार फिर ये इंसानियत के दुश्मन....देश में खौफ बरपाने की तैयारी में हैं...लेकिन इस बार भारत भी इनका डंक कुचलने की पूरी तैयारी में है। मोदी सरकार आतंकवाद को लेकर बेहद गंभीर है,...और वो इन्हें नेस्तो नाबूत करने के लिए..किसी भी हद तक जाने को तैयार है...लिहाज़ा उन्हें भी याद रखना होगा कि भारत पर..ज़रा भी नज़र डेढी की..तो अंजाम बेहद बुरा होगा।

Tuesday, 16 December 2014

निर्भय नहीं निर्भया

दिल्ली की सड़कों पर जनसैलाब, हर तरफ आक्रोश, धरना प्रदर्शन..सरकार के खिलाफ नारेबाजी..। .ये सियासी भीड़ नहीं आम जनता की वो ताकत है जो एकजुट हुई इंसाफ दिलाने को..। इंसाफ... देश की उस निर्भया को जो लुंजपुंज व्यवस्था का शिकार बनी, जिसके सपनों को बड़ी बेरहमी से कुचल दिया कुछ दरिंदों ने। हम बात कर रहे हैं 16 दिसंबर की उस रात की जिसमें मेडिकल की एक छात्र का सब कुछ तबाह हो गया। जी हां...दिल्ली को शर्मसार करनेवाले निर्भया रेप कांड को दो साल का वक्त गुज़र चुका है। ..16 दिसंबर के दिन चलती बस में 6 वहशी दरिंदों ने निर्भया के साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया। उसकी अस्मत लूटी और उसे पीट पीट कर अधमरा कर सड़क पर मरने के लिए फेंक दिया। कई दिन तक निर्भया दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ती रही, उसे इलाज के लिए सिंगापुर भी ले जाया गया लेकिन आखिरकार वो जिंदगी की जंग हार गई। इस घटना ने आम आदमी को झकझोर के रख दिया। इसका असर दिल्ली ही नहीं पूरे देश में देखने को मिला। लोग इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर आए...। जनआक्रोश से दबाव में आई पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने में देर नहीं लगाई। कोर्ट में सनवाई के दौरान मुख्य आरोपी राम सिंह की जेल में संदिग्ध मौत हो गई। और नौ महीने की सुनवाई के बाद निर्भया के चारों बलात्कारियों को मौत की सजा सुनाई गई। पांचवें आरोपी के नाबालिग होने की वजह से उसे मात्र तीन साल की सजा हुई।


 निर्भया अपनी मां से ये कह कर घर से निकली थी कि वो तीन-चार घंटों में वापस आ जाएगी.... लेकिन उसे क्या पता था कि तीन घंटे का ये इंतजार कभी खत्म नहीं होगा। निर्भया का परिवार आज भी उस हादसे को भूल नहीं पाया है। उसके पिता कहते हैं कि निर्भया आज भी उन सबके बीच जिंदा है। आंसुओं से बोझिल निर्भया के पिता की आंखों को अभी तक बेटी के घर लौटने का इंतजार है...जबकि वो जानते हैं कि अब निर्भया कभी उनके बीच नहीं आएगी...वहीं निर्भया का दोस्त आज तक उस खौफनाक वारदात को भुला नहीं पाया है...जब उसकी आंखों के सामने निर्भया के जिस्म की धज्जियां उड़ाईं गई थीं...इस घिनौनी वारदात ने निर्भया से जुड़े एक-एक शख्स को इतने गहरे जख्म दिए हैं...जिनके दर्द का अंदाजा लगा पाना भी मुमकिन नहीं।

16 दिसंबर 2012.... एक साल पहले इसी दिन दिल्ली में दरिंदगी की सबसे खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया था.... दिल्ली की सड़कों पर चलती बस में एक छात्रा के साथ 6 दरिंदों ने गैंगरेप किया...और सर्दी की ठिठुरती रात में..उसे अधमरी हालत में सड़क किनारे फेंक दिया...गैंगरेप की इस घिनौनी वारदात ने पूरे देश को जगाया...दरिंदों की हैवानियत का शिकार हुई निर्भया ने लंबी जद्दोजहद के बाद दम तोड़ दिया... और अपने पीछे वो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल छोड़ गई...सबसे बड़ा और अहम सवाल ये है... कि महिलाओं के लिए आखिर कितनी सुरक्षित है राजधानी दिल्ली ?

 दिल्ली में बढ़ते अपराध की हद !

 टूटा 13 सालों का रिकॉर्ड
 
 निर्भया के साथ हुए गैंगरेप मामले के बाद... सरकार की तरफ से दिल्ली के हालात बदलने के भरपूर दावे किए गए... लेकिन इस दावों में कितना दम है... ये आज हम दिखाएंगे आपको...नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानि NCRB के आंकड़ों की मानें..तो गैंगरेप की वारदात के बाद... दिल्ली के क्राइम रेट में इजाफा हुआ है... बलात्कार, महिला उत्पीड़न और छेड़छाड़ से जुड़े मामलों में भी बढ़ोतरी देखते को मिली...आंकड़े बयां करते हैं कि पिछले 13 सालों में.... 2013 में बलात्कार के सबसे ज्यादा केस सामने आए....

 NCRB के आंकड़ों के मुताबिक साल 2012 में बलात्कार के 706 मामले सामने आए हैं... जबकि साल 2011 में ये गिनती 572 थी..और साल 2010 में रेप के 507 मामले दर्ज किए गए थे... मतलब साफ है कि साल-दर-साल महिलाओं के प्रति अपराध में बढ़ोतरी हो रही है.... (इस लाइन के ग्राफिक्स नीचे हैं)


 क्या कहते हैं NCRB के आंकड़े ?

