Thursday, 14 November 2013

कैसे पाएं Negative Thoughts से छुटकारा ?


दोस्तों कई बार ऐसा होता है कि हम खुद ही अपनी happiness या success के मार्ग में रोड़ा बन जाते हैं. और कई मामलों  में  तो हमें इस बात का पता भी नहीं होता. बार-बार मन में एक ही या कई नकारात्मक विचारों का आना एक ऐसा ही रोड़ा है.
For Example: यदि आपके मन में विचार आता है कि ,” मैं भद्दा दीखता हूँ”, या ,”मेरा पति मुझसे प्यार नहीं करता.”, या “मुझे अंग्रेजी नहीं आती.”, या ,” मेरा IQ कम है” इत्यादि , तो कहीं ना कहीं ये आपके personal development में hurdle बन रहे हैं.
आज AchhiKhabar.Com पर हम ऐसे ही विचारों से निजात पाने  के  एक बहुत ही effective process के बारे में जानेंगे. इसके बारे में मैंने Steve Pavlina के  article How to Squash Negative Thought Patterns में  पढ़ा था,और यहाँ पर मैं आपके साथ उसी का Hindi translation share कर रहा हूँ.
How to get rid of negative thought patterns in Hindi
Redirect Negativity into Positivity
  Negative Thoughts से कैसे छुटकारा पाएं ?
Suppose करिए कि आपकी बार-बार एक ही negative thought को सोचने की बुरी आदत है. और suppose करिए कि असल दुनिया में उस सोच की कोई अभिव्यक्ति नहीं है. वो बस एक नकारात्मक सोच है , जैसे ” मैं बहुत depressed हूँ” या ” मुझे अपनी नौकरी से नफरत है” या ” मैं ये नहीं कर सकता” या “मुझे अपने मोटापे से नफरत है.” आप किसी  बुरी आदत से कैसे छुटकारा पायेंगे जब वो पूरी तरह से आपके दिमाग में हो ?
असल में negative thought pattern को बदलने के बहुत सारे तरीके हैं. Basic idea ये है कि पुराने thought pattern को नए से replace कर दिया जाए. मानसिक रूप से नकारात्मक सोच का विरोध करना उल्टा पड़ सकता है- आप इसे और मजबूत करते जायेंगे और स्थिति बदतर हो जाएगी. आप जितना अपने neurons को उसी दिशा में fire करेंगे, आपकी नकारात्मक सोच उतनी ही शशक्त होती जायेगी.
यहाँ एक तरीका है जो मैं अपने negative thought patterns को break करने के लिए use करता हूँ.  ये basically एक memory technique जिसे ‘chaining’ कहते हैं से मिला जुला कर बना है. ये तरीका मेरे लिए बहुत सही काम करता है.
Negative Thought pattern का विरोध करने का प्रयास करने की बजाये आप इसकी दिशा बदल दीजिये. इसे आप एक mental kung fu की तरह से समझिये. नकारात्मक सोच की उर्जा को लीजिये और उसे सकारात्मक सोच की तरफ मोड़ दीजिये. थोड़ी सी mental conditioning के साथ जब भी आपके दिमाग में negative thought आएगी , आपका दिमाग खुद बखुद positive thought की तरफ divert हो जाएगा. ये Pavlov’s dogs की तरह है जो घंटी बजने पर लार टपकाना सीख जाते हैं.
ये ऐसे काम करता है:
मान लीजये आपकी negative thought एक subvocalization है, मतलब आपको अन्दर से एक आवाज़ सुनाई देती है जिसे आप बदलना चाहते हैं , जैसे कि, ” मैं idiot हूँ”. अगर आपकी negative thought एक आवाज़ होने की बजाये एक mental image (कोई चित्र जो दिमाग में आता हो) या  kinesthetic ( कोई अन्दर होने वाला एहसास
) हो तो भी आप इस process को use कर सकते हैं. कई मामलों में आपका विचार इन तीनों का combination भी हो सकता है.

Step 1: अपनी negative thought को एक mental image में बदल लें.

उस आवाज को सुनिए और दिमाग में उसकी एक तस्वीर बना लीजिये.For Example, यदि आपकी सोच है कि ,“मैं idiot हूँ”, तो कल्पना कीजिये कि आप मूर्खतापूर्ण कपडे पहने और जोकरों वाली टोपी लगाकर इधर उधर कूद रहे हैं. आपके चारो तरफ लोग खड़े हैं जो आपकी तरफ ऊँगली दिखा रहे हैं और आप चिल्ला रहे हैं, “मैं idiot हूँ” आप इस scene को जितना बढ़ा चढ़ा कर देखेंगे उतना बेहतर है . चटक रंगों, खूब सारे animation,यहाँ तक कि आप कुछ sex से भी सम्बंधित सोच सकते हैं यदि ये आपको याद रखने में मदद करे. इस scene को बार-बार तब तक practice करते रहिये जब तक महज वो negative line सोचने भर से आपके दिमाग में आपकी कल्पना की हुई negative mental image ना आने लगे.
यदि आपको उस विचार का चित्रण करने में दिक्कत हो तो आप उसे एक आवाज़ का भी रूप दे सकते हैं. अपनी negative thought को एक आवाज़ में बदल लें , जैसे कि कोई धुन जिसे आप गुनगुनाते हों. इस प्रोसेस follow करने में को चाहे एक  sound की कल्पना करें या किसी चित्र की , दोनों ही तरह से ये काम करेगा. वैसे मैं किसी चित्र के बारे में कल्पना करना prefer करता हूँ.
 Step 2: उस negative thought को replace करने के लिए कोई powerful positive thought चुनें.
अब decide करिए की negative thought को replace करने के लिए आप कौन सी positive thought चुनेंगे. जैसे कि यदि आप ये सोचते रहते हैं कि, ” मैं idiot हूँ,” तो शायद आप उसे , “मैं brilliant हूँ.” से replace करना चाहेंगे. कोई ऐसी सोच चुनिए जो आपको कुछ इस तरह से शशक्त बनाए कि आप उस negative thought के असर को कमजोर बना पाए.

