Friday, 29 August 2014

हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान पर मचा सियाशी घमाशान

कभी सोने का चिड़ियां कहा जाने वाला भारत देश आज राजनीतिक का शिकार हो गया हैं। मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मंत्री नजमा हेपतुल्लाह के उस बयान पर बवाल मच गया जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि हिन्दुस्तान में रहने वाले लोगों को हिन्दू कहा जाए तो इसमें दिक्कत क्या है। हालांकि नजमा अब अपने बयान से पलट गई है।



एक अखबार को दिए इंटरव्यू में नजमा ने कहा कि हिंदुस्तान में रहने वाले लोगों के लिए हिन्दू शब्द एक राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है और किसी को इतिहास नहीं भूलना चाहिए। नजमा ने ये तर्क दिया कि अरब देशों में भी भारत को अल हिंद कहा जाता है। नजमा ने यह बयान आरएसएस के सर संघ चालक मोहन भागवत के 17 अगस्त को दिए उस बयान की पृष्टिभूमि में दिया था जिसमें कहा गया था कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है और यहां रहने वाले सभी लोग हिन्दू हैं। भागवत ने कहा था कि राष्ट्र की पहचान हिंदुत्व से है। हिंदुस्तान में रहने वाले सभी लोगों हिन्दू है।

नजमा हेपतुल्ला ने नजमा ने अपनी टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने सभी भारतीयों को हिंदी कहा था जो कि भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला अरबी शब्द है। और जो उन्होंने कहा था वह धर्म के संबंध में नहीं था बल्कि राष्ट्रीयता के रूप में एक पहचान के संबंध में था। नजमा ने कहा कि उन्होंने उनको हिंदू नहीं कहा था।

सभी भारतीयों के लिए पहचान की समरूपता होने की जरूरत का संकेत देते हुए नजमा ने कहा कि वह नहीं समझती कि कोई ऐसा देश है जहां तीन विभिन्न भाषाओं में तीन नाम हों। उन्होंने कहा, अरबी में भारतीय हिंदी और हिंदुस्तानी कहे जाते हैं तथा फारसी और अंग्रेजी में इंडियन कहे जाते हैं।

नजमा की दलील है कि अरब देशों में भी भारत को अल हिंद कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने उनसे इंटरव्यू किया, उसने हिन्दी को हिन्दू समझ लिया होगा।

दूसरी तरफ कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, 'नजमाजी अगर भारत का संविधान पढ़ लें तो बेहतर रहेगा। भारतीय संविधान के हिसाब से हर नागरिक भारतीय है, हिंदू नहीं।'

राकांपा नेता तारीक अनवर ने नजमा की आलोचना करते हुए उनकी टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

नजमा पर कटाक्ष करते हुए तारिक अनवर ने कहा कि यदि उन्होंने ऐसा बयान दिया है तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। मुझे लगता है कि उन्होंने अपना मंत्री पद सुरक्षित रखने के लिए यह बयान दिया है। वह कहती हैं कि वह मौलाना आजाद के परिवार से हैं। ऐसा लगता है कि सत्ता में बने रहने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकती हैं।

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि उनके स्पष्टीकरण के बाद यह अध्याय समाप्त हो जाना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, ‘‘ मेरा मानना है कि नजमाजी की बात का मतलब भारत की सांस्कृतिक एकता से था और इन मामलों को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। विविधता में एकता देश के मूल्यों में हैं और हम सभी को इसमें विश्वास करना चाहिए।

गौरतलब है कि 11 अगस्त को सरसंघचालक मोहन बागवत ने कहा था कि जब जर्मन के लोगों को जर्मनी, रूस के लगों को रशियन कहा जाता है तो ‍हिन्दूस्तान के सभी लोगों को हिन्दू कहा जाना चाहिए। 

Thursday, 28 August 2014

खामोश सफ़र!!!!!!: सपने सुहाने जनधन के

खामोश सफ़र!!!!!!: सपने सुहाने जनधन के:  देश में शुरू हुई सबसे बड़ी योजना की खास कवरेज... जी हां हम बात कर रहे हैं... जमधन नाम से शुरू हुई....प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सबसे ...

सपने सुहाने जनधन के

 देश में शुरू हुई सबसे बड़ी योजना की खास कवरेज... जी हां हम बात कर रहे हैं... जमधन नाम से शुरू हुई....प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सबसे महत्वकांक्षी योजना की... जिससे सरकार को भारी उम्मीदें हैं... इतना ही हीं सरकार इस योजना को गरीबों और मजदूरों के हित में.... एक मील का पत्थर मानकर चल रही है.... मोदी सरकार को उम्मीद है कि ये योजना... यूपीए सरकार की मनरेगा से भी ज्यादा... सफल साबित होगी... और इससे जनता, समाज, सरकार और अर्थव्यवस्था को भारी खूब होगा। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' का शुभारंभ किया। इस योजना का शुभारंभ दिल्ली के विज्ञान भवन से किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वित्त मंत्री अरुण जेटली भी मौजूद थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस योजना का व्यापक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि आज देश में कई रिकार्ड बने हैं। उन्होंने कहा कि एक दिन में 1.5 करोड़ लोगों का बीमा होना और खाते खुलना... अपने आप में एक रिकार्ड है। उन्होंन ये भी कहा कि इस रिकार्ड से शासन में बैठे लोगों का विश्वास बढ़ेगा।
 इस योजना के तहत बैंक खाते से 15 करोड़ लोगों को जोड़ने की योजना है। आम लोगों को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के लिए... अब देश के हर व्यक्ति के पास अपना बैंक खाता होगा। देशभर में 76 केंद्रों से.. एक साथ इस योजना की शुरुआत की गई। इस योजना के तहत... हर खाताधारक को एक डेबिट कार्ड और एक लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर दिया जाएगा। आगे चलकर उन्हें पेंशन के दायरे में भी लाया जाएगा।


ये योजना एक राष्ट्रीय मिशन है, जिसका उद्देश्य देश में सभी परिवारों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराना और हर परिवार का एक बैंक खाता खोलना है। इस योजना के तहत कम-से-कम 7.5 करोड़ परिवारों को कवर किए जाने का अनुमान है।
एनडीए सरकार का सपना
शुरू हुई सबसे बड़ी योजना