 साल 2012 बलात्कार के 706 मामले दर्ज

 साल 2011 बलात्कार के 572 मामले दर्ज

 साल 2010 बलात्कार के 507 मामले दर्ज

 अगर बात की जाए दिल्ली पुलिस के आंकड़ों की...तो दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक... राष्ट्रीय राजधानी में 2013 में बलात्कार के कुल 1,493 मामले दर्ज किए गए... जो कि 2012 में दर्ज हुए मामलों की तुलना में... दोगुने से भी ज्यादा हैं...जी हां ये सच्चाई है...और इस सच्चाई को बयां करने वाली भी खुद दिल्ली पुलिस है....सबसे बड़ी हैरत वाली बात ये है कि महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न के मामलों में पांच गुना बढोतरी दर्ज की गई है...2013 में पिछले साल के 625 मामलों की तुलना में 3237 मामले दर्ज किए गए...महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ के मामलों में भी इजाफा हुआ है...पिछले साल के 165 मामलों की तुलना में इस साल 852 मामले दर्ज किए गए....आंकड़े ये भी कहते हैं...कि यहां 10 में से केवल एक महिला काम के लिए बाहर जाती है....

 क्या कहता है दिल्ली पुलिस का क्राइम चार्ट ?

 30 नवंबर 2013 तक दिल्ली में बलात्कार के 1,493 मामले दर्ज।

 एक साल में पांच गुना तक बढ़े महिला उत्पीड़न के मामले।

 साल 2012 में महिला उत्पीड़न के 625 मामले

 साल 2013 में महिला उत्पीड़न के 3,237 मामले

 साल 2012 में महिला छेड़छाड़ के 165 मामले

 साल 2013 में महिला छेड़छाड़ से जुड़े 852 मामले

दिल्ली पुलिस महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कितनी सजग और सतर्क है...इसकी बानगी बयां कर रहे हैं ये आंकड़े... बेशक पुलिस अपराध को काबू करने में नाकाम साबित हो रही हो... लेकिन अपने दामन पर लगे दाग को धोने में दिल्ली पुलिस को महारथ हासिल है...पुलिस का दावा है कि ये आंकड़े इसलिए बढ़ रहे हैं... क्योंकि लोग अब जागरुक हो गए हैं और मामले दर्ज कराने लगे हैं, जबकि पहले ऐसे मामले दर्ज ही नहीं कराए जाते थे।
  दिल्ली पुलिस का ये भी दावा है कि गैंगरेप की वारदात से सबक लेकर...उसने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए...मसलन थानों में महिला सुरक्षा डेस्क बनाई गई....ताकि महिलाएं राजधानी में कहीं भी मामला दर्ज करा सकें....यही नहीं क्राइम अगेंन्स्ट विमेन शाखा का गठन किया गया... इसके अलावा महिलाओं के लिए चार हेल्पलाइन नंबर चलाए गए...रात के वक्त शहर में गश्त बढा दी गई...
 लेकिन ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि.... इस सबके बावजूद दिल्ली पुलिस यहां के अपराधियों पर लगाम क्यों नहीं लगा पाई...इतनी बड़ी वारदात के बाद भी आखिर क्यों राजधानी की महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं... क्यों बेखौफ अपराधी महिलाओं पर जुल्म ढहाते हैं...और क्यों शाम ढलते ही लड़कियों को दिल्ली में डर सताने लगता है... आखिर क्यों महिलाओं से जुड़े आपराधिक मामले कम होने का नाम नहीं लेते। 
निर्भया ने क्या कुछ बदला ?

क्या कुछ बदलना है बाकी ?

दिल्ली में हुए गैंगरेप के बाद कानून व्यवस्था में कई बदलाव किए गए...जबकि कई अभी भी होने बाकी हैं... इसे कड़े कानून का असर कहिए या कुछ और...कि अब महिलाओं में अपने ऊपर होने वाले जुल्म-ओ-सितम के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत बढ़ी है।

सख्त हुआ कानून

निर्भया की मौत के बाद कानून में कई परिवर्तन किए गए हैं...अब ना सिर्फ बलात्कार करने वालों को कड़ी सजा सुनाई जाएगी..बल्कि छेड़छाड़, फब्तियां कसने वाले औऱ घूरने जैसे अपरपाधों को भी इसी श्रेणी में शामिल किया गया है... धाया 376 के तहत ... सिर्फ पीड़िता के बयानों के आधार पर ही मुकदमा दर्ज कराने की व्यवस्था की गई।

पोस्को एक्ट का गठन

16 दिसंबर की वारदात के बाद नाबालिग बच्चों का यौन उत्पीड़न करने वालों पर भी सख्त कानून बनाए गए.. पोस्को एक्ट के तहत ऐसे आरोपी के खिलाफ गैर जमानती धाराएं लगाई जाती हैं..और साथ ही दोषी के खिलाफ सख्त सज़ा के प्रावधान हैं।

फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन

गैंगरेप मामले की जल्द सुनवाई के लिए 20 जनवरी 2013 को फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया... ऐसे मामलों को निपटाने के लिए 5 और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे।

181 पर शिकायतें बढ़ी

दिल्ली गैंगरेप के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए 181 नंबर की हेल्पलाइन सेवा शुरू की गई थी...यकीन करना मुश्किल है लेकिन ये सच्चाई है कि पिछले कुछ महीनों में इस नंबर पर 10 लाख कॉल्स आ चुकी हैं...और हर रोज़ तकरीबन 2000 कॉल आती हैं। जबकि रोजाना 500 सौ से ज्यादा मिस्ड कॉल भी दर्ज की जाती हैं।

मुआवजे की रकम में इजाफा
दो साल पहले बलात्कार की महज़ 03 पीड़िताओं को मुआवजा दिया गया था..जबकि पिछले साल 160 रेप विक्टिम्स को मुआवजा दिया जा चुका है। दो साल पहले मुआवजा देने में जहां सिर्फ 4 लाख रुपये खर्च हुए थे... वहीं पिछले साल मुआवजे की राशि 62 लाख हो गई।
निर्भया ने क्या कुछ बदला ?  
क्या कुछ बदलना है बाकी ?