Step 3: अब अपनी positive thought को एक mental image में बदल लें

एक बार फिर से Step 1 की तरह ही अपनी positive thought के लिए एक mental image बना लें. जैसे कि उदाहरण में ली गयी सोच  “में brilliant हूँ” के लिए आप खुद को Superman की तरह दोनों हाथ कमर पर रख कर खड़ा हुआ होने की कल्पना कर सकते हैं.और आप सोच सकते हैं कि ठीक आपके सर के ऊपर एक bulb जल रहा है. Bulb बहुत तेज रौशनी के साथ जगमगा रहा है, और आप जोर से चीख रहे हैं, ” मैं bbbbrrrrrillllliannnnttt हूँ !”. इसकी practice तब तक करते रहिये जब तक महज वो positive line सोचने भर से आपके दिमाग में आपकी कल्पना की हुई positive mental image ना आने लगे.

Step 4: अब दोनों mental images को एक साथ जोड़ दीजिये.

आपने Step 1 और Step 3 में जो mental image सोची है , दोनों को अपने दिमाग में चिपका दीजिये. ये trick chaining नामक memory technique में प्रयोग होती है. इसमें आप पहले चित्र को दुसरे में परिवर्तित कर देते हैं. मेरा सुझाव है कि आप इस एक animated movie की तरह करिए. इसमें आपको पहला (negative picture) और आखिरी (positive picture) scene का अंदाजा है, बस आपको बीच में एक छोटा सा एनीमेशन भरना है.
For example, पहले scene में  आपके idiot version पर कोई एक light bulb फेंकता है.और आप उस बल्ब को कैच कर लेते हैं और  आपके पकड़ते ही वो बल्ब बड़ा होने लगता है और उससे इतनी तेज रौशनी निकलती है कि आपको घेरे हुए लोग चौंधिया जाते हैं. तब आप अपने मूर्खतापूर्ण कपड़ों को फाड़ कर फेंक देते हैं और चमचमाते सफ़ेद लिबास में प्रकट होते हैं. आप Superman की तरह पूरे आत्मविश्वास के साथ खड़े होकर जोर से चिल्लाते हैं, ” ” मैं bbbbrrrrrillllliannnnttt हूँ !”और फिर वो लोग अपने घुटनों के बल बैठ जाते हैं और आपकी पूजा करने लगते हैं. एक बार फिर , आप इसे जितना बढ़ा-चढ़ा कर सोचेंगे उतना अच्छा होगा. बढ़ा-चढ़ा कर सोचना आपको scene को याद रखें में मदद करेगा क्योंकि हमारा दिमाग unusual चीजों को याद रखने के लिए designed होता है.
एक बार जब आप पूरा scene complete कर  लें तो फिर बाद-बाद इसे अपने दिमाग में दोहरायें ताकि speed आ जाये. इस  scene को शुरू से अंत तक तब तक imagine करते रहिये जब तक कि आप पूरा का पूरा scene 2 मिनट में complete नहीं कर लेते, ideally 1 मिनट में. ये बिजली की तेजी से होना चाहिए, वास्तविक दुनिया से कहीं तेज.

 Step 5: Test.

अब आपको अपने mental redirect को टेस्ट करना है कि ये काम कर रहा है कि नहीं. ये बहुत हद्द तक HTML redirect की तरह है – जब आप पुराना negative URL input करते हैं, तब आपका दिमाग उसे automatically positive की तरफ  redirect कर देता है.Negative thought के  दिमाग में आते ही तुरन्त positive thought आपके दिमाग में आ जानी चाहिए. अगर आपने ये सही से practice किया है तो ये automatically होने लगेगा. Negative thought दिमाग में आते ही पूरा का पूरा scene आपके दिमाग में घूम जायेगा. इसलिए आप जब भी ये सोचेंगे कि , ” मैं idiot हूँ “, भले आप पूरी तरह से aware ना हो कि आप ऐसा सोच रहे हैं, आप अंत में खुद को ये सोचता हुआ पायेंगे कि, “मैं brilliant हूँ”
अगर आपने पहले ऐसा visualization नहीं किया है तो आपको ये सब करने में कुछ समय लगेगा. Speed practice के साथ आएगी. एक बार अभ्यास हो जाने के बाद सारी चीजें सेकेंडों में हो जाएँगी. पहली बार करने में चीजें धीमी गति से होंगी,इससे discourage मत  होइए . किसी भी और skill की तरह इसे भी learn किया जा सकता है,और शायद पहली बार सीखने में ये आपको ये कुछ अटपटा लगे.
मेरा सुझाव है कि आप अलग-अलग तरह की कल्पना के साथ experiment करिए. आपको कुछ कल्पनाएँ बाकियों से सही लगेंगी. Association Vs. Dissociation पर ख़ास ध्यान दीजिये. जब आप किसी scene से associated होंगे तो आप उसे अपनी आँखों से घटता हुआ देखेंगे( i.e. first person perspective). जब आप dissociated होंगे तो आप उस scene में खुद को देखने की कल्पना करेंगे ( i.e. third person perspective). आम  तौर  पर मुझे best results खुद को dissociate करने पर मिलते हैं. आपके results अलग हो सकते हैं.
मैंने 1990s की शुरआत में इस तरह की काफी mental conditioning की है. जब भी मुझे इस तरह की कोई नकारात्मक सोच परेशान करती थी तो मैं उसे चुनता था और उसकी दिशा बदल देता था.कुछ ही दिनों में मैंने दर्जनों negative thought patterns को reprogram कर दिया था, और कुछ ही दिनों में मेरे दिमाग के लिए negative thought या emotion produce करना भी कठिन हो गया. ऐसी कोई भी सोच positive सोच की तरफ redirect हो जातीं.शायद कुछ हद तक इसीलिए मैं college से निकलने के तुरंत बाद अपन business start करने में पूरा confident था.मैं mental conditioning के माध्यम से अपनी self-doubt सम्बंधित thoughts को can-do mindset में बदल देता था. कालेज के दिनों में मैंने इसका खूब प्रयोग किया और शायद इसी वजह से मैंने औरों से जल्दी graduate हो पाया.इसके बावजूद मुझे कई real-world challenges को face करना पड़ा, पर कम से कम मैं उस समय खुद के self-doubt से नहीं लड़ रहा था.
इस तरह की mental conditioning ने मुझे अपने अंदरुनी मामलों को control करने में काफी सहायता की.आज मैं ये इतना भली-भांति कर लेता हूँ कि बिना इसके बारे में सोचे ही ये automatically होता रहता है. किसी point पर मेरे subconscious ने इसका कंट्रोल ले लिया; इसलिए जब कभी मेरे मन कोई ऐसा विचार आता है कि , “I can’t” तो वो स्वतः ही ,”How can I?” में परिवर्तित हो जाता है. दरअसल जब आप mental conditioning को बहुत ज्यादा practice कर लेते हैं तो यही होता है- आपका subconscious कंट्रोल ले लेता है;ठेक विअसे ही जैसे कि साइकिल चलाने की practice के बाद हो जाता है.
अब जब कभी आपको लगे कि कोई negative thought आपके दिमाग में घर कर रही हो तो इसे try कीजिये. मेरे विचार है कि आप इसे काफी सशक्त बनाने वाला पाएंगे. और जिन्हें इससे फायदा पहुँच सकता है उनके साथ जरूर share करिए.