मनरेगा की टक्कर में
जनधन योजना का आगाज़

उद्घाटन के मौके पर
1 करोड़ बैंक खातों का लक्ष्य

यूपीए सरकार देश के पांच करोड़ परिवारों के.... 12 करोड़ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए मनरेगा लेकर आई थी। गरीबों को रोजगार देने के लक्ष्य से बनाई गई मनरेगा से ना सिर्फ गरीब परिवारों को...बल्कि यूपीए सरकार को भी इससे सियासी फायदा मिला... इसी योजना की टक्कर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एनडीए सरकार....जनधन योजना शुरू कर रही है। इसका उद्घाटन 28 अगस्त को हुआ....इस योजना के तहत... पहले ही दिन..सरकार ने एक करोड़ बैंक खाते खोलने का लक्ष्य रखा है। सरकार को लक्ष्य है कि अगस्त 2018 तक...इस योजना से 7.5 करोड़ परिवार जुड़ सकेंगे...और 15 करोड़ बैंक खाते खोले जाएंगे। इस योजना का मूल उद्देश्य गांवों और शहरों में रहने वाली गरीब आबादी को बैंकों से जोड़ने का है...ताकि एक गरीब इंसान भी अपनी बचत का हिस्सा बैंकों में जमा करा सके। और वक्त-जरूरत में उसका लाभ उठा सके। गौरतलब है कि देश में 7.64 करोड़ शहरी गरीब और 2.55 करोड़ ग्रामीण गराबों के पास बैंक खाते नहीं हैं। ऐसे में इन लोगों को जनधन योजना का काफी लाभ मिल सकता है।

क्या है जनधन योजना ? - 

आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के बैंक खाते खोलने का लक्ष्य है।
7.5 करोड़ परिवारों को टारगेट किया गया है।
हर परिवार में दो-दो यानी कुल 15 करोड़ खाते अगले चार साल में खोले जाएंगे।
उन लोगों को भी शामिल किया जाएगा जिनके पास एक भी बैंक खाता नहीं है।


इस योजना को कामयाबी का अमलीजामा पहनाने के लिए..सरकार ने कड़ी प्लानिंग भी कर रखी है... गरीब लोगों को बैंक खाता खुलवाने में दिक्कतों का सामना न करना पड़ा... इसके लिए सरकार ने देशभर में 60 हजार शिविर लगाने की तैयारी की है...इतने ही नहीं जगह-जगह लोगों को जनधन योजना से जागरुक कराने के लिए...76  बड़े कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। उम्मीद करते हैं कि जिस शानदार तरीके से...सरकार ने इस योजना का आगाज़ किया है...इसका परिणाम भी इतना ही शानदार हो।

जनधन योजना की खास बातें 

पहला फायदा
बढ़ेगा रोजगार

15 करोड़ खाते खोलने के लिए बिजनेस कॉरस्पन्डेंट्स की नियुक्ति होगी। इससे 50 हजार लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा।

दूसरा फायदा
ब्‍याज भी मिलेगा

इस सुविधा में ना सिर्फ आपकी रकम सुरक्षित रहेगी बल्कि पैसों की सुरक्षा के साथ उस पर ब्याज भी मिलेगा।

तीसरा फायदा
मिलेगा दुर्घटना बीमा

इस महत्‍वाकांक्षी योजना में एकाउंट खुलवाने वाले को एक लाख रुपए का दुर्घटना बीमा भी मिलेगा। सरकार व समाज की नज़र से यह बेहद सुविधाजनक व बेहतर योजना है।

चौथा फायदा
मिनिमम बैलेंस

योजना के तहत मिनिमम बैलेंस रखने की कोई बाध्यता नहीं है। आजकल तमाम आधुनिक बैंकों में अगर आप सीमा से कम बैलेंस रखते हैं तो आपका रुपया डिडक्‍ट हो जाता है।

पांचवां फायदा
पैसा भेजिए

इस यजना को अपनाकर आप देश में कहीं भी पैसे भेज सकते हैं। ख़सकर इस के लिए अभी तक आपको मनी ट्रांस्‍फर की हाइटेक यजनाओं के सहारे रहना पड़ता था।

छठा फायदा
DBT

प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण जैसे प्‍लान के जरिए आपको अपना लाभ सीधे खाते में ही मिल जाएगा। इसके लिए आपको किसी भी तरह का स्‍पेशल क्‍लेम करने की ज़रूरत नहीं है।

सातवां फायदा
ओवरड्राफ्ट की सुविधा

खाता खुलने के छह महीने के बाद ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी दी जाएगी। आम तौर पर ओवरड्राफ्ट उस स्थिति को कहा जाता है जब आपके खाते में ज़ीरो से भी कम बैलेंस रह जाए और निकासी जारी रहे।

आठवां फायदा
KYC में सख्‍ती नहीं

अगर खाता खोलने के इच्छुक व्यक्ति के पास आधार नंबर या आधार कार्ड है, तो फिर उसे किसी भी अन्य प्रमाण की जरूरत नहीं है। पता बदलने पर आप नए पते को खुद से प्रमाणित करके दे सकते हैं। आधार कार्ड ना होने पर मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, से भी काम चल जाएगा।

सरकार जनधन योजना को काफी महत्वकांक्षी है...सरकार को उम्मीद है कि इससे करोडों लोगों को फायदा मिलेगा...यही वजह है कि इस योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार ने इसमें कई महत्वपूर्ण सुविधाएं भी दी हैं.. देखना होगा कि जनता को इस योजना से कितना लाभ मिल पाता है। 

 सरकार जनधन नाम की जिस महत्वकांक्षी योजना को लेकर आई है...उससे ना सिर्फ आम आदमी या गरीब को फायदा पहुंचेगा..बल्कि इससे खुद सरकार और अर्थव्यवस्था पर भी अच्छा असर पड़ने की उम्मीद है। क्योंकि देश की आबादी का बड़ा हिस्सा.. अपनी बचत गुल्लक या घर में रखता है..इस य़ोजना का लक्ष्य उस रुपये को घर से निकालकर बैंकों तक पहुंचाने का है...ऐसे में जब करोड़ों लोग अपनी बचत का छोटा-छोटा हिस्सा बैंकों पर पहुंचाएंगे...तो इससे समाज में पैसे का सर्कुलेशन बढ़ेगा..जिससे जाहिर तौर पर अर्थवस्था को मजबूती मिलेगी।