कई जगह बदलाव की दरकार 

नहीं शुरू हुआ निर्भया फंड

साल 2013-14 के बजट में निर्भया फंड बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ था...इसमें 1000 करोड़ के सरकारी खर्च से निर्भया निधि बनाए जाने का भी प्रस्ताव था..लेकिन कश्मकश देखिए कि ये आज तक लागू नहीं हो सका।

नहीं मिलती आर्थिक सहायता

केन्द्र सरकार ने महिलाओं के लिए 97 हजार करोड़ रुपये जारी किए थे...इसमें कई योजनाओं के तहत महिलाओं को उस राशि का लाभ मिलना था..लेकिन अभी तक किसी भी महिला को इसका फायदा नहीं मिल पाया है।


महिला सशक्तीकरण की बैठक नहीं

साल 2010 में महिला सशक्तीकरण समिति का गठन किया गया... इसके तहत हर जिले में महिला बाल विकास के तहत समिति गठित की जानी थी... लेकिन ये योजना शुरू होने से पहले ही ठंडे बस्ते में चली गई।

महिला सुरक्षा में सरकार विफल
दिल्ली गैंगरेप के बाद सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक कमेटी का गठन किया था...जस्टिस ऊषा मेहरा को उस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था... जस्टिस मेहरा ने महिला सुरक्षा को लेकर की जा रही कोशिशों को नकार दिया है...जस्टिस मेहरा खुद इस बात को मानती है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा करने में पूरी तरह नाकाम रही है।

निर्भया मामले में कब क्या-क्या हुआ ? 

तारीख- 16 दिसंबर 2012

दिल्ली के वसंत विहार इलाके में मेडिकल की छात्रा के साथ 6 दरिदों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। जिसके बाद अधमरी हालत में पीड़िता को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।

17 दिसंबर 2012

इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले चार आरोपियों की पुलिस ने शिनाख्त की।

18 दिसंबर 2012

राम सिंह और अन्य तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

20 दिसंबर 2012

पीड़िता के दोस्त के बयान दर्ज किए गए।

21 दिसंबर 2012

दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे से जुवेनाइल आरोपी गिरफ्तार

22 दिसंबर 2012

मामले के पांचवें आरोपी अक्षय ठाकुर को बिहार के औरंगाबाद से गिरफ्तार किया गया। पीड़िता ने एसडीएम के सामने बयान दर्ज कराए

23 दिसंबर 2012

दिल्ली की बिगड़ी कानून व्यवस्था पर जनआक्रोश का आगाज हुआ, पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए लोग सड़कों पर उतरे।

26 दिसंबर 2012

पीड़िता की बिगड़ती हालत को देखते हुए सरकार ने उसे इलाज के लिए सिंगापुर भेजा।

29 दिसंबर 2012

रात के 2.15 पर निर्भया ने दुनिया को अलविदा कह दिया और इसी के साथ ही पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया।

2 जनवरी 2013

निर्भया मामले की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया।

17 जनवरी 2013

पांचों आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई शुरू की गई।

28 जनवरी 2013

गैंगरेप के एक आरोपी को अदालत में नाबालिग साबित किया गया।

11 मार्च 2013

दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद आरोपी राम सिंह की संदिग्ध हालत में मौत।

22 अगस्त 2013

नाबालिग अपराधी को सज़ा सुनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट को निर्देश जारी किए।

31 अगस्त 2013

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग को तीन साल कैद की सज़ा सुनाई।

10 सितंबर 2013

अदालत ने गैंगरेप के चारों आरोपियों को दोषी करार दिया।

13 सितंबर 2013

दिल्ली की साकेत कोर्ट में चारों अपराधियों के खिलाफ सज़ा-ए-मौत का ऐलान किया गया।

13 मार्च 2014
दिल्ली हाई कोर्ट ने चारों दोषियों की सज़ा को बरकरार रखा।
15 मार्च 2014
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी मुकेश और पवन की फांसी पर रोक लगाई।
14 जुलाई 2014
सुप्रीम कोर्ट ने अन्य दोनों दोषियों विनय और अक्षय की फांसी पर भी रोक लगा दी


Monday, 15 December 2014

सर्दी का सितम

उत्तर भारत में ठंड ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। पहाड़ों पर बर्फबारी तो मैदानी इलाकों में बारिश ने... मौसम को बदल कर रख दिया है। मौसम के मिजाज के बदलने से ठंड ने अपने तेवर दिखाने भी शुरू कर दिए हैं....लेकिन ये सर्दी जहां कुछ लोगों के लिए राहत लेकर आई है...तो वहीं कुछ के लिए ये आफत का सबब बनी हुई है। बारिश, ओले और बर्फबारी ने कई जगह पिछले रिकॉर्ड भी तोड़ दिए हैं... मौसम की इस बेइमानी की क्या वजह है। सर्दी से किसकी जिंदगी गुलजार हुई...और किसपर ठंड ने कहर बरपाया।

