Saturday, 26 July 2014

दिल्ली का दिल कहे जाने वाला सी.पी. में बिताए रात का एक दिन


दिल्ली एक खुबसूरत जगह है | यहाँ हर किसी का घूमने का मन करता है | दिल्ली के बीचों-बीच स्थित एक जगह है, जिसे हम कनॉट प्लेस के नाम से जानते हैं | ये जगह वैसे तो बहुत खुबसूरत है, जहां बड़े-बड़े सिनेमाघर हैं, कई बड़ी-बड़ी इमारतें हैं, पत्रकारों का जमावड़ा है, एक बड़ा बाज़ार है | जहां सुबह से लेकर शाम तक ये जगह चमकती रहती है, वहीं 10 बजते ही इस जगह का काला रूप सामने आने लग जाता है | पढ़कर आपको उत्सुकता हो रही होगी न कि आखिरकार ऐसी क्या बात है ? चलिये, ज्यादा सोचिए मत, हम आपको 10 बजे के बाद के कनॉट प्लेस की सैर करातें हैं |
करीब 10:45 मिनट हुए हो रहे थे, जब मैं दिल्ली की उस चमकदार जगह पर गया जिसे लोग सी.पी. कहते हैं | हालांकि मैं सी.पी. कई बार आया था, लेकिन यह पहला वाकया था, जब मैं रात के 10 बजे के बाद सी.पी. में घूम रहा था | अमूमन इस जगह पर बहुत चहल-पहल और शोर-शराबा रहता है, लेकिन इस समय यहाँ एक अजीब सी शांति चारों ओर व्याप्त थी | दुकानें बंद हो रही थी | लोग अपने-अपने घर या तो जा चुके थे या फिर जाने वाले थे | कुछ एक गाड़ियों की रह-रह कर आवाजें आ रही थीं और जब मैं थोड़ा आगे बढ़ा, तो मैंने देखा कि एक व्यक्ति जिसकी उम्र करीब 35 साल रही होगी, वो कूड़ेदान में कुछ खोज रहा था | मैं उसके पास गया और उससे बात करनी चाही | उसने बड़ी तत्परता से मेरी तरफ देखा, मानों मैं उसकी कुछ मदद करने वाला हूँ | उसके हाव-भाव से पता चल रहा था कि उसने किसी प्रकार का कोई नशा नहीं किया था |
मैंने उससे पूछा कि क्या आप दिल्ली के रहने वाले हैं ? उसने बताया कि मेरे पिता जी के मरने के बाद मेरे चाचा ने सारी ज़मीन हथिया ली और मुझे घर से बेदखल कर दिया | किसी तरह मैं दिल्ली इस आस में पहुंचा कि कोई काम मिलेगा, कोई मदद मिलेगी, लेकिन उसकी खोज आज तक जारी है | तभी मेरे दिमाग में यह बात आई कि वो कूड़ेदान में अपनी ज़िंदगी को खोज रहा था |

मैंने बस यूं ही उससे पूछा कि क्या आप नशा करते हैं ? तो उसने बताया कि स्मैक, सुलेशन, पेंट चरस, गांजा वगैरह मैं नहीं लेता क्योंकि इससे फेफड़ा जल जाता है | वैसे स्मैकिये रीगल के बगल रिबोली के आस-पास मिल जाएंगे | मैंने उससे और सवाल न करके रिबोली की तरफ बढ़ा |
वहाँ पहुँचने से पहले ही लगभग 7 साल के बच्चे को पीठ पर एक बड़ा सा बोरा लादे हुए देखा , जिसमें पता नहीं क्या भरा था ? मैंने उससे पूछा कि कि कहाँ जा रहे हो ? उसने कहा कि “हनुमान मंदिर” जा रहा हूँ | उसने मेरी तरफ उत्सुकता से देखा और पूछा “ माल है क्या ?” मैं इस सवाल के लिए तैयार नहीं था, हालांकि मैं इसी सवाल के जवाब के लिए घूम रहा था |
मैं उसके सवाल का जवाब दिये बिना आगे बढ़ा ही था कि उसने मेरी शर्ट पकड़ ली और अपना दूसरा हाथ अपनी जेभ में डालकर 10-10 के दो नोट निकाल के मुझे देते हुए अजीब सी आवाज़ में कहने लगा कि भैया “माल दिलवा दो, नहीं तो मर जाऊंगा |” मैं उस सात साल के बच्चे को देखकर घबरा गया और हड़बड़ाहट में अपनी शर्ट छुड़ा कर हनुमान मंदिर की तरफ बढ़ा |
उस लड़के ने मेरी शर्ट तो छोड़ दी लेकिन अजीब सी शक्ल बनाकर वहीं सड़क पर अपने बोरे को नीचे पटक कर बैठ गया | मैंने अपने कदम हनुमान मंदिर की तरफ बढ़ाए, लेकिन मन में एक अजीब सा भय आ गया था | अंतत: मैं हनुमान मंदिर पहुंचा |