अर्थव्यवस्था पर असर  
इस योजना से गुल्लक की बचत यानी गांव का पैसा बैंकों तक पहुंचेगा।
योजना के तहत सात हजार बैंक शाखाएं और 20 हजार एटीएम खोले जाएंगे।
ओवरड्राफ्ट सुविधा के डिफॉल्टरों की भरपाई के लिए क्रेडिट गारंटी फंड भी बनेगा। ताकि बैंकिंग क्षेत्र को नुकसान ना झेलना पड़े।
7.5 करोड़ लोगों का बीमा होगा। इससे माइक्रो इंश्योरेंस सेक्टर को फायदा होगा।
बैंकिंग सुविधाएं गांवों तक पहुंचाने के लिए डाक विभाग भी अहम भूमिका में आएगा।

वीओ - अर्थव्यवस्था और समाज को छेड़कर अगर बात की जाए सरकार की...तो इसमें कोई दो-राय नहीं कि सरकार के लिए जमधन योजना...बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है... यही वजह है कि सरकार भी इस योजना को लेकर बेहद गंभीर और महत्वकांक्षी है।

सरकार को फायदा 
जनधन योजना से डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर होगा। यानी सिर्फ टारगेटेड लोग ही सब्सिडी का लाभ उठा पाएंगे।
इससे गैरजरूरतमंदों को दी जाने वाली सब्सिडी रोकने में मदद मिलेगी।
गांव में खेती करने वाले किसान कार्ड भी इसी योजना के तहत जारी होंगे।
हार्ड कैश में न देकर मनरेगा के तहत मजदूरी का भुगतान इन्हीं खातों के जरिए होगा।
क्यों कि नकदी का इस्तेमाल कम होगा लिहाजा इससे भ्रष्टाचार भी कम हो सकेगा।
इसकी मदद से असंगठित क्षेत्रों में पेंशन योजना लागू हो सकेगी।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनधन योजना को लेकर जो सपना देखा है...अगर वो पूरा हुआ.. तो जाहिर है कि इससे सरकार को भारी लाभ मिलेगा। हो सकता है कि ये योजना एनडीए सरकार के सफर में मील का पत्थर साबित हो।

यूपीए सरकार ने मनरेगा को बेहद जोर शोर से शुरू किया था...मनरेगा के तहत...यूपीए सरकार ने गरीबों के हित में एक ऐसी योजना की शुरूआत की थी..जिससे गरीबों को पूरी साल रोजगार मिला...शुरुआत में इस योजना को काफी सराहा गया... गरीब और मजदूर वर्ग ने भी इस योजना का भरपूर लाभ उठाया... यही वजह थी कि मनरेगा ने यूपीए को दोबारा सत्ता में बिठाया...लेकिन इस इतनी बड़ी योजना पर भ्रष्टाचार और घोटालों का ऐसा साया पड़ा कि.... मनरेगा गरीबों के लिए एक रोग बन गई... गरीबों के रोजगार पर खतरा मंडराने लगा..और अगर रोजगार मिला भी....तो उसका वक्त पर भुगतान नहीं हो पाया... इतना ही नहीं गरीबों की खून-पसीने की कमाई से... अधिकारियों कीस जेबें गर्म होने लगी। कड़ी मेहनत के बदले...कई बार मजदूरों को सिर्फ और सिर्फ जिल्लत ही मिल सकी। सरकारी अधिकारियों ने ही...देश में मनरेगा को पैसे खाने का जरिया बना लिया था... आखिरकार इस योजना का ऐसा हश्र हुआ कि गरीबों के लिए न रोजगार बचा और न ही उनके लिए कमाई का कोई साधन रहा।

एक बार फिर मोदी सरकार ने गरीब और मजदूर वर्ग के लिए एक बड़ी और शानदार योजना की शुरुआत की है... अगर ये योजना ठीक-ठीक चलती रही...तो इससे देश के गरीब, समाज और अर्थव्सवस्था को भारी फायदा होने की उम्मीद है..वहीं अगर इसपर भी भ्रष्टाचार और घोटालों का साया पड़ गया...तो इसके जो उम्मीर सरकार लगाए बैठी है...वो सब खटाई में पड़ सकती हैं। भ्रषटाचार के अलावा भी जनधन योजना के रास्ते में कई चुनौतियां हैं।.सरकार ने जिस शानदार तरीके से...इस योजना का आगाज़ किया है...हम भी उम्मीद करते हैं कि इसका परिणाम भी.. इतना ही शानदार हो.