पहाड़ों पर हुई बर्फबारी से मैदानों में सर्दी कहर बरपाने लगी है। पिछले दिनों उत्तरी भारत में रिमझिन फुहारों और शीत लहर  ने मौसम को इतना सर्द बना दिया कि दिन में भी लोगों की कपकपी छूटती रही... रात के वक्त तो सर्दी के तेवर इतने तीखे हो गए कि लोगों को घरों में दुबकने को मजबूर होना पड़ा।
इस साल अक्टूबर के आखिर में गुलाबी ठंड ने मैदानी इलाकों में दस्तक दी...लेकिन नवंबर आखिर तक सर्दी का असर फीका रहा। दिसंबर में भी ग्लोबल वार्मिंग का असर देखने को मिला। लेकिन एक ही दिन में मौसम ने ऐसी करवट बदली...कि सर्दी के आगे लोग बेसहारा नज़र आए। सर्दी के तेवर दिन ब दिन तीखे होने से अब तो हालात असहनीय होते जा रहे है । इस बीच देश के उत्तरी हलकों में हुई बर्फबारी और बारिश ने अंचल की फिजां ही बदल दी।



दिल्ली एनसीआर में रविवार सुबह कोहरा छाया रहा। दिनभर सर्द हवाएं चली। कंपकंपा देने वाली सर्द हवाओं से लोग दिनभर ठिठुरते नजर आए। हवा के चलते सर्दी के तेवर तीखे रहे। इससे बचने के लिए लोग दिनभर अलाव तापते नजर आए। दोपहर बाद कुछ देर के लिए हल्की धूप निकली। लेकिन रिमझिम फुहारों से मौसम की फिज़ा नहीं बदली। सर्दी का ऐसा असर दिखा कि सड़कें सुनसान और बाजार वीरान नज़र आए। जो लोग घरों से बाहर निकले भी वो अलाव तापते नज़र आए। कब दिन निकला और कब दोपहर हुई..पता ही नहीं लगा। शाम ढलने के बाद लोगों के घर लौटने से रात नौ बजे तक बाजारों में सन्नाटा पसरा नजर आया। इधर सर्दी के तेवर तीखे होने से... पारे में भी भारी गिरावट आई है। अधिकतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से करीब दो डिग्री कम रहा। न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से करीब चार डिग्री अधिक था। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के असर से दिल्ली एनसीआर समेत उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों में कहीं कहीं पर बारिश हुई है।..जिससे ठंड ठिठुरन में बदल रही है। मौसम वैज्ञानिकों ने सर्दी का सितम दो तीन दिनों में ओर बढने की संभावना जताई है।
हिमाचल और उत्तराखंड में सीज़न की पहली बर्फबारी ने कहर ढाह दिया है..आलम ये ही कि कई इलाकों में पारा शून्य से नीचे पुहंच गया है...जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है...लोग बेहाल हैं...हिमाचल के पहाड़ों पर जमकर बर्फबारी हो रही है..शिमला और रोहतांग में बर्फबारी से मौसम खुशगवार तो हुआ है...पर्यटकों के चहरों पर खुशी की लहर भी दौड़ आई है...लेकिन रोहतांग में ये परेशानी का सबब भी बनती दिख रही है... रोहतांग में जमकर हिमपात हुआ है जिसकी वजह से वहां करीब 400 पर्यटक फंस गए। .सड़कों पर बर्फ की मोटी परत जम चुकी हैं..लोग अपनी गाड़ियां छोड़ पैदल ही चलने को मजबूर हैं... हालांकि प्रशासन ने बर्फ हटाने की कोशिशे तेज कर दी है..इसके अलावा, नारकंडा, कुफरी, किन्नौर, लाहुल स्पीति, कुल्लू, चंबा, शिमला में बर्फबारी से लोग बेहाल है...इन इलाकों का राज्य के अन्य हिस्सों से संपर्क टूट गया है...पाटलीकुल के नजदीक चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग 21 पर वाहनों की आवाजाही बंद है....किन्नौर में हाईअलर्ट के साथ प्रशासन ने राहत अभियान शुरू कर दिया है...वहीं कुल्लू -मनाली में कुदरत की सफेद आफत में 500 सैलानी फंसे हुए हैं..सैलानियों में बड़ी तादात में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं...हिमाचल के अलावा उत्ताराखंड में भी हैं खूब हिपात हुआ है...चारों धामों पर जमकर बर्फबारी हुई है...बर्फ ने जमीन पर सफेद चादर बिछा दी है.....हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ों पर बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों पर साफ दिख रहा.... दिल्ली में सर्द हवाओं के साथ बारिश ने सर्दी के सितम को और बढ़ा दिया है.... दिल्ली समेत एनसीआर में रविवार को तेज बारिश हुई...जिसके बाद दिल्ली ठंड से कांप उठी...उधर उत्तर प्रदेश भी ठंड और कोहरे की चपेट में है... लखनऊ और आसपास के इलाकों में बूंदाबांदी हुई...जिसके बाद प्रशासन सतर्क हो गया है....

एकर तरफ उत्तर भारत में बारिश के बाद कड़ाके की ठंड से लोग ठिठुर रहें हैं तो वहीं हरियाणा में किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है...ठंड से किसानों को आशा की किरण दिखाई दी है..फतेहाबाद में किसानों ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि पहली ठंड से गेहूं और चने की फसल को काफी फायदा होगा...

जाहिर है लंबे समय तक गर्मी की मार झेल रहे दिल्ली वालों को अब जाकर ठंड का एहसास हुआ है। लेकिन हिमाचल, जम्मूकश्मीर और उत्तराखंड के कई इलाकों में जिस तर शुरूआत में ही बर्फबारी आफत बन गई है उससे चिंता भी बढ़ गई है। मौसम विभाग की मानें तो अगले 48 घंटें दिल्ली औऱ आसपास के इलाकों में यूं ही बादल छाएं रहेंगे...और हल्की बूंदा बांदी होती रहेगी...फिलहाल सर्दी का सितम अभी यूं ही जारी रहेगा।.