Tuesday, 12 November 2013

मीडिया क्या है

मीडिया....जैसा सोचा था,शायद वैसा है नही और शायद क्या वैसा है ही नही। मीडिया मे बहुत ज्यादा  उतार-चढाव है....या युं कहुं की बहुत गंदगी है यहां....उस कचरे के ढेर से ज्यादा जिस पर हजारों मक्खियां है..

मीडिया जन सूमह तक सूचना, शिक्षा और मनोरंजन पहुंचाने का एक माध्‍यम है। यह संचार का सरल और सक्षम साधन है। जो अर्थव्‍यवस्‍था के समग्र विकास में मुख्‍य भूमिका निभाता है। ऐसे युग में जहां ज्ञान और तथ्‍य आर्थिक राजनैतिक और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान के लिए औजार हैं, देश में सुदृढ़ और रचनात्‍मक मीडिया की मौजूदगी व्‍यष्टियों, सम्‍पूर्ण समाज, लघु और वृह्त व्‍यवसाय और उत्‍पादन गृहों, विभिन्‍न अनुसंधान संगठनों निजी क्षेत्रों तथा सरकारी क्षेत्रों की विविध आवश्‍यकताओं को पूरा करने में महत्‍वपूर्ण है। मीडिया राष्‍ट्र के अंत:करण का रक्षक है और हमारे दिन प्रतिदिन के जीवन में उसे बहुत से कार्य करने है। यह सरकार को विभिन्‍न सामाजिक-आर्थिक और राजनैतिक लक्ष्‍य हासिल करने में सहायता करता है शहरी और ग्रामीण जल समूह को शिक्षित करने, लोगों के बीच उत्तरदायित्‍व की भावना जागृत करने और जरूरत मदों को न्‍याय प्रदान करने में सहायता करता है। इसमें मोटे तौर पर प्रिंट मीडिया जैसे समाचार पत्र पत्रिका, जर्नल और अन्‍य प्रकाशन होते हैं तथा इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया जैसे रेडियो, टेलीविजन इंटरनेट आदि। विश्‍व के बदलते परिदृश्‍य के साथ इसने उद्योग का दर्जा प्राप्‍त कर लिया है। भारत में, मीडिया और मनोरंजन उद्योग में उल्‍लेखनीय परिवर्हन हो रहा है और यह एक सबसे तेज विकसित होता क्षेत्रक है। इसके लिए उत्तरदायी मुख्‍य कारक हैं प्रति व्‍यक्ति / राष्‍ट्रीय आय को बढ़ाना, उच्‍च आर्थिक वृद्धि और सशक्‍त मेक्रो-आर्थिक मूलभूत तत्‍व, और लोक तांत्रिक व्‍यवस्‍था, अच्‍छा शासन साथ ही देश में कानून और व्‍यवस्‍था की अच्‍छी स्थिति। विशिष्‍ट रूप से टेलीविजन उद्योग का उल्‍लेखनीय विकास, फिल्‍म निर्माण और वितरण के लिए नए प्रारूप निजीकरण और रेडियों का विकास, क्षेत्रक के प्रति सरकार की उदारीकृत मनोवृत्ति, अंतरराष्‍ट्रीय कम्‍पनियों के लिए/से सरलता से पहुंच, अंकीय संचार का आगमन और इसके प्रौद्योगिकीय अभिनव परिवर्तन इस क्षेत्रक के विकास की अन्‍य विशेषताएं हैं। मीडिया उद्योग देश में मजबूत व्‍यापार माहौल का सृजन करने के अतिरिक्‍त सूचना और शिक्षा मुहैया कराने द्वारा राष्‍ट्रीय नीति ओर कार्यक्रमों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रकार से यह राष्‍ट्र निर्माण के प्रयासों में जनता को सक्रिय भागीदार बनने में सहायता करता है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय भारत में मीडिया उद्योग से संबंधित नियमों, विनियमों और कानून के निर्माण एवं प्रशासन के लिए नोडल प्राधिकरण है। यह विभिन्‍न आयु वर्ग के लोगों की बौद्धि और मनोरंजनक आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने में लगा हुआ है। और यह राष्‍ट्रीय अखंडता, पर्यावरणीय रक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल और परिवार कल्‍याण निरक्षरता का उन्‍मूलन तथा महिला बच्‍चों और समाज के कमजोर वर्ग से संबंधित मुद्दों की ओर जन समूह का ध्‍यान आकर्षित करता है। यह सूचना के मुक्‍त प्रवाह का अभिगमन के लिए लोगों को सहायता करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह जन संचार, फिल्‍मों और प्रसारण के क्षेत्र में अंतरराष्‍ट्रीय सहयोग के लिए जिम्‍मेदार है और भारत सरकार की ओर से विदेशी पक्षों के साथ अन्‍योन्‍याय क्रिया करता है :-
लोगों के लिए आकाशवाणी (एआईआर) और दूरदर्शन (डीडी) के माध्‍यम से समाचार सेवा प्रदान करना
प्रसारण और टेलीविजन नेटवर्क का विकास करना तथा फिल्‍मों का निर्यात एवं आयात का संवर्धन करना
सरकार के विभिन्‍न विकासात्‍मक क्रियाकलापों और कार्यक्रमों में अधिकाधिक भागीदारी के लिए लोगों को शिक्षित करना और प्रेरणा देना।
सूचना औश्र प्रचार के क्षेत्र में राज्‍य सरकारों और उनके संगठनों के साथ संबंध बनाना
देश में फिल्‍मोत्‍सव और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान का आयोजन करना
समाचार पत्रों के संबंध में प्रसे और पुस्‍तक पंजीकरण अधिनियम, 1968 को प्रवृत्त करना
राष्‍ट्रीय महत्‍व के विषयों को प्रकाशन के माध्‍यम से देश के भीतर और बाहर भारत के बारे में सूचना का प्रचार-प्रसार करना
लोक हित के मुद्दों पर सूचना प्रचार के अभियान के लिए अन्‍तर व्‍यैक्ति संचार और पारम्‍परिक लोक कला के रूपों का उपयोग करना
केन्‍द्र सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों से संबंधित सरकारी सूचना और मूलडाला का स्‍वीकृति केन्‍द्र के रूप में कार्य करने द्वारा सरकार और प्रेस के बीच सतत सम्‍पर्क के रूप में कार्य करना।
मंत्रालय को निम्‍नलिखित स्‍कंधों में विभाजित किया गया है, अर्थात:-
सूचना स्‍कंध – यह नीतिगत मामलों, प्रिंट मीडिया तथा सरकार की प्रेस और प्रचार संबंधी आवश्‍यकताओं पर कार्य करता है। इस स्‍कंध में मीडिया यूनिट निम्‍नलिखित हैं:-