Wednesday, 20 August 2014

चौराहे पर खड़ी पाकिस्तानी सियासत

विजय कुमार राय(टीवी पत्रकार)
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में सियासी संकट गहराता जा रहा है.... इमरान खान और मौलाना ताहिर उल कादरी के 25,000 से ज्यादा समर्थक...प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के इस्तीफा देने की मांग पर अड़े हैं... प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की संसद और प्रांतीय असेंबलियों को भंग किए जाने की मांग पर अड़े हैं। वहीं, लाहौर की एक अदालत ने नवाज शरीफ, उनके भाई शाहबाज शरीफ और 19 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का आरोप दर्ज करने का आदेश दिया है... इस वजह से 15 महीने पुरानी नवाज शरीफ सरकार के सामने अब तक का सबसे बड़ा संकट पैदा हो गया है...चलिए आपको भी दिखाते हैं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में इस वक्त क्या हालात हैं।
35 घंटों का सफ़र
300 किलोमीटर की दूरी
25 हजार लोगों की यात्रा
मांग सिर्फ एक
'जाओ नवाज जाओ'
जी हां ये हाल है सीमा से सटे...पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का... पाकिस्तान में सियासी संकट इस कदर गहरा गया है...कि वहां कभी भी तख्ता पलट हो सकता है... 15 महीने पुरानी नवाज शरीफ की सत्ता का किला...किसी भी वक्त धवस्त हो सकता है। देशभर में नवाज शरीफ की खिलाफ़त का दौर जारी है...नवाज शरीफ के खिलाफ छिड़ी जंग अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक भी पहुंच चुकी है। 25000 प्रदर्शनकारी लाहौर से 35 घंटे में 300 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर यहां पहुंचे हैं.... प्रदर्शनकारियों की जुबां पर सिर्फ एक ही नारा है... 'जाओ नवाज जाओ' .... मतलब साफ है कि आवाम अब नवाज को बर्दाश्त करने के कतई मूड में नहीं हैं। हालात को भांपते हुए पाकिस्तान सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए... इस्लामाबाद में हजारों पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया है...लेकिन वक्त के साथ-साथ हालात और भी बदतर होते जा रहे हैं।
नवाज़ शरीफ़ के खिलाफ़
एकजुट हुए कादरी-इमरान
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता इमरान खान ने यहां पहुंचने के बाद समर्थकों से कहा, 'अब वक्त आ गया है कि मुल्क फैसला करे। मैं यहां तब तक रहूंगा जब तक प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं दे देते। हम उस प्रधानमंत्री को कुबूल नहीं कर सकते जो धांधली वाले चुनाव के बाद बना है। हम चुनावों में धांधली के खिलाफ चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट गए। जब हमें इंसाफ नहीं मिला तब हमने फैसला किया कि अब सड़क पर उतरने के सिवाय हमारे पास कोई दूसरा चारा नहीं है।'इतना ही नहीं तहरीक-ए-इंसाफ के प्रदर्शन स्थल से कुछ दूरी पर... कादरी और उनकी पार्टी पाकिस्तान अवामी तहरीक के समर्थक में डेरा डाले हैं.

पाकिस्तानी मूल के कनाडावासी कादरी का आरोप है कि.... बीते 17 जून को पुलिस के साथ झड़प में उनके 14 समर्थकों की मौत हुई थी... इस मामले में कादरी ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ को गिरफ्तार करने की मांग की है... कादरी ने कहा, 'मैं तब तक नहीं जाउंगा जब तक नवाज और शाहबाज गिरफ्तार नहीं हो जाते।'


हालांकि, पाकिस्तानी पीएमओ ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों की ये
 मांग एकदम बेतुकी है.... शरीफ ने सरकार पर किसी तरह का खतरा मंडराने से इनकार किया है... उनकी सरकार के मंत्रियों ने कहा कि शरीफ के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता..... सरकार ने प्रदर्शकारियों और रैली में कोई बाधा नहीं डाली, लेकिन राजधानी में 'रेड जोन' में प्रदर्शनकारियों के प्रवेश को रोकने के लिए सड़कों पर कंटेनर्स रखकर पूरे इलाके की नाकेबंदी कर दी गई है। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी रेड जोन में दाखिल हो चुके हैं। यही नहीं नवाज शरीफ को इस्तीफ के लिए प्रदर्शनकारियों ने बुधवार शाम 7 बजे तक का अल्टीमेटम दिया है।
पाकिस्तान में एक तरफ नवाज सरकार है...तो दूसरी तरफ सरकार की खिलाफत पर उतरा आवाम है... हालात देखकर एक बार फिर पाक की पुरानी यादें ताजा होने लगती हैं... जिनमें जम्मूरिहत के नाम पर...सत्ता बदलती रही...और सत्ता के सिंघासन पर बैठने वालों को सज़ा-ए-मौत तक मिलती रही। एक बार फिर पाकिस्तान में सरकार के खिलाफ जंग छिड़ी है...देखना होगा कि ये ऊंट किस करवट बैठता है। 
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा... कि देश में जारी राजनीतिक संकट का समाधान सरकार को करना चाहिए। अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करने का फैसला लिया। जाहिर है इस फैसले के बाद नवाज़ शरीफ़ को थोड़ी राहत ज़रूर महससू हुई होगी...लेकिन लाहौर की अदालत ने नवाज़ शरीफ के खिलाफ मुकदमें के आदेश देकर...उन्हें दोबारा मुश्किल में डाल दिया है...मुकदमे की ये गाज सिर्फ नवाज पर ही नहीं बल्कि उनके भाई-भतीजे समेत.. उनके 21 करीबियों पर भी गिरी है।
 एक तरफ पाकिस्तान में सियासी संकट गहराता जा रहा है..तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के पीएम नवाज़ शरीफ... अदालतों के फेर में फंसते नज़र आ रहे हैं.. कहीं से उन्हें राहत मिल रही है..तो कहीं अदालत के आदेश उनके लिए आफत बने हुए हैं। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक संकट और बुनियादी अधिकारों के कथित उल्लंघन को लेकर.... सरकार और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पीटीआई के बीच गतिरोध का समाधान तलाशना सरकार का काम है। पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश नसीर-उल-मुल्क की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने... राजधानी इस्लामाबाद में चल रहे धरना के बारे में कहा कि "इससे निपटना सरकार का काम है।" जाहिर है अदालत के इस फैसले से पाक पीएम को थोड़ी राहत जरूर मिली होगी..इस फैसले के बाद... उन्हें एक बार फिर इस बात का एहसास जरूर हुआ होगा कि अभी भी उनके हाथों में ताकत है।  लेकिन नवाज़ की ये राहत उस वक्त आफत बन गई..जब लाहौर की एक अदागत ने उन्हें तगड़ा झटका दिया।
चौतरफा घिरे नवाज़ शरीफ़
शरीफ़ पर हत्या का आरोप
 लौहार की अदालत ने दिए
पीएम के खिलाफ मुकदमे के आदेश
 परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
भाई-भतीजे पर भी आरोप दर्ज
पाकिस्तान में लाहौर की एक अदालत ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, उनके भाई और पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ और 19 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का आरोप दर्ज करने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान अवामी तहरीक यानी पीएटी प्रमुख के मुख्यालय के पास से अवरोधक हटाने की अधिकारियों की कोशिश के बाद 17 जून को पुलिस के साथ झड़प में दो महिलाओं समेत पीएटी के 14 समर्थकों की मौत हुई थी....औऱ इस झड़प में 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