क्या हैं स्वच्छ भारत की कल्पना



स्वतन्त्रता के 67 वर्ष पूरे हो गए हैं भारत विकासशील देश से विकसित देश की ओर तेजी से बढ़ रहा है। भारत गांवों का देश रहा है पर आज के सूचना और संचार युग में भारत का पिछड़ा गांव भी ग्लोबल विलेज में बदल गया है। एक क्लिक पर भारत विश्व के किसी भी कोने से जुड़ जाता है। भारत हर तरफ आगे बढ़ रहा है। बाजारवाद में भारत ने खुद को स्थापित कर लिया है पर भारत आज भी एक बड़ी चीज से निजात नहीं पा सका है जिसे गंदगी कहें, कचरा या प्रदूषण। भारत के जिस भी हिस्से में हम देखें हमें गंदगी का अम्बार दिखाई देता है। भारत में हर चीज के लिए बड़े-बड़े आंदोलन व धरने देखने को मिलते रहे हैं पर गंदगी को हमने छोटा समझा। इसके लिए छोटे-छोटे स्तर पर प्रदूषण के खिलाफ तो आवाज उठी पर समग्र रूप में गंदगी को दूर करने का प्रयास नहीं हुआ था। महात्मा गांधी जिन्हें आदर्श माना जाता है वो गंदगी के खिलाफ थे वो स्वयं सफाई अभियान करते थे पर उनकी सोच भी सम्पूर्णता नहीं पा सकी क्योंकि वो अपने आश्रम व घर को तो साफ करते थे। उन्होंने भारत को अंग्रेजों से तो मुक्त करा दिया पर गंदगी से वो भी भारत को मुक्त नहीं करा पाए न ही गंदगी को राष्ट्रव्यापी आंदोलन बना सकें।

 2014 में भारत में एक युग का परिवर्तन होता है और राजनीतिक शिखर पर एक बड़ा नाम नरेन्द्र मोदी के रूप उभरा और उन्होंने कांग्रेस को परास्त कर भाजपा के नेतृत्व में बहुमत की सरकार बनाई और प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने सरदार पटेल, महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, दीनदयाल उपाध्याय जैसे आदर्शों को सामने रख कर कार्य करने का निर्णय लिया और 15 अगस्त को लाल किले से उन्होंने सबसे बड़ा संदेश जो दिया उससे पूरे देश में शौचालय बनाने पर बल दिया और महिलाओं व बच्चियों के लिए अलग से शौचालय निर्माण की बात की साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्श को सामने रख कर भारत को गंदगी मुक्त करने का अभियान शुरू करने की बात की और 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत अभियान का शुभारम्भ कर दिया जिसमें उन्होंने 2019 तक कचरा मुक्त भारत बनाने का संदेश दिया। इस कार्य को बड़ा रूप देने के लिए उन्होंने सचिन तेन्दुलकर, अनिल अम्बानी, सलमान खान, शशि थरूर सरीखे 9 लोगों को चयनित कर ऐसे ही 9 का दल बनाने की बात की और उन्होंने स्वयं वाल्मिकी आश्रम में झाडू़ लगाकर अभियान शुरू किया और देखते-देखते उनके सभी मंत्री, केन्द्रीय कर्मचारी, सब लोग इस अभियान से जुड़ गये। झाड़ू चुनाव चिन्ह वाले आप पार्टी के प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने भी सफाई अभियान में भागीदारी की। हम सभी लोगों ने भी झाडू़ लगाकर एवं गंदगी हटा कर सफाई अभियान में अपना योगदान दिया।

हमें स्वच्छ भारत बनाना है पर हम सिर्फ झाड़ू लगाकर भारत को स्वच्छ नहीं बना सकेंगे। हमें अपनी सोच बदलनी होगी, हमें ऐसा माहौल बनाना होगा कि सड़क पर कचरा ही न फैले। हमें झाड़ू लगाने की नौबत ही न पड़े इसके लिए हमें नैतिक बल तो दिखाना होगा साथ ही हमें इसके लिए दण्डात्मक व्यवस्था भी लगानी होगी क्योंकि जब हम भारत में मेट्रो स्टेशन पर थूकने पर 200 रुपए के जुर्माने का बोर्ड पढ़ते है तो हम थूक आने पर भी अपनी थूक गटक जाते हैं । हम सिंगापुर एवं अन्य देशों का उदाहरण देखते हैं कि वहां पर गंदगी फैलाने पर कितना जुर्माना लगता है। यानी कुल मिलाकर हमें भारत को स्वच्छ बनाना है पर यह गंदगी व प्रदूषण झाडू़ से नहीं, स्वयं की सोच सफाई के लिए बना कर प्रयास करना होगा। आइए हम देखे कि कैसे होगा हमारा भारत स्वच्छ?