पहुँचते ही मेरा सामना जुआरियों से हुआ | जैसे ही मैंने जुआरियों को देखा, उनमें से एक जुआरी ने अपना ध्यान खेल से हटाकर अपनी त्योरीयां चढ़ाकर मेरी तरफ घूर कर देखा | मैंने बिना कुछ प्रतिक्रिया दिये वहाँ से निकलना बेहतर समझा और आगे बढ़ गया | मैं कुछ कदम आगे बढ़ा ही था कि आगे मंदिर परिसर में एक महिला औंधे मुंह पड़ी हुई थी और बगल में उसका बच्चा ज़ोर-ज़ोर से रो रहा था | उसकी चीख मंदिर परिसर में व्याप्त भयावह सन्नाटे को चीर कर कई बड़े सवाल खड़े कर रही थी |
आगे बढ़ने पर बाबाओं का झुंड दिखाई दिया जो कि पूर्णता नशे में धुत्त थे और बैठे-बैठे ऊँघ रहे थे | आगे बढ़ते ही जिसकी उम्र 27 साल रही होगी, वो मेरे साथ-साथ चलने लगा | जैसे-जैसे उसके कदम मेरे साथ होने लगे, अजीब सी घबराहट हमारे आगे बढ़ने के साथ बढ़ती जा रही थी | अचानक मेरे मन मेन ख्याल आया कि मैं रुक जाता हूँ, शायद वह व्यक्ति आगे जाना चाहता हो लेकिन जैसे ही मैं रुका, वो भी रुक गया | मेरी धड़कनें बहुत तेज चलने लगीं थी और मैं सड़क तक आ पहुँचा था |

मैं आगे बढ़ा और पास में खड़ी कैब के पास यह सोचकर पहुंचा कि इसके अंदर कोई होगा, तो उसके डर से यह व्यक्ति मेरा पीछा छोड़ दे लेकिन यह क्या , इसने कैब का दरवाजा खोला । यह देखकर मेरा शरीर कुछ देर के लिए थम गया । उस व्यक्ति ने अंदर हाथ डाला और कुछ पैकेट निकाले और बोला कि "माल एकदम असली है।" चैक कर लो । मैंने नहीं कहते हुए अपने कदम तेजी से आगे बढ़ाये और वो व्यक्ति काफी देर तक कहता रहा कि माल असली है, एक डैम प्योर है, ले लो लेकिन मैंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा, मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा ।

Wednesday, 16 July 2014

अवसरों का सम्मेलन

विजय कुमार राय......

 ब्राजील में चल रहे ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन में भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल हुई है। भारत के साथ ही ब्राजीलरूसचीन और दक्षिण अफ्रीका के बीच ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना का ऐतिहासिक फैसला हुआ....खास बात यह है कि जहां बैंक का मुख्यालय चीन के शंघाई शहर में होगावहीं पहले पांच साल के लिए इसकी अध्यक्षता भारत को मिली है। हालांकि भारत ने बैंक का मुख्यालय नई दिल्ली को बनाने की भरपूर कोशिश कीलेकिन ऐन वक्त पर चीन बाजी मार गया। बैठक के दौरान इस मसले पर भारत और चीन में थोड़ी तनाव की स्थिति भी बनी।
इस बैंक की शुरुआती पूंजी 100 अरब डॉलर होगी....ब्राजीलरूस, भारतचीन और दक्षिण अफ्रीका इस बैंक को 20-20 अरब डॉलर की रकम देंगे.... ये रकम ब्रिक्स देशों के नकदी संकट के समय काम आएगी.... इसके अलावा ब्रिक्स सहयोग को बढ़ावा देने में पैसा लगाया जाएगा.... साथ ही वैश्विक वित्तीय सुरक्षा को भी मजबूत किया जाएगा।
ये बैंक ठीक उसी तरह काम करेगाजिस तरह वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड काम करता हैलेकिन इसपर दोनों  पर पश्चिमी देशों का ही प्रभाव चलता है... विकासशील देश अलग-थलग ही रहते हैंइसलिए ब्रिक्स देशों ने मिलकर अपना एक बैंक बनाने की शुरुआत की है।
ब्रिक्स देशों को बैंक के साथ ही मोदी मंत्र भी मिला. मोदी ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों को युवा शक्ति का एहसास कराया और उसे निखारनेसंवारने का रास्ता भी दिखाया.गौरतलब है कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली बहुपक्षीय बैठक है। इससे पहले उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी और सीमा पार घुसपैठ से लेकर कैलाश मानसरोवर यात्रा तक के सभी मुद्दों पर दो टूक लहजे में अपनी बात रखी थी।

क्या है बैंक का उद्देश्य ?
अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव का सामना करने के लिए 50 बिलियन डॉलर की शुरुआती पूंजी के साथ यह बैंक खोला गया है। इस राशि को बढ़ाकर 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाया जाएगा।  इसके लिए पांचों देश बीस-बीस अरब डॉलर देंगे। इस सम्मेलन के दौरान ब्राजील की प्रधानमंत्री दिल्मा रूसेफ ने कहा, ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक स्थापित करने से स्पष्ट है कि विभिन्न भिन्नताओं के बाद भी ब्रिक्स देश साथ हैं।
बैंक और सीआरए की स्थापना की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बैंक से अब न सिर्फ सदस्य राष्ट्रों को फायदा होगा बल्कि विकासशील विश्व को भी फायदा होगा।
वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, ब्रिक्स बैंक आर्थिक समस्याओं का सामना करने का सबसे कारगर उपाय साबित होगा। 

इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया... कुल मिला कर देखा जाए..तो ये ऐतिहासिक फैसला सभी ब्रिक्स देशों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।
चला मोदी का जादू
भारत को मिली जीत
नए विकास बैंक की स्थापना को भारत के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है... इस पूंजी के लिए शुरुआती अंशदान में संस्थापक सदस्यों की बराबर भागीदारी होगी...दरअसलभारत इस बात पर जोर देता रहा है कि इस पर किसी भी सदस्य देश का वर्चस्व  हो।पांच राष्ट्रों की सदस्यता वाले समूह की शिखर बैठक में बैंक और 100 अरब डॉलर के शुरुआती आकार के साथ एक कंटींजेंसी रिजर्व अरेंजमेंट’ स्थापित करने का भी समझौता हुआ...इस बैंक की स्थापना में सबसे खास बात ये रही कि बैंक का पहला सीईओ भारत सेहोगाजबकि संचालन मंडल बोर्ड का पहला अध्यक्ष रूस से होगा।

नए विकास बैंक का अफ्रीकी क्षेत्रीय केंद्र दक्षिण अफ्रीका में होगा.... सम्मेलन में स्वीकार किए गए फोर्तालेजा घोषणापत्र में नेताओं ने कहा, ‘हम अपने वित्त मंत्रियों को निर्देश देते हैं कि वे इसके संचालन के लिए तौर तरीकों पर काम करें. शुरुआती पूंजी की समान साझेदारी पर भारत का जोर इस बात को लेकर रहा...कि ब्रिक्स बैंक भी अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोषयानी आईएमएफ और विश्व बैंक की तरह ब्रेटन वुड्स संस्थानों का रूप ना ले...
ब्रिक्स बैंक और सीआरए की स्थापना से अच्छे नतीजों की उम्मीद जताई जा रही है...आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखने में ये दोनों संस्थान... अब नये माध्यम होंगे...मोदी ने भी इसकी सराहना करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और वित्तीय संस्थानों में सुधारों की बड़ी जरूरत हैताकि जमीनी सच्चाई जाहिर हो सके तथा एक नया वित्तीय ढांचा तैयार हो
ब्रिक्स विकास बैंक और सीआर के की स्थापना की घोषणा के साथ ही... पांच देशों के संयुक्त मंच ब्रिक्स ने अपना एक मक़सद पूरा कर लिया है...अब देखना ये होगा कि आने वाले आर्थिक संकट से निपटने में ये कितना कारगर साबित होगा।
क्या है BRICS की भूमिका ?
ब्राज़ीलरूसभारतचीन और दक्षिण अफ़्रीका का संयुक्त मंच है ब्रिक्स.... इसी की सालाना बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीब्राज़ील पहुंचे... ब्रिक्स के बारे में बहुत सी खास बाते हैं.. जिन्हें जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।
GFX IN
ब्रिक्स में क्या है खास ?

 पहली खासियत
ब्रिक्स का आइडिया सबसे पहले इनवेस्ट बैंक गोल्डमैन सैक्स के चेयरमैन जिम  नील ने 2001 में दिया था।
दूसरी खासियत
दिसंबर, 2010 से पहले तक इस समूह में दक्षिण अफ़्रीका शामिल नहीं हुआ थाइसे तब ब्रिक देशों के नाम से जानते थेसाउथ अफ़्रीका के शामिलहोने के बाद इसमें 'एसजोड़ा गया तो ये ब्रिक्स बन गया।
तीसरी खासियत
इन देशों की सालाना बैठक किसी सदस्य देश की मेज़बानी में होती है, 2012 की शिखर बैठक भारत में हुई थी।
चौथी खासियत
दुनिया के कुल सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में इन पाँचों देश की हिस्सेदारी 21 फ़ीसदी के करीब है। बीते 15 सालों में दुनिया भर के जीडीपी मेंइनकी हिस्सेदारी तीन गुना बढ़ी है।
पांचवीं खासियत
ब्रिक्स देशों में दुनिया भर की करीब 43 फ़ीसदी आबादी रहती है।
छठी खासियत
ब्रिक्स देशों के पास कुल मिलाकर करीब 44 खरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है।
सातवी खासियत
ब्रिक्स देशों के बीच आपसी कारोबार लगभग 300 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, 2015 तक इसके 500 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. 2002 में ये महज 27.3 अरब डॉलर था।
जिस तरह ब्रिक्स ने कम समय में रिकॉर्ड तरक्की की है... और ब्रिक्स देशों के बीच आपसी तालमेल को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है..उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले समय में ब्रिक्स और बड़े फैसले लेने और गंभीर परिस्थितियों से निपटने केलिए...पांचों देशों के लिए बेहद अहम साबित होगा।
आतंकवाद पर हुई चर्चा
मोदी ने जताई चिंता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व के आर्थिक मंच पर तेजी से उभर रहे पांच देशों के संगठन ब्रिक्स के छठे शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मानवता के दुश्मन आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंनें कहा कि वो उस देश के निवासी है जहां परम्परा और संस्कृति विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की रही है और जहां आतंकवाद का कोई स्थान नहीं रहा है।

उन्होंने अफगानिस्तान से लेकर अफ्रीका तक के पूरे क्षेत्रों में आतंकवाद के कारण उत्पन्न अशांति एवं अस्थिरता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों में और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। मोदी ने बैठक केनिजी सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद से जूझ रहे देशों की पीड़ा के प्रति मूक दर्शक बना रहना बेहद घातक सिद्ध हो सकता है।

उन्होंने साइबर सुरक्षा के खतरे के प्रति ब्रिक्स देशों को अगाह करते हुए कहा कि साइबर अवसरों की खान है। इसकी सुरक्षा के लिए ब्रिक्स देशों को आगे आना चाहिए। इससे पहले ब्रिक्स देशों के सभी नेताओं ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।

आपको बता दें कि भारतब्राजीलरूसचीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के सदस्य देश हैं। ब्रिक्स देशों में मोदी की विशेष रूचि और उनके प्रति खासी चर्चा हो रही है... जिन्होंने हाल ही में.. भारत में भारी बहुमत हासिल करके सरकार बनाई है। ऐसे में आतंकवाद पर मोदी ने जो भाषण दिया...ब्रिक्स देशों में उसकी खूब वाहवाही हुई।