मॉडल टाउन झड़प से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही लाहौर सेशन कोर्ट ने पुलिस से... उन 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने को कहा है... जिन्हें पीएटी ने अपनी शिकायत में नामजद कराया था.... कोर्ट ने पुलिस को पाक पीएम नवाज़ शरीफ, उनके भाई शहबाज, उनके भतीजे हमजा शाहबाज, गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान और अन्य के खिलाफ हत्या का...  मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
जाहिर है इस मामले में नवाज़ शरीफ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। देखना ये होगा कि इन गंभीर हालातों से निपटने के लिए शरीफ सरकार क्या कदम उठाती है।
 क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान का आरोप है कि नवाज़ शरीफ 2013 में...चुनावी मैच फिक्सिंग में शामिल रहे हैं। लिहाजा वो ऐसे प्रधानमंत्री को कतई स्वीकार नहीं करेंगे...गौरतलब है कि 2013 के आमचुनाव में शरीफ ने 342 में से 190 सीट हासिल की थी। खान की पार्टी को 34 सीटें मिली थीं और वह तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। इमरान खान ने दावा किया है कि अगर चुनाव में शरीफ फ्किसिंग नहीं करते...तो उनकी पार्टी को कई और सीटें मिल सकती थीं। इसी आरोप को लेकर पाकिस्तान में जंग छिड़ गई है। चलिए आपको दिखाते हैं कि इस जंग का भारत पर क्या असर पड़ सकता है।
पाकिस्तान में संकट
भारत पर असर

ये बात तय है कि पाकिस्तान में सियासी हालात बिगड़ने का फायदा पाकिस्तानी फौज और वहां के आतंकी संगठन जरूर उठाएंगे। लिहाजा अब वक्त आ चुका है कि भारतीय सेनाओं को भी कमर कस लेनी चाहिए... आने वाले कुछ महीनों में सर्दियां शुरू होने वाली हैं... अक्सर देखा गया है कि सर्दियों में घुसपैठ की घटनाएं...तेज हो जाती हैं..लिहाजा बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी बीएसएफ को सीमा से सटे इलाकों में पैनी नज़र रखने की जरूरत है... यही नहीं जम्मू कश्मीर में आगामी चुनावों को देखते हुए... जम्मू-कश्मीर पर खास ध्यान देने की भी जरूरत है। विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द होना... पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के लिए राहत की बात है.. इसलिए आतंकी गतिविधियों के बढ़ने से पहले.... हमें सतर्क रहना होगा।
पाक के बिगड़े हालात में
अमेरिका की भूमिका
पाक सेना इमरान खान के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाना चाहती है... क्योंकि वो ड्रोन हमलों के सख्त खिलाफ रहे हैं। उधर अमेरिका भी पाकिस्तान के हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है... खास तौर पर सेना और आईएसआई के पैंतरों पर..... क्योंकि अमेरिका भी जानता है कि पाकिस्तान के घटनाक्रम से... अमेरिका की अफगान नीति सीधे तौर पर प्रभावित होती है।

पंच "तंत्र" में उलझा पाकिस्तान

पाकिस्तान के वर्तमान हालात में पांच तत्वों की भूमिका खास है और ये ही तय करेंगे कि देश का भविष्य किस दिशा में जाएगा।
पहला तंत्र - नवाज शरीफ
पूर्ण बहुमत वाली सरकार के मुखिया लेकिन फिलहाल बुरी तरह मजबूर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का देश में कड़ा दबदबा है...लेकिन वो अपनी सेना और आईएसआई को लेकर आशंकित हैं।
दूसरा तंत्र - इमरान खान 

क्रिकेटर से नेता बने...इमरान खान बेहद महात्वाकांक्षी हैं....पाकिस्तानी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इमरान को...सरकार से ज्यादा ताकतवर फौज और खुफिया एजेंसी का समर्थन हासिल है।
तीसरा तंत्र - ताहिर उल कादरी  

ताहिर उल कादरी कहने को तो धर्मगुरू हैं लेकिन सालों से सियासत में दखलंदाजी करते रहे हैं। कनाडा और पाकिस्तान की दोहरी नागरिकता रखने वाले कादरी नवाज शरीफ के सख्त विरोधी हैं।
चौथा तंत्र - पाकिस्तानी फौज  
दुनिया जानती है पाकिस्तान में फौज की इजाजत के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। ताजा हालात में वो खुलकर सामने नहीं आना चाहती लेकिन उसका दिल नवाज के साथ नहीं नजर आता।
पांचवां तंत्र - आईएसआई  
आईएसआई पाकिस्तान की एक बदनाम खुफिया एजेंसी है...जो सेना के साथ मिलकर नवाज को झांसा दे रही है.. आईएसआई मुशर्रफ प्रकरण में नवाज की भूमिका से बेहद खफा है। लिहाजा वो भी नवाज के सत्ता से जाने का इंतजार कर रही है।

पाकिस्तान का भविष्य इन्हीं पांच ताकतों के हाथों में है... जो भी ये तय करेंगे..वहीं होगा...लेकिन कश्मकश देखिए कि इन पांचों ताकतों में भी आपस में मतभेद हैं...यानी जिस तरफ ताकत ज्यादा होगी... पाक हुकुमत पर उसी का राज होगा।
जाहिर है कि हालात देखकर एक बार फिर पाकिस्तान की पुरानी यादें ताजा होने लगती हैं... जिनमें जम्हूरियत के नाम पर...सत्ता बदलती रही...और सत्ता के सिंघासन पर बैठने वालों को... सज़ा-ए-मौत तक मिलती रही। एक बार फिर पाकिस्तान में सरकार के खिलाफ जंग छिड़ी है...देखना होगा आगे क्या कुछ होता है