1. हमें सबसे पहले जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जल और वायु को सबसे पहले स्वच्छ बनाना होगा। हम जैसे एक्वागार्ड लगाकर घर में पानी साफ कर लेते हैं वैसा ही प्रयास हमें सार्वजनिक पानी के स्रोतों की स्वच्छता पर देना होगा - हमें नदियो- गंगा, यमुना एवं अन्य जल को प्रदूषण मुक्त बनाना होगा इसके लिए पहला सार्थक प्रयास यह होगा कि हम स्वयं कचरा न डालें। पूजन सामग्री, घर की मूर्तियां या प्लास्टर ऑफ पेरिस व केमिकल युक्त दुर्गा, गणेश प्रतिमा नदियों में विसर्जित न करें। वहीं बड़े स्तर पर उद्योगों का अपशिष्ट, सीवर का गंदा पानी, नदियों में जाने से रोकें। एसटीपी व ईटीपी व्यवस्था को बेहतर कर पानी को शोधित कर उसे सिंचाई में प्रयुक्त करें।

2. हमें वायु प्रदूषण रोकने के लिए सीएनजी व एलपीजी गैसों व इलेक्ट्रॉनिक बैटरी चालित वाहनों का प्रयोग करना होगा। साथ ही, वाहनों में प्रदूषण की नियमित जांच करानी होगी। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर रोक लगे, फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं की भी हमें समुचित व्यवस्था करनी होगी। हमें अम्लीय वर्षा रोकने का प्रयास करना होगा, ग्रीन हाउस गैसों को नियंत्रित करना होगा। एसी, फ्रिज से निकलने वाली ओजोन गैस पर नियंत्रण लगाना होगा जिससे ओजोन छिद्र को कम किया जा सके। शवों को खुले में जलाने से वातावरण में फैलने वाले प्रदूषण को हमें विद्युत शवदाह ग्रह के माध्यम से कम करना होगा। धार्मिक रीति-रिवाज के अनुरूप गंगा-यमुना में मृत पशुओं व बच्चों के शवों को नही बहाना से होगा।

3. खुले में शौच करने वाली व्यवस्था को रोकना होगा। नदी तटों को तो इससे पूरी तरह मुक्त करना होगा। शौच से फैलने वाली गंदगी व प्रदूषण पर नियंत्रण लगाना स्वच्छ भारत का पहला कदम होगा। सुलभ इंटरनेशनल द्वारा शौचालय के लिए जैसा प्रयास हुआ है वैसा ही प्रयास पूरे भारत में किया जाए। सरकारी व निजी शौचालय न केवल बने वरन् उनका समुचित प्रयोग हो सके इसके लिए प्रचार-प्रसार माध्यम से लोगों को जागरूक करना होगा। इससे महिला सुरक्षा व स्वास्थ्य दोनों ही सुरक्षित हो सकेगा। साथ ही उ0 प्र0 के कुशीनगर की प्रियंका को अपने ससुराल से शौचालय के अभाव में वापस न लौटना पड़े।

4. भारत में कृषि कार्य में प्रयुक्त मृदा में रासायनिक खाद व कीटनाशक का अत्यधिक प्रयोग मृदा की उर्वरता को प्रभावित करता है, भूमि को बंजर बनाता है, वहीं भूमिगत जल को भी प्रभावित करता है। नदी तट के गांवों में रसायन का प्रयोग नदियों के जल को प्रभावित करता है। हमें रासायनिक खेती की जगह जैविक एवं प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देना हेागा यह स्वच्छ भारत का एक और बड़ा कदम होगा।

5. स्वच्छ भारत अभियान के लिए जो एक और अनिवार्य व बड़ा कदम है वह है, ठोस अपशिष्ट का निपटान करना। जिसमें हम सबसे बड़े रूप में प्लास्टिक व पॉलिथीन को ले सकते है। आज पॉलिथीन संस्कृति की सस्ती सुविधा ने मनुष्य को सिर से पांव तक पॉलिथीन में कैद कर लिया है। खाने-पीने का समान हो- दूध, दही, चाय, घी, सब्जी, आटा, चावल, दाल सब इसमें ही पैक है। इसने झोला संस्कृति को नष्ट कर दिया है लोग पॉलिथीन का प्रयोग कर इसे नालियों में फेंक देते हैं जो नालियों को जाम कर देता है जिससे बारिश में मुहल्लों में पानी भर जाता हैं वही ये बहकर गंगा यमुना एवं अन्य नदियों को प्रदूषित कर इनके तटों को गंदा करते हैं और नदियों के प्रवाह को भी प्रभावित करते हैं। पॉलिथीन भूमिगत जल स्रोत को भी प्रभावित करता है। और जिस सफाई की बात आज हो रही है उस गंदगी का 80 प्रतिशत पॉलिथीन की वजह से ही है क्योंकि बाकी गंदगी तो बायोडिग्रेडेबल है एंव नष्ट भी हो जाती है पर पॉलिथीन कचरा नॉन-बायोडिग्रेडेबल है जिसके कारण वह 100 साल में भी नष्ट नहीं होता और चारों तरफ फैला रहता है। नगर निगम जैसी सरकारी संस्था उसका सही से निपटान भी नहीं कर पाता है। स्वच्छ भरत के मार्ग का पॉलिथीन कचरा सबसे बड़ा रोड़ा है।

6.- ई-वेस्ट - आज के इस दौर में गंदगी का एक बड़ा प्रारूप ई-वेस्ट से फैलने वाला कचरा भी है क्योंकि भारत में मोबाइल, कम्प्यूटर आदि का कचरा दूर तक फैला रहता है इसका उचित निपटान नहीं हो पाता है। कार्बन क्रेडिट की बात होती है पर यह लाभ कार्बन उत्पन्न करने वाली कम्पनियों को ही कार्बन क्रेडिट के रूप में मिलता है। भारत में हम अभी भी इसे हटा नहीं पाए हैं यह स्वच्छ भारत की एक बड़ी बाधा है।