प्रेस सूचना ब्‍यूरो
फोटो प्रभाग
अनुसंधान, अवलोकन और प्रशिक्षण प्रभाग
प्रकाशन विभाग
विज्ञापन और दृश्‍य प्रचार निदेशालय
क्षेत्र प्रकाशन निदेशालय
संगीत और नाटक प्रभाग
भारत के लिए समाचारपत्र पंजीयक
भारतीय प्रेस परिषद
भारतीय जनसंचार संस्‍थान।
प्रसरण स्‍कंध – यह इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया से संबंधित मामले पर कार्य करता है। यह इस क्षेत्र के लिए नीतियों और रूपरेखा नियमों तथा विनियमों का निर्धारण करता है, जिसमें लोक सेवा प्रसारण, केबल टेलीविजन का प्रचालन, निजी टेलीविजन चैनल, एफएम चैनल, उपग्रह रेडियो, सामुदायिक रेडियो, डीटीएच सेवा आदि का प्रसारण शामिल है। इस स्‍कंध के अंतर्गत संगठन में निम्‍नलिखित शामिल है:-

इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया निगरानी केन्‍द्र
प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) – इसकी स्‍थापना आयोजन करने और लोगों का मनोरंजन करने के लिए किया गया है और एजेंसियों जैसे:- (i) आकशवाणी और (ii) दूरदर्शन के माध्‍यम से रेडियों और टेलीविजन पर प्रसारण का संतुलित विकास सुनिश्चित करने लिए किया गया है।
ब्राडकास्‍ट इंजीनियरिंग कंसल्‍टेंस (रेडियो) लिमिटेड (बीईसीआईएल)

फिल्‍म स्‍कंध – यह फिल्‍म क्षेत्रक से संबंधित मामलों पर कार्य करता है। अपने विभिन्‍न यूनिटों के माध्‍यम से यह डाक्‍युमेटरी फिल्‍मों के निर्माण और वितरण में रत है जिनकी आवश्‍यकता आंतरिक और बाहय प्रचार के लिए होती है, फिल्‍म उद्योग से संबंधित विकासात्‍मक और संवर्धनात्‍मक क्रियाकलाप, जिसमें प्रशिक्षण, अच्‍छी सिनेमा का संवर्धन, फिल्‍मोत्‍सव का आयोजन करना, विनियमों का आयात और निर्यात करना आदि शामिल है। इस स्‍कंध के निम्‍नलिखित मीडिया यूनिट हैं:

फिल्‍म प्रभाग
फिल्‍म प्रमाणन का सिनेमा बोर्ड
भारतीय राष्‍ट्रीय फिल्‍म अभिलेखागार
राष्‍ट्रीय फिल्‍म विकास निगम
भारतीय फिल्‍म और टेलीविजन
सत्‍यजीत राय फिल्‍म और टेलीविजन संस्‍थान
फिल्‍मोत्‍सव निदेशालय
बाल फिल्‍म सोसाइटी

समेकित वित्त स्‍कंध – यह मंत्रालय के लेखा का रखरखाव और निगरानी का महत्‍वपूर्ण कार्य ''मुख्‍य लेखा नियंत्रक'' के अ‍धीनस्‍थ कार्यालय के माध्‍यम से करता है।