Tuesday, 19 August 2014

पाकिस्तान को मिला करारा जवाब



जब नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ को बुलाया था....तो लगा था कि दोनों मुल्कों के बीच संबंध सुधरेंगे.....लेकिन अब भारत ने पाकिस्तान के साथ 25 अगस्त को होने वाली विदेश सचिव स्तर की बातचीत रद्द कर दी है। भारत ने ये कड़ा फैसला क्यों लिया...और इस फैसले से दोनों देशों के संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है...
फिर सामने आई
पाक की नापाक हरकत
 भारत ने दिया
करारा जवाब
 दोनों देशों के बीच
बातचीत रद्द
भारत ने पाक के साथ 25 अगस्त को होने वाली विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी है। सरहद पर पाकिस्तान की तरफ से लगातार की जा रही गोलीबारी और हुर्रियत नेता की पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित के साथ हुई बैठक से भारत बेहद नाराज है। इससे नाराज भारत ने 25 अगस्त को इस्लामाबाद में होने वाली... विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी है। भारत ने कहा है कि वो अंदरूनी मामलों में पाकिस्तान का दखल कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। गौरतलब है कि भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने सचिव स्तर की बैठक से पहले...जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता से दिल्ली में बातचीत की। जिसपर भारत सरकार ने सख्त रवैया अपनाते हुए.. 25 अगस्त को होने वाली विदेश सचिव स्तर की बैठक को ही रद्द कर दिया।
भारत के कड़े तेवर
पाक को करारा जवाब
विदेश सचिव सुजाता सिंह ने पाक उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय बुलाकर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान तय कर ले कि उसे अलगाववादियों से बात करनी है या भारत से।’ सुजाता सिंह ने ये भी साफ कर दिया कि पाक उच्चायुक्त ने जिस तरह अलगाववादी हुर्रियत के गुटों को बातचीत के लिए बुलाया है... इसे भारत ने अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप माना है।उन्होंने कहा कि भारत के अंदरूनी मामलों में पाकिस्तान के लगातार दखल देने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भारत के सख्त रवैये से
पाकिस्तान का लगा झटका
पाक की नापाक हरकत पर भारत के कड़े फैसले के बाद... पाकिस्तान को गहरा धक्का लगा है...पाक विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तसनीम असलम ने कहा कि... अलगाववादी नेताओं से हम पहले भी ऐसी मुलाकातें करते रहे हैं। भारत का फैसला बड़ा झटका है।  लेकिन पाक की तरफ से दिया गया ये महज़ दिखावा ही कहिए..क्योंकि विदेश सचिव स्तर की वार्ता को रद्द किए जाने के बावजूद...वो हुर्रियत नेताओं से मुलाकात पर अडिग है। पाक के इस अडियनपन को देखते हुए गृह मंत्रालय में बैठक बुलाई गई। जिसमें सरकार पाकिस्तान को लेकर... अपनी आगे की रणनीति तैयार कर रही है।देखना ये होगा कि पाक की इस ओछी हरकत के खिलाफ देश की सरकार... क्या कुछ सख्त फैसले लेती है। 
भारत की आपत्ति के बावजूद पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने दिल्ली में... अलगाववादी नेता शब्बीर शाह से मुलाकात की। इस बैठक को लेकर भारत ने कड़ा एतराज जताया है। भारत ने साफ-साफ कह दिया है कि अंदरूनी मामलों में  पाकिस्तान की दखलंदाजी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यहीं नहीं भारत ने सीमा पार से होनी वाली फायरिंग पर भी आपत्ति जताई है.. सीमा पार से लगातार हो रहे सीजफायर के उल्लंधन को भी...वार्ता के रद्द होने के पीछे...बड़ी वजह माना जा रहा है।
बात को बेताब पाक
लेकिन कर रहा घात  
विजय कुमार राय

पाकिस्तान भारत का ऐसा पड़ोसी मुल्क है जो बातचीत के लिए बेताब भी दिखता है लेकिन घात करने से बाज नहीं आता। पाकिस्तान भारत के साथ संबंधों को लेकर कितना गंभीर है, इस बात का अंदाजा सीमा पर हो रही गोलीबारी से ही लगाजा जा सकता है...जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तानी रेंजरों की तरफ से..शिमला समझौते की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वो वाकई हैरान करने वाली बाती है... पाकिस्तान की तरफ से भारतीय चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोलीबारी की जा रही है... सीमा पर संघंर्ष विराम के उल्लंधन की घटनाओं से भी सरकार नाराज है। पाकिस्तान ने रविवार रात भी संघर्षविराम का उल्लंघन करते हुए सीमा पर भारी गोलीबारी की। जम्मू सेक्टर के अरनिया और आरएस पुरा सब सेक्टर की 20 सीमा चौकियों और आबादी वाले इलाकों पर मोर्टार दागे गए और अत्याधुनिक हथियारों से गोलीबारी की। पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर के उल्लंघन की ये कोई पहली घटना नहीं है... पिछले 10 दिनों में पाकिस्तान 11 बार सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है...अगस्त में अब तक 12वीं बार पाक की तरफ से ये हरकत की गई है.. 17 अगस्त की रात पाक रेंजर्स ने भारतीय सेना की 20 चौकियों पर गोले दागे।
लेह लद्दाक के दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को दो टूक जवाब देते हुए कहा था कि उसमें सीधे युद्द करने की ताकत नहीं है। इसलिए वो आतंकवाद की आड़ में युद्ध कर रहा है। शायद यही वजह है कि पीएम के इस बयान से बौखलाया पाकिस्तान अब अलगाववादियों के जरिये ओछी हरकत पर उतर आया है। पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर भले ही मोदी सरकार काफी गंभीर हो लेकिन पीएम मोदी को 1999 का वो दौर याद करना होगा...जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शांति का पैगाम लेकर... बस से पाकिस्तान गए थे और पड़ोसी मुल्क ने तोहफे में हमें करगिल के वो गहरे ज़ख्म दिए...जिन्हें चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता। जाहिर है पाकिस्तान पर जब जब भरोसा किया गया तब तब उसने भरोसे का कत्ल करने में देर नहीं लगाई।  
 भारत की तरफ से....पाकिस्तान से खराब संबंधों को सुधारने की कोशिशें लगातार होती रही हैं...मोदी सरकार ने भी इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए... अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाक पीएम नवाज़ शरीफ को न्यौता भेजा...मोदी की मंशा से साफ हो गया था कि वो पड़ोसी मुल्कों से संबंधों को लेकर कितने गंभीर हैं...लेकिन पाकिस्तान भारत से संबंधों को लेकर कितना सजग है... इसके सुबूत हमे बड़े ज़ख्मों के तौर पर वक्त-दर-वक्त मिलते रहे हैं। आप भी देखिए.. शांति और दोस्ती का हाथ बढ़ाने वालों के साथ कैसा सलूक करता है पाक।
तारीख - 26 मई 2014
ये वो दिन था... जब देश के नए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने..राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में..प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी... इस शपत ग्रहण समारोह में देश-विदेश के तमाम मेहमानों ने शिरकत की...मोदी ने सभी एशियाई देशों के प्रतिनिधियों को बुलाया...और उनकी शानदार मेहमान नवाजी भी की...खास बात ये रही कि इस शपत ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी मौजूद रहे... इस शपथ ग्रहण समारोह से ये साफ हो गया कि मोदी पड़ोसी मुल्कों से बेहतर संबंध बनाना चाहते हैं। फिर चाहे वो पाकिस्तान ही क्यों न हो.... मोदी ने नवाज शरीफ की मां को तोहफे में शॉल भेजकर....दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों की नींव रखी थी.... लेकिन पाकिस्तान की गद्दारी के आगे...सारी कोशिशें धरी की धरी रह गईं। भारत अच्छे संबंधों की कोशिशों में लगा रहा...लेकिन अच्छे संबंधों की आड़ में पाकिस्तान लगातार भारत को धोखा देता रहा। कभी सीमापार से गोलियां बरसाकर तो कभी हुर्रियत नेताओं से मुलाकात कर पड़ोसी मुल्क अपनी गद्दारी के सुबूत पेश करता रहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान से संबंध सुधारने की पहल की... लेकिन पाकिस्तान की कूटनीति ने इस कोशिश पर विराम लगा दिया। इससे पहले भी कई बार भारत-पाक के बेहतर संबंधों को लेकर...बातचीत की तैयारियां की जा चुकी हैं...लेकिन पाकिस्तान की अंदरूनी ताकतों ने हर बार उस शांति वार्ता से पहले ही माहौल खराब कर दिया। कभी पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लंधन किया...तो कभी पाक में बैठे आतंकी संगठनों ने.. भारत में अपनी नापाक साजिश को अंजाम देकर... बातचीत में रुकावट पैदा कर दी।