7. गंदगी को दूर करने कई प्रारूप हम देख रहे हैं उनमें ही हम ध्वनि प्रदूषण व शोर को भी देखते हैं जो कान फोडू साउण्ड, डी0जे0, बैण्ड प्रेशर, हार्न व पटाखों के शोर से होता है। आज इस गंदगी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। पार्टियों में शोर की वजह से लोग बात भी नहीं कर पातें है। श्रवण शक्ति के कई गुना अधिक डेसिबल का प्रयोग होता है। हम इसे कम नहीं कर पा रहे जो गंदगी के रूप में हमे प्रभावित करता है। इसके शोर से हमें नियंत्रण पाना होगा नहीं तो मानसिक अवसाद व चिढ़चिढ़ेपन से हम परेशान होते रहेंगे।

शोर का एक बड़ा प्रारूप हमें पटाखों से देखने को मिलता है जो शादी विवाह मे देर रात्रि तक बजता है। वहीं दीपावली जैसे पर्व पर तो प्रतिबन्धित पटाखे अरबों रूपये के बजाए जाते है जिसका स्वरूप बडी गंदगी के रूप में दीपावली की अगली सुबह के रूप में हम देखते है जो वातावरण को प्रदूषित कर अम्लीय वर्षा का भी कारक बनता है। स्वच्छ भारत अगर बनाना है तो हमें आतिशबाजी बन्द कर उसे प्रतिबन्धित करना होगा।

8. शहर में पशुओं को खुले में छोड़ देते हैं जो मल-मूत्र, गंदगी आदि सड़क पर फैलाते हैं। नदियों में जाकर उसके पानी को प्रदूषित कर डालते हैं। सड़क पर घूमने वाले गाय, बैल, भैंस, सांड, कुत्तों से फैलने वाली गंदगी हमें हर हाल में रोकनी होगी। सुअर भी गंदगी फैलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं इन पर पाबंदी लगानी होगी। लावारिस पशुओं को पकड़ना होगा और यदि उसका मालिक है तो उस पर बड़ी पेनल्टी लगानी होगी।

9. स्लाटर हाउस से फैलने वाले रक्त व चमड़े के कचरे को फैलने से रोकना होगा। मांस का व्यवसाय खुले में न हो इसे भी रोकना होगा और अगर इससे गंदगी फैले तो हमें इसका व्यवसाय करने वालों को दण्डित करना होगा।

10. अब गंदगी फैलाने वाले सारे कारकों में सबसे बड़ा कारक जो हमें देखने में छोटा लगता है पर पूरे भारत विशेषकर उत्तर भारत को अपनी पूरी गिरफ्त में लिए है। जो थूकने की संस्कृति पिच-पिच करने में हम भारतीय अपनी शान समझते हैं। एक तो हम साधारण थूक को सड़क पर थूकते हैं वहीं दूसरी ओर रंगीन थूक से भी पूरे भारत के सार्वजनिक स्थलों, ऑफिस, बैंक आदि को थूक से रंगने में हम कहीं भी पीछे नहीं दिखते। इसका बड़ा कारण हम तम्बाकू, गुटका, खैनी व पान के रूप में खाकर थूकते हैं। पान खाने वाला या गुटका खाने वाला उसे घोंटता नहीं है उसे वह पीक बनाकर थूकता है कुछ लोग सभ्य बनकर उसे बेसिनों में कुछ बाथरूम में या कुछ डस्टबिन में थूकते हैं पर यहां-जहां थूकते है वो स्थान गंदा ही होता है। उत्तर भारत में बिहार, 0प्र0,, 0 प्र0, में तो हर 100 मीटर पर थूक पैदा करने वाली मशीन या गुमटी मिलती है ।

लोग पान खाते हैं, मुंह खोला व वहीं पिच मारी। लोग कार मोटर, रेल में चलते-चलते थूकते हैं जिससे सड़क तो गंदी होती है कभी-कभी लोगों पर भी यह थूक पड़ती है। लोगों के कपड़े गंदे हो जाते हैं। जब तक थूकने पर पेनल्टी व चालान नहीं लगेगा लोग नही मानेगें। बेचने वाले व खाने वाले दोनों को बराबर का दोषी मानकर सजा देनी होगी। नहीं तो हम कितना भी झाडू़ लगा ले कुछ नहीं होगा क्योंकि थूकने वालों की संख्या झाडू़ लगाने वालो से ज्यादा है।

 हमारे प्रधानमंत्री जी को आज कुछ करना है तो झाड़ू उठाने से पहले थूकने वालों के मुंह पर टेप लगाना होगा। आज बड़े शान से गुटका खाकर लोग गंगा में थूकते है पर उन पर कोई कार्यवाही नहीं होती। हमारे योग गुरू रामदेव कहते हैं कि सिंगापुर में च्‍यूइंग गम खाना भी जुर्म है पर भारत में तो खईके पान बनारस वाले मुम्बई तक फैले हैं। इसे रोकने के लिए सख्त कानून बनाना होगा। इसे राजस्व का साधन न मानकर पान, गुटका, सिगरेट, शराब सब पर सार्वजनिक रूप से ब्रिकी व खरीद पर साथ ही उपभोग पर रोक लगानी होगी।

स्वच्छ भारत निर्माण करना है तो पहली झाड़ू इन थूकने वाले अपराधियों पर चलाया जाए तो सड़क की गंदगी वैसे ही दूर हो जाएगी। हर चीज में आधुनिक बनने वाले प्रधानमंत्री अगर डिजिटल इण्डिया चाहते हैं तो पॉलिथीन, गुटका, सिगरेट, पान पर तत्काल पाबन्दी लगाएं और सड़क पर एवं गंगा में थूकने पर 500 रु0 का जुर्माना लगाएं और पकड़े जाने पर 6 माह की कठोर कारावास की सजा भी हो। हमें प्रधानमंत्री जी से एक निवेदन करना है कि जैसे स्वास्थ्य के लिए सीजीएचएस है वैसे ही केन्द्रीय सफाईकर्मी नियुक्त करने होंगे और सफाई व्यवस्था को नगर निगम को देने से बचना होगा क्योंकि नगर निगम तो राजनीतिक अखाड़ा है, पार्षद व मेयर तो राजनीति करते हैं। नगर आयुक्त एवं अन्य पर्यावरण इंजीनियर चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। बाकी भ्रष्टाचार अपना काम करता है। एक सक्षम सफाई की टीम बनानी होगी। एनजीओ को महत्व देना होगा, उनकी आईबी से जांच कराने की जगह उनके कार्यो की गुणवत्ता देख उन्हें मानदेय देखकर इस अभियान से जोड़ना होगा। अगर हमें थूकने वाले पर रोक लगानी है तो हर गली मुहल्ले में चालान करने वाले वॉलन्टियर्स बनाने होंगे। इस कार्य में सीनियर सिटिजन को जोड़ना होगा।