मीडिया उद्योग ने देश में उदार निवेश क्षेत्र से उललेखनीय लाभ पहुंचाता है। इसके विभिन्‍न खंडों में विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश की अनुमति दी गई है। प्रिंट मीडिया के लिए गैर समाचार प्रकाशन सहित शत प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है और समाचार और ताजा मामलों को शामिल करने वाले प्रिंट और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के लिए 26 प्रतिशत तक के एफडीआई (एफआईआई सहित) की अनुमति है। जबकि एफआईआई, एनआरआई और पीआईओ के लिए नए क्षेत्र भी खुले हैं। एफएम रेडियो प्रसारण क्षेत्र में एफडीआई (एफआईआई सहित) को 20 प्रतिशत की अनुमति दी गई है। जबकि एफडीआई और एफआईआई को केबल नेटवर्क, प्रत्‍यक्ष रूप से घर में (डीटीएच) के लिए 49 प्रतिशत तक की अनुमति है (इस सीमा के अंदर एफडीआई का घटक 20 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ना चाहिए), अपलिंकिंग, हब (टेलीपोर्ट) आदि जैसी हार्डवेयर सुविधाओं की स्‍थापना। वर्तमान में भारत में 110 मिलियन टेलीविजन रखने वाले घर हैं, जिनमें से लगभग 70 मिलियन घरों में केबल और सेटेलाइट है और शेष 40 मिलियन घरों को सार्वजनिक प्रसारक द्वारा सेवा प्रदान की जाती है अर्थात दूरदर्शन। इसी प्रकार देश में 132 मिलियन रेडियो सेट हैं। पुन: पिछले कुछ वर्षों में निजी उपग्रह टीवी चैनलों की संख्‍या बहु तेजी से 2000 में एक टीवी चैनल से बढ़कर 31 दिसम्‍बर 2007 तक 273 टीवी चैनल तक पहुंच गई है। समाचार और ताजा मामलों के टीवी चैनल 58 प्रतिशत और गैर समाचार तथा ताजा मामलों के टीवी चैनल कुल अनुमत 273 टीवी चैनलों का 42 प्रतिशत हैं। पूर्व चैनलों की संख्‍या 2000 में केवल 1 से बढ़ कर 31 दिसम्‍बर 2007 को 158 हो गई है, जबकि दूसरे की संख्‍या 0 से 115 तक पहुंच गई है।
मंत्रालय द्वारा अनेक नीतिगत सिद्धांत बनाए जाने के साथ अनेक मार्गदर्शी सिद्धांत तैयार किए जाते हैं ताकि देश में विभिन्‍न जन संचार मीडिया के स्‍वस्‍थ विकास के लिए एक उपयुक्‍त परिवेश बनाया जा सके।
'टेलीविजन चैनलों के डाउनलिंकिंग के लिए नीतिगत दिशानिर्देश' जिसका निहितार्थ सभी उपग्रहण टेलीविजन चैनलों को डाउनलिंकिंग जिनका भारत में जनता के देखने के लिए डाउनलिंग किया गया/प्राप्‍त किया गया और पारेषण एवं पुन: पारेषण किया गया। इसके अधीन कोई व्‍यक्ति या कम्‍पनी चैनल डाउनलिंक नहीं करेगा जिसका पंजीकरण मंत्रालय द्वारा नहीं किया गया है। इसलिए टेलीविजन उपग्रह प्रसारण सेवा प्रदान करने वाले सभी व्‍यक्ति/कंपनी दूसरे देशों के दर्शकों के साथ भारत में अपलिंक होते हैं तथा कोई भी कंपनी जो ऐसी उपग्रह टेलीविज़न प्रसारण सेवा प्रदान करना चाहता है जो जनता के देखने के लिए भारत में प्राप्‍य हो उसे निर्धारित निबंधनों और शर्तों के अनुसार मंत्रालय से अनुमति प्राप्‍त करने की आवश्‍यकता होगी। नीतिगत दिशानिर्देश कुछ अर्हक मानदण्‍ड आवेदक कंपनी के लिए निर्धारित करता है, जो निम्‍नलिखित हैं:-

कंपनी (आवेदक कंपनी) चैनल डाउनलिंक करने की अनुमति के लिए आवेदन करता है, विदेशों से अपलिंक्‍ड होता है वह ऐसी कंपनी होगी जिसका पंजीकरण कंपनी अधिनियम 1956 के अधीन किया गया है इसमें इसका इक्विटी ढांचा, विदेशी स्‍वामित्‍व या प्रबंधन नियंत्रण चाहे जो भी हो।
आवेदक कंपनी का भारत में वाणिज्यिक मौजूदगी हो जिसका मुख्‍य व्‍यापार स्‍थान भारत में हो
यह या तो उस चैनल का मालिक हो जिसे वह जनता के देखने के लिए डाउनलिंक करना चाहता है या भारत के भूभाग के लिए उसके लिए उसके पास विशिष्‍ट विपणन/वितरण अधिकार हो जिसमें विज्ञापन और चैनल के लिए खरीद राजस्‍व हो और उसे आवेदन के समय पर्याप्‍त प्रमाण जमा करना होगा।
यदि आवेदक कंपनी के पास विशिष्‍ट विपणन/और वितरण अधिकार है तो इसके पास विज्ञापन के लिए, खरीद और कार्यक्रम विषय वस्‍तु के लिए चैनल की ओर से संविदा तय करने का भी अधिकार होना चाहिए।
आवेदक कंपनी के पास निर्धारित विवरण के अनुसार न्‍यूनतम निवल मूल्‍य होना चाहिए, अर्थात 1.5 करोड़ रु. का निवल मूल्‍य एक चैनल की डाउन लिंकिंग के लिए और प्रत्‍येक अतिरिक्‍त चैनल के लिए एक करोड़ रु. होने चाहिए।
इसे कंपनी के सभी निदेशकों के नाम और विवरण तथा मुख्‍य कार्यपालकों के जैसे कि सीईओ, सीएफओ और विपणन प्रमुख आदि की जानकारियां उनके राष्‍ट्रीय सुरक्षा समाशोधन प्राप्‍त करने के लिए देनी चाहिए।
इसे तकनीकी विवरण जैसे कि नामकरण, मेक, मॉडल, उपकरण / उपस्‍कर के विनिर्माता का नाम और पता, जिसका उपयोग डाउन लिकिंग और वितरण के लिए किया जाएगा, डाउन लिंकिंग तथा वितरण प्रणाली के ब्‍लॉक योजनाबद्ध आरेख और साथ ही इसे 90 दिनों के लिए निगरानी एवं भण्‍डारण अभिलेख क सुविधा का प्रदर्शन भी करना चाहिए।
इसी प्रकार 'भारत से अप लिंकिंग के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत', की अधिसूचना में, जहां आवेदक द्वारा एक अप लिंकिंग हब /टैली पोर्ट की स्‍थापना या एक टीवी चैनल को अपलिंक करने या एक समाचार एजेंसी द्वारा अपलिंक की सुविधा स्‍थापित करने हेतु अनुमति मांगी जाती है तो यह कंपनी भारत में कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत कंपनी होनी चाहिए। यह कंपनी केवल उन टीवी चैनलों को अपलिंक करेगी, जिन्‍हें मंत्रालय द्वारा विशिष्‍ट रूप से अनुमोदित या अनुमत किया गया है। आवेदक कंपनी के साथ अपलिंकिंग हब / टेली पोर्ट की स्‍थापना के लिए विदेशी इक्विटी धारिता एनआरआई / ओसीबी / पीआईओ सहित 49 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। निवल मूल्‍य आवश्‍यकता चैनल की एक से दस तक क्षमता के लिए 1 करोड़ से 3 करोड़ के बीच होती है। आवेदक कंपनी का स्‍वामी चाहे कोई भी हो, इसकी इक्विटी संरचना या प्रबंधन का नियंत्रण गैर समाचार और ताजा मामलों के टीवी चैनल की अपलिंकिंग के लिए अनुमति पाने का पात्र होगा। निवल मूल्‍य जो एकल टीवी चैनल के लिए आवश्‍यक है, इसकी राशि प्रत्‍येक अतिरिक्‍त चैनल के लिए 1.5 करोड़ रु. और 1 करोड़ रु. है जबकि एक समाचार और ताजा मामलों वाले टीवी चैनल की अपलिंकिंग के लिए एकल टीवी चैनल हेतु निवल मूल्‍य 3 करोड़ रु. और प्रत्‍येक अतिरिक्‍त टीवी चैनल के लिए 2 करोड़ रु. है।

मंत्रालय ने भारत में डायरेक्‍ट टू होम (डीटीएच) प्रसारण सेवा प्रदान करने के लिए लाइसेंस प्राप्‍त करने हेतु दिशानिर्देश', जारी किया है, जहां डीटीएच सेवा का अभिप्राय केबल ऑपरेटर जैसे किसी माध्‍यम के पास से आए बगैर ग्राहक के परिसरों को टीवी सिग्‍नल मुहैया कराने हेतु उपग्रह प्रणाली का उपयोग करके कु-बैंड में चैनल टीवी कार्यक्रम का वितरण करना है। दिशानिर्देश के अर्हक मानदण्‍डों में निम्‍नलिखित शामिल हैं :-

आवेदक कंपनी भारतीय कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत के भारतीय कंपनी होनी चाहिए।
आवेदक कंपनी में एफडीआई / एनआरआई /ओसीबी / एफआईआई सहित कुल विदेशी इक्विटी धारिता 49 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। विदेशी इक्विटी के अंदर एफडीआई का घटक 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
आवेदक कंपनी में भारतीय प्रबंधन नियंत्रण के साथ मंडल में अधिकांश प्रतिनिधित्‍व तथा कंपनी के मुख्‍य कार्यकारी का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है, आदि।

एक 'निजी एजेंसियों के माध्‍यम से एफएम रेडियो प्रसारण सेवाओं के विस्‍तार पर नीति (फेज-II)' की घोषणा ऑल इंडिया रेडियो के प्रयासों को पूरकता और पूर्ति प्रदान करने के लिए निजी एजेंसियों के माध्‍यम से एफएम रेडियो नेटवर्क के विस्‍तार हेतु की गई है। इसे ऐसे रेडियो स्‍टेशनों के प्रचालन द्वारा किया जाना है जो स्‍थानीय सामग्री और सार्थकता के साथ कार्यक्रम प्रस्‍तारित करते हैं, ग्राह्यता और उत्‍पादन में फीडेलिटी की गुणवत्ता में सुधार करते हैं, स्‍थानीय प्रतिभा की भागीदारी को प्रोत्‍साहन देते हैं और रोजगार उत्‍पादन करते हैं। ऐसे 21 चैनल प्रथम चरण में पहले से ही कार्यरत हैं। इन 337 चैनलों में से दूसरे चरण के दौरान आशय पत्र 245 चैनलों को प्रदान किया गया, इनमें से सभी चैनलों ने करार नामों पर हस्‍ताक्षर कर दिए हैं। कुल मिलाकर 178 निजी एफएम चैनल भारत में अब तक प्रचालनरत हैं, जिसमें प्रथम चरण के 21 चैनल शामिल है।

'सिनेमेटोग्राफ फिल्‍मों और अन्‍य फिल्‍मों के आयात', के लिए भी है जहां सिनेमेटोग्राफ फीचर फिल्‍मों और अन्‍य फिल्‍मों (जिसमें वीडियो टेप में फिल्‍म, कॉम्‍पैक्‍ट, वीडियो डिस्‍क, लेसर वीडियो डिस्‍क या डिजिटल वीडियो डिस्‍क शामिल हैं) को लाइसेंस के बगैर अनुमत किया गया है। फिल्‍म के आयातक फिल्‍मों के वितरण और प्रदर्शन को शासित बनने वाले सभी प्रयोज्‍य भारतीय कानूनों का अनुपालन करेंगे जिनमें सिनेमेटोग्राफी अधिनियम, 1952 के तहत निर्धारित सार्वजनिक प्रदर्शन प्रमाणपत्र प्राप्‍त करने की अपेक्षाएं शामिल हैं। इसके तहत किसी अनधिकृत नकली फिल्‍म का आयात प्रतिबद्धित है। भारतीय फिल्‍मों का विदेशी रिप्रिन्‍ट का आयात मंत्रालय में लिखित रूप में पूर्वानुमति के बिना अनुमत नहीं होगा।

'प्रसारण सेवा विनियमन विधेयक प्रारूप, 2007' की घोषणा एक क्रमबद्ध रूप में प्रसारण के प्रबंधन और सामग्री को प्रोत्‍साहन, सुविधा और विकास प्रदान करने के लिए की गई है। इस प्रयोजन के लिए इसका लक्ष्‍य एक ऐसे स्‍वतंत्र प्राधिकरण की स्‍थापना है, जिसे भारतीय प्रसारण विनियामक प्राधिकरण कहा जाए और यह शैक्षिक, विकास संबंधी, सामाजिक, सांस्‍कृतिक और अन्‍य जरूरतों के लिए उत्तरदायी रूप से प्रसारण सेवाओं को प्रोत्‍साहन दें तथा लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करें एवं उनके कार्यक्रमों में लोक सेवा संदेश तथा सामग्री आदि को शामिल किया जाए।

ऐसी सभी पहलों के परिणामस्‍वरूप भारत में मीडिया उद्योग ने वर्षों से उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्शाया है लगभग दो अंकीय वृद्धि हुई है। इसे 437 बिलियन रु. के आकलित आकार से वर्ष 2011 तक एक ट्रिलियन रु. तक बढ़ने का अनुमान है। अधिक पूंजी प्रवाह लाता है और प्रत्‍यक्ष और प्रत्‍यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार के लिए महत्‍वपूर्ण मार्ग दर्शाता है। यह विभिन्‍न राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय मुद्दों के बारे में लोगों का दृष्टिकोण और विचार बनाने में सहायता करता है इस प्रकार से योजनाओं के निर्माण, नीतियां और कार्यक्रम बनाने में सहायता करता है। यह मनोरंजन देने, सूचना का प्रचार-प्रसार करने, विभिन्‍न मतों का पोषण और विकास करने भारत के नागरिकों को जानकारी, नागरिक बनने में शिक्षित बनाने और सशक्‍त बनाने के लिए शक्तिशाली माध्‍यम है ताकि लोग प्रजातंत्रिक प्रक्रिया में प्रभावी रूप से भाग ले सकें तथा देश की विविध भारतीय संस्‍कृति और योग्‍यता का संरक्षण, संवर्धन और अभिकल्‍पना करने में सहायता करता है।

अल्पसंख्यक शिक्षा की लाईफ लाइन बना मौलाना आजाद फाउंडेशन

स्वतंत्र भारत में अल्पसंख्यकों के भविष्य को देखते हुए जब अबुल कलाम मुहियुद्दीन अहमद आजाद ने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया तो उस समय केशव बलिराम हेडगेवार और उनके सहयोगियों ने मौलाना आजाद की दूरदृष्टि का मजाक उड़ाते हुए उन्हें समय का ज्ञान न होने के साथ पक्षपाती और अदूरदर्शी करार दिया था।

आलोचनाओं की परवाह ना करते हुए मौलाना ने अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा को ही सबसे बेहतर बताने की वकालत जारी रखी और अपने इस सपने के साथ उन्होंने भारत के विभाजन का विरोध किया। वे अच्छी तरह से जानते थे कि मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों का भविष्य पाकिस्तान जैसे गैर धर्मनिरपेक्ष देश की धरती पर अपनी ताकत और प्रतिभा को बर्बाद करने की बजाये संयुक्त भारत में अधिक बेहतर होगा।

उनकी एकजुट रहने की पुरजोर अपीलों के बावजूद भारतीय इतिहास ने विभाजन जैसी भयावह वास्तविकता का सामना किया और मौलाना आजाद ने खुद को स्वतंत्र भारत के अल्पसंख्यकों के कल्याण कार्य में लगा दिया। बाद में, 1988 में उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर जब ‘मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन’ स्थापित किया गया तो इसके प्रयासों ने कुछ ही वर्षों के भीतर हेडगेवार को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया। इसकी नींव भारतीय समाज में शैक्षिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों के बीच शिक्षा को समग्र रूप से बढ़ावा देने के पर टिकी थी।

आसमा इकबाल बताती हैं कि मौलाना आजाद फाउंडेशन के अंतर्गत उन्होंने कुछ साल पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं का फायदा लेने के लिये दरवाजा खटखटाया तो इस फाउंडेशन ने साबित कर दिया कि यह उनकी श्क्षिा के लिये ही वरदान नहीं है बल्कि इसके जरिये वे किसी भी योग्य भारतीय अल्पसंख्यक की तरह ही बेहतर जीवन जीने के लिए आर्थिक रूप से सशक्त बनने के काबिल हुईं।

आस्मा इस संरक्षण संस्था के बारे में गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहती हैं कि ‘‘मेरी शिक्षा के लिये माता-पिता द्वारा अपनी तरफ से पूरी कोशिशों के बाद भी ऐसी स्थिति भी आई जब मुझे चिकित्सा विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए और अधिक धन की जरुरत थी। मैंने फाउंडेशन से संपर्क किया और फिर मेरी पात्रता तथा अन्य जरुरी चीजों पर गौर करने के बाद फाउंडेशन लगभग सारे खर्चों को उठाने पर सहमत हो गया।’’

वित्तीय मदद देने के अलावा फाउंडेशन ने प्रतिस्पर्धा और बाजार की ताकतों से निपटने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया! ‘‘मैंने यह सोचा भी नहीं था कि एक फाउंउेशन इस तरह के अपेक्षित मार्गदर्शन के साथ आगे आयेगा। लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ कि इस सेटअप में कुछ पेशेवरों ने मुझे शैक्षिक सशक्तिकरण के तहत कई फायदे देने की पेशकश की। मैंने ना सिर्फ समय पर अपनी शिक्षा को पूरा किया बल्कि हैदराबाद में एक रोग अनुसंधान केंद्र में बढ़िया नौकरी भी हासिल की। आस्मा गर्व से बताती हैं।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 12वीं योजना में अल्पसंख्यक बच्चों के आर्थिक सशक्तिकरण और बेहतर भविष्य के लिए नेतृत्व गुणों के विकास पर विशेष ध्यान देने के साथ मौलाना आजाद फाउंडेशन का कॉरपस फंड 750 करोड़ से बढ़ाकर 1500 करोड़ कर दिया। भारत के 30 करोड़ योग्य अल्पसंख्यकों - मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसी - में भरोसा बढ़ाने के लिये ढेरों कल्याणकारी योजनाएं बनाई गई हैं। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिये फाउंडेशन को अपने कोष का बड़ा हिस्सा उपभोग करने की खुली छूट दी गई है।

शैक्षिक सशक्तिकरण के तहत छात्रवृत्ति आधारित कार्यक्रमों के अलावा फाउंडेशन उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान करता हैं और इनमें उद्यमशीलता की आकांक्षाओं को बढ़ावा देने में मदद करता है। फाउंडेशन की योजनाओं से फायदा प्राप्त करने वाली एक और लाभार्थी जसप्रीत कौर के मुताबिक केंद्र सरकार अल्पसंख्यक छात्रों को शिक्षा में पूरी मदद और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए छोटे व्यवसाय/इकाईयां स्थापित करने के लिए प्रचुरता से योजनाओं को चला रही है, लेकिन दुर्भाग्य से जागरुकता की कमी इन योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में बड़ी बाधा बन रही है।

‘‘मैंने अपना व्यवसाय प्रबंधन पाठ्यक्रम पूरा करने के तुरंत बाद मैंने फाउंडेशन सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों से संपर्क किया। मैंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) के अधिकारियों से मुलाकात की। अपनी समस्या को हल करने के लिए मुझे सुझाव दिया गया कि सूक्ष्म वित्त विकल्प और फाउंउेशन की कुछ अन्य योजनाओं को देखूं। मैं आर्थिक सशक्तिकरण योजनाएं जैसे अन्य विकल्पों को भी ध्यान में रखे हुए था, लेकिन अंत में, मैंने काफी रियायती दर पर मिले सावधि ऋण का विकल्प चुना। इस छोटी सी शुरुआत के साथ आज मैं 2 करोड़ रुपये की बिक्री वाले ‘पैकेजिंग’ व्यवसाय को चला रही हूं।’’ जसप्रीत ने कहा।

यूपीए सरकार ने सैद्धान्तिक तौर पर अल्पसंख्यकों के आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए काफी कुछ किया है इस बात को अपने अनुभव के जरिये बताने वाली जसप्रीत ही केवल अकेली नहीं हैं। इस तरह के लाभ प्राप्त करने वाले प्रावधानों और तकनीकी प्रक्रिया का फायदा अल्पसंख्यकों तक पहुंचाने की दिशा में काफी जागरुकता फैलाने की जरुरत है।

‘‘मैंने हाल ही में मौलाना आजाद फाउंडेशन में अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए वित्तीय मदद के लिए आवेदन किया है। मुझे विश्वास है कि यह मुझे मिल जायेगा और मेरा भविष्य भी उज्जवल होगा। जहां तक मार्गदर्शन की बात है, मैं आपको बता दूं कि फाउंडेशन बहुत अच्छा काम कर रहा है। ऐसा महसूस हो रहा है कि सरकार ने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए खजाने को खोल दिया है। दिल्ली के जाकिर हुसैन कॉलेज के छात्र सोहेल आलम ने मुस्कुराते हुए कहा।

एक तरफ सरकार ने मौलाना आजाद फाउंडेशन को प्रचुर मात्रा में शैक्षिक सशक्तिकरण योजनाओं से लैस किया है, दूसरी ओर योग्य अल्पसंख्यकों में से युवाओं में भी उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा पर जोर देने की आकांक्षा कुलाचें मार रही हैं। बस यह देखना होगा कि जागरुकता की कमी को कैसे दूर किया जायेगा।

Thursday, 7 November 2013

राज्य चुनावों को लेकर सट्टा बाजार में बीजेपी की हवा

सट्टा बाजार में बीजेपी की हवा है। नवंबर में दांव पर लगी रकम 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच सकती है। हालांकि, अगर किसी बड़े नेता का निधन होता है, तो सट्टा कैंसल माना जाएगा। दिल्ली और मुंबई के बुकीज ने यह जानकारी दी है। सट्टा बाजार में 'किसी बड़े नेता के निधन' वाला क्लॉज पहली बार डाला गया है। पटना में नरेंद्र मोदी की रैली से पहले हुए बम धमाकों के बाद सट्टे के लिए यह शर्त जोड़ी गई है।
बुकीज को डर है कि दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में हिंसा हो सकती है। सट्टा सिंडिकेट के दिल्ली के मेंबर ने बताया, 'अगर चुनाव के दौरान हिंसा या बम धमाकों में किसी बड़े नेता की मौत होती है, तो सभी सट्टे खत्म माने जाएंगे।' बुकीज का यह भी मानना है कि चारों राज्यों में बीजेपी का परफॉर्मेंस अच्छा रहेगा। दिल्ली के एक सूत्र ने बताया, 'मोदी को सपोर्ट करने वालों की संख्या बढ़ रही है। इस वजह से चारों राज्यों में बीजेपी की जीत होगी।'...
बुकीज का मानना है कि राजस्थान में बीजेपी आसानी से कांग्रेस को हरा देगी। राज्य में 230 विधानसभा सीटें हैं। सट्टा बाजार में बीजेपी के इनमें से 101 सीटें जीतने पर 1 रुपए पर 14 पैसे अधिक देने का वादा किया जा रहा है। अगर कांग्रेस राज्य में 60 सीटें भी जीत पाती हैं, तो बुकी 1 रुपए पर 26 पैसे ज्यादा देने को तैयार हैं।
कांग्रेस के 75 से ज्यादा सीटें जीतने पर 2.8 रुपये का भाव है। कांग्रेस के पास अभी 96 सीटें हैं। दिल्ली की 70 सीटों में से बीजेपी के 28 सीटें जीतने पर बुकीज 24 पैसे ज्यादा देने को तैयार हैं। जो लोग इस पर दांव लगा रहे हैं, उन्हें पार्टी के 28 से कम सीटें जीतने पर रकम गंवानी होगी। 2008 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को दिल्ली में 23 सीटों पर जीत मिली थी।
बुकीज का कहना है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में 8 से ज्यादा सीटें नहीं जीतेगी, लेकिन वह बड़ी पार्टियों का खेल बिगाड़ सकती है। पहले सीएम कैंडिडेट पर अलगसे सट्टा लगता था। हालांकि, इस बार इस तरह का सट्टा नहीं लग रहा है। बुकीज का कहना है कि इस बार एकदम साफ नहीं है कि इन राज्यों में कौन सीएम बनेगा? मध्य प्रदेश में भी बीजेपी के सत्ता में फिर से आने के चांस हैं। राज्य में 230 विधानसभा सीटें हैं। बुकीज कांग्रेस के राज्य में 70 या इससे ज्यादा सीटें जीतने पर 1.10 रुपये का भाव देने को तैयार हैं।

कांग्रेसी युवराज

वैसे कांग्रेसी, युवराज को हाफ स्लीव शर्ट पहनने की सलाह क्यों नहीं देते...। बेचारे कुर्ते की बांह को उपर करने में परेशान रहते हैं.. इसी से सारी गड़बड़ी हो जाती होगी कुछ का कुछ बोल जाते होंगे