बातचीत में बाधा बने आतंकी हमले

तारीख - 26 सितंबर 2013
भारत और पाक पीएम की न्यूयॉर्क में मुलाकात के पहले जम्मू में दो हमले

तारीख - 13 जुलाई 2011
भारत-पाक के विदेश मंत्रियों की इस्लामाबाद में वार्ता के पहले मुंबई में धमाके

तारीख - 13 फरवरी 2010
25 फरवरी को विदेश सचिव स्तर वार्ता से पहले पुणे की जर्मन बेकरी में विस्फोट

तारीख - 26 नवंबर 2008
नई दिल्ली में भारत-पाक विदेश मंत्रियों में वार्ता के बीच मुंबई हमला, वार्ता स्थगित

जी हां ये पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के हाथों अंजाम की गईं ये खौफनाक वारदातें इस बात का सुबूत हैं कि जब-जब भारत ने पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है... तब-तब पाकिस्तान की अंदरूनी ताकतों ने इसका विरोध किया है। हालांकि पाकिस्तान ने हर बार-बार इन आतंकी साजिशों में.. मिलीभगत से पल्ला झाड़ा है...लेकिन आतंकी हमलों की जांच में हर बार पाक का नापाक चेहरा ही सामने आया। फिर चाहे वो दिल्ली ब्लास्ट हो या मुंबई में हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला... हर एक साजिश में पाकिस्तानी आतंकी संगठनों का हाथ पाया गया। लेकिन पड़ोसी मुल्क हर बार...बड़ी ही बेशर्मी से... अपनी भूमिका को लेकर.. मामलों की लीपा-पोती में लगा रहा। 25 अगस्त से पहले हुर्रियत नेताओं से मुलाकात... पाकिस्तान की एक और घिनौनी साजिश का सुबूत है। 
इतिहास को खंगाला जाए तो इससे पहले भी... भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली वार्ता से पहले... हुर्रियत नेताओं की मुलाक़ातें पाकिस्तान के उच्चायुक्त, विदेश मंत्री और यहां तक कि राष्ट्रपति से भी होती रही हैं... लेकिन भारत ने कभी इन्हें राजनयिक वार्ता के एजेंडे में रोड़ा नहीं माना... ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि ऐसी ही एक मुलाक़ात को लेकर... मोदी सरकार की ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया को कैसे समझा जाए ?

पुराना है मुलाकातों का सिलसिला 


आगरा में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई और पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की शिखर बैठक से पहले हुर्रियत नेताओं ने दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग की तरफ़ से दिए गए भोज में हिस्सा लिया था।

यही नहीं दिल्ली में 2012 में हुई दोनों देशों की गृहसचिव स्तरीय बातचीत से पहले हुर्रियत नेता पाकिस्तानी उच्यायुक्त से मिले थे।

विदेश मंत्री रहीं हिना खर ने भी उनसे मुलाक़ात की थी जबकि नवंबर 2013 में एशिया-यूरोप बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली आए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के विदेश मामलों के सलाहकार ने भी हुर्रियत नेताओं से मुलाक़ात की थी.