            हर शहर में फैलने वाले कचरे का डिस्पोज न केवल खाद बनाने में हों वरन उसे भविष्य के फ्यूल के रूप में भी बनाना होगा। इसकी शुरूआत जेपी ग्रुप ने पंजाब के चंडीगढ़ में किया है। उसे पूरे देश में, हर बड़े शहरों में लागू करना होगा जिससे शहर की सारी गंदगी नष्ट हो जाएगी और यह सस्ता ईंधन भी उपलब्ध कराएगा। सारे देश के म्यूनीसीपल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन को चंडीगढ़ शहर का उदाहरण लेना होगा जो भारत में स्वच्छता में नम्बर वन जिला है। हरियाली से भरा चारों तरफ सफाई दिखती है क्योंकि लोग यहां सफाई पर बल देते हैं जहां देखों वहीं दुकान खोलना या सड़क पर रेहड़ी नहीं लगती है।

हमें गंदगी हटानी है तो जलवायु परिवर्तन, जल, वायु, ध्वनि सभी प्रकार के प्रदूषण रोकने होंगे। हमें सक्षम एवं समग्र रूप से रोक लगानी होगी। हमें झाडू़ के साथ-साथ झाड़ू न लगाने पर भी बल देना होगा। यहां दण्ड के स्वरूप को मजबूत बनाना होगा। नहीं तो हम गांधी जी की 150वीं जयंती क्या 200वीं जयंती भी मना लें हम भारत को गंदगी में मुक्ति नहीं दिला पाएंगे। जैसे कि सर्वोच्च न्यायालय का गंगा के सन्दर्भ में कहना है कि यही प्रयास रहा तो गंगा 200 साल में भी प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकेगी। प्रधानमंत्री मोदी जी चाहे मेडिसिन स्केवअर, अमेरिका में जा कर गंगा की सफाई की बात करें या जापान जाकर गंगा को साफ करने का सहयोग मांगें हम गंगा को प्रदूषण मुक्त नहीं कर पाएंगें। हमें पहले गंदगी फैलाने वालों को रोकना होगा। चाहे जन-जागरूकता कितनी ही हो पर उसमें हमें दण्ड के स्वरूप को भी शामिल करना होगा। पॉलिथीन का प्रयोग करने वाले को पकड़ने वाले पर 500 रुपए का तत्काल जुर्माना लगे। पॉलिथीन को माइक्रॉन के जाल में न उलझाकर उसकी बिक्री पर रोक लगानी होगी। गुटका व तम्बाकू प्रतिबंधित करना होगा न कि पाउच पर सांप, बिच्छू का चित्र बना कर झूठा डर पैदा करने का दिखावा करना। इससे भरत स्वच्छ नही होगा।

हमें दोहरी नीति नहीं अपनानी होगी कि हम सड़क पर गुटका खाकर थूकें और हमारे स्कूल के बच्चे या नौकरी करने वाले या स्वयंसेवी संस्था के लोग गांधीवादी बन झाड़ू ले उसे साफ करते फिरें, यह उचित नहीं है। हम गंदगी न करने की कसम लेते हैं और लोगों से भी न करने को कहेंगे, न मानने पर पेनल्टी लेने की टोल-फ्री व्यवस्था होनी चाहिए। हां, चालान पुलिस के हाथों में न होकर इसे सीनियर सीटिजन या स्वंयसेवी संस्थाओं के हवाले किया जाए जिन्हें पुलिस प्रोटेक्शन मिलनी चाहिए। जो लोग पेनल्टी लेने वालों की बात न माने, इनकी शिकायत पर पुलिस द्वारा  कार्यवाही की जाए।


हमें प्रदूषण रोकने एवं सफाई कार्य को स्कूली स्तर पर लेना होगा ।बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा में इसे कोर्स में डाला जाए एवं प्रेक्टिकल मार्क्‍स में जोड़ा जाए। एनएसएस, एनसीसी एवं स्काउट में इसे लिया जाए। बच्चों व महिलाओं को बायो-डिग्रेडेबल व नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे के बारे में बताया जाए और दोनों कचरे को एकट्ठा करने के लिए अलग-अलग डस्टबिन घर से लेकर स्कूल, कॉलेज व सार्वजनिक स्थल पर रखे जाएं। उसका निपटान दो बार किया जाए एक बार सुबह व दूसरी बार शाम को। कानून का राज स्थापित हो। लोगों की सोच पर झाड़ू लगा कर उन्हें सफाईयुक्त यानी स्वच्छ भारत निर्माण कराने की ओर अग्रसर कर डिजिटल इण्डिया और मेक इन इण्डिया की अवधारणा को साकार करना होगा। हर घर हर स्कूल एवं हर गांव को शौचालय सुविधा देनी होगी। तभी हम प्रदूषण मुक्त स्वच्छभारत का निर्माण कर सकेंगे।