उस वक़्त विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने अज़ीज़ की हुर्रियत नेताओं से इस मुलाक़ात की ये कह कर आलोचना की थी कि ये ‘रचनात्मक नहीं’ है. लेकिन यूपीए सरकार ने इसे तूल नहीं दिया था।

इतना ही नहीं 15 अप्रैल 2005  को भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन से जब पूछा गया कि दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने से पहले हुर्रियत नेताओं से राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की मुलाक़ात पर भारत को क्या कोई समस्या है? इस पर उन्होंने कहा था कि “पाकिस्तानी नेता आते हैं, वो हुर्रियत नेताओं से मिलते हैं। हम एक लोकतांत्रिक देश हैं, हमें इस तरह की मुलाक़ातों से कोई दिक़्क़त नहीं है।” 
पाक प्रतिनिधियों की हुर्रियत नेताओं से मुलाकात का सिलसिला काफी पुराना है...कई बार ये मुलाकातें सरकार को घेरने का मुद्दा तो बनीं...लेकिन पिछली सरकार ने इन्हें कभी तूल नहीं दिया... लेकिन इस बार मोदी सरकार ने विदेश सचिव वार्ता  रद्द करके...पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है...मोदी ने पाकिस्तान को सख्त सरकार होने का आभास कराया। जाहिर है जिन बातों पर पिछली सरकारें नरमी बरतती रही हैं, मोदी सरकार उन बातों को हलके में लेने के मूड में नहीं हैं। 






Thursday, 14 August 2014

68वें स्वतत्रंता दि‍वस के अवसर पर लालकिले के प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते पीएम मोदी

हमें भारत से गरीबी को हटाना है। सार्क देश मिलकर दुनिया में अपनी अहमियत साबित कर सकते हैं। सार्क देशों को मिलकर अपनी गरीबी दूर करनी है। मैं देशवासियों से कहता हैं कि अगर आप 12 धंटे काम करेंगे तो मैं 13 धंटे काम करूंगा। अगर आप 14 घंटे काम करेंगे तो मैं 15 घंटे काम करूंगा क्योंकि मैं आज आप लोगों के बीच प्रधानमंत्री के रूप में नहीं बल्कि प्रधानसेवक के रूप में उपस्थित हूं। मैं देश की रक्षा में तैनात सैनिकों का नमन करता हूं। सीमा पर जवान जाग रहें हैं इसलिए हमें भी जागते रहना होगा।  
-हर सांसद आदर्श गांव बनाएं। पांच साल में सांसद पांच आदर्श गांवों का निर्माण करें। देश बनाना है तो गांवों से शुरुआत करनी होगी। 12 अक्टूबर से सांसद आदर्श ग्राम योजना शुरू की जाएगी। जयप्रकाश की जयंती पर यह योजना शुरू होगी। योजना आयोग का कायाकल्प करने की जरूरत है। योजना आयोग की जगह पर नई सोच, नई दिशा, नई विश्वास के साथ हम एक नई संस्था का निर्माण करेंगे। योजना आयोग ने अब तक बहुत ही अच्छा काम किया है, उसके कार्यों का मैं अभिनंदन करता हूं लेकिन अब समय बदल गया है। आर्थिक वृद्धि का काम आज केवल सरकारें नहीं बना रही हैं। आर्थिक हलचल का दायरा बहुत बढ़ गया है, इसे देखते हुए हम इस दिशा में हम शीघ्र आगे बढ़ने वाले हैं।

-महात्मा गांधी की 150वीं जयंती आने वाली है। गांधीजी को साफ-सफाई बहुत ही प्रिय था। हमें स्वच्छता का संकल्प लेना है। साफ-सफाई बहुत बड़ा काम है। देशवासियों को स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाना है। हमें हर घर में शौचालय सुनिश्चित कराना है। मैं देश के लोगों, कॉरपोरेट घरानों का आह्वान करता हूं कि वे राज्य सरकारों के साथ मिलकर देश के सभी स्कूलों में बच्चियों के लिए अलग शौचालय का निर्माण करें। अगले साल जब हम 15 अगस्त को लालकिले पर मिलें तो कोई भी स्कूल बिना शौचालय के न हो।
-मैं चाहता हूं कि देश के हर कोने में यह बात पहुंचे कि 'मेड इन इंडिया'। देश का यही सपना होना चाहिए। नौजवानों से मैं अपील करता हूं कि वे आगे आएं और अपनी कौशल का परिचय दुनिया को कराएं। भारत के बारे में दुनिया की अवधारणा बदली है। अब यह देश सांप और जादूगरों का नहीं है। अब यह देश 'डिजिटल इंडिया' है। हमारे आईटी क्षेत्र के युवाओं ने दुनिया में भारत की तस्वीर बदल दी। आईटी के क्षेत्र में हमारे युवाओं की क्षमता का लोहा आज पूरी दुनिया मानती हैं।
-यह देश नौजवानों का है। भारत विश्व का सबसे नौजवान देश है। सरकार पीएम जनधन योजना शुरू करेगी। इस योजना के तहत देश के प्रत्येक नागरिक का बैंक में अकाउंट खोला जाएगा और एक लाख रुपए का बीमा सुनिश्चित किया जाएगा ताकि मुश्किल वक्त में यह राशि लोगों के काम आ सके। देश के युवाओं को कौशल से जोड़ने की जरूरत है। युवाओं को रोजगार देना है तो हमें उत्पादन क्षेत्र को बढ़ाना है। देश के हर युवा को हुनरमंद बनाना है।
-देश में लड़कों के मुकाबले लड़कियां कम पैदा होती हैं। यह असंतुलन तो ईश्वर पैदा नहीं करता। मैं लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे गर्भ में लड़कियों की बलि न दें। देश की आन-बान-शान में हमारी बेटियों का भी योगदान है। अपनी तिजोरी के लिए बेटियों की बलि मत दीजिए।
-हिंसा के रास्ते से कुछ नहीं मिलेगा। आतंकी भी किसी के बेटे हैं। माओवादी भी किसी के बेटे हैं। कंधे पर बंदूक की जगह हल क्यों नहीं हो सकता। आजादी के बाद से जातिवाद, संप्रदाय वाद के जहर से आज हम जकड़े हुए हैं। इससे कुछ नहीं मिला। हमें इनसे दूर जाना होगा। शांति, भाईचारा और सद्भाव हमें आगे बढ़ने में मदद करेगा।
-देश में बलात्कार की घटनाओं से सिर शर्म से झुक जाता है। परिवारों को लड़कियों पर ही बंदिशें नहीं डालनी चाहिए। माता-पिता को चाहिए कि वह बेटों पर भी अंकुश लगाएं।
-बड़ी मुश्किल से मिली आजादी। देश को राजनेताओं ने नहीं, जनता ने बनाया। आजादी के सिपाहियों को मेरा नमन। गरीब का पीएम बनना लोकतंत्र की ताकत। हम सभी को मिलकर देश को आगे बढ़ाना है। सरकार की सफलता का श्रेय विपक्ष को